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Vijaya Ekadashi

विजया एकादशी : विजया एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र व्रत माना जाता है और इस व्रत को पूर्ण करने के बाद विजय प्राप्त होती है विजया एकादशी का व्रत पुराने तथा नए पापों को नाश करने वाला है प्रत्येक चन्द्र मास में दो एकादशी पड़ती है और इस प्रकार एक वर्ष में 24 एकादशी पड़ती है जिस वर्ष में अधिमास होता है उस वर्ष में 26 एकादशियां आती है वैसे तो एकादशी का शाब्दिक अर्थ चंद्र माह की ग्यारहवीं तारीख़ से है इसमें चन्द्र माह के दो भाग होते है एक कृष्ण पक्ष और दुसरा शुक्ल पक्ष इसमें दोनों पक्षों की ग्यारवीं तिथि एकादशी तिथि कहलाती है |

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Vijaya Ekadashi 2020

विजया एकादशी 2020 में 22 फरवरी को है जिसमे की हम आपको बातएंगे की आप किस प्रकार से इस पूजन को करे और क्या करे और क्या न केरे और क्या है विजया एकादशी का महत्व |

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Vijaya Ekadashi Story

विजया एकदशी स्टोरी यह है की एकादशी कथा के अनुसार विजया एकादशी को भगवान श्री राम लंका पर सीता माता को छुड़ाने के लिये समुद्र तट पर पहुंच़े थे तभी समुद्र तट पर पहुचने पर भगवान श्री राम ने देखा की सामने तो विशाल समुद्र है और उनकी पत्नी सीता जी रावण की कैद में थी इस पर भगवान श्री राम ने समुद्र देवता से खुद मार्ग देने की प्रार्थना की परन्तु समुद्र देव ने जब श्री राम को लंका पर जाने लिए मार्ग नहीं दिया तो भगवान श्री राम ने ऋषियों और संतो से इसका उपाय पूछा तब उन्होंने भगवान राम को बताया की हर शुभ कार्य को शुरु करने से पहले व्रत करने पड़ते है और व्रत और अनुष्ठान कार्य करने से कार्यसिद्धि की प्राप्ति होती है जिससे आपके सभी कार्य सफलतापूर्वक होते है |

Vijaya Ekadashi 2020

Vijaya Ekadashi in Hindi

विजय एकादशी इन हिंदी : तभी उनको बताया की हे भगवान आप भी फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करे | इसके लिए आपको एक मिट्टी के घडे को सात तरह के धान्यों से भरे फिर उसके ऊपर पीपल, आम, बडौर गुलर के पत्ते रखे फिर एक बर्तन में जौ भर कर कलश स्थापित करे जौ से भरे हुए बर्तन में श्री लक्ष्मी नारायण कि तस्वीर स्थापित करे और इन सभी का विधिपूर्वक पूजन करे इस तरह से एकादशी तिथि के दिन व्रत कर, रात्रि में जागरण करेऔर प्रात:काल जल सहित उस कलश को सागर में अर्पित करे उसके बाद श्री राम ने ऋषि-मुनियो के कहे अनुसार व्रत आरम्भ किया और व्रत को करने के बाद से समुद्र आपको रास्ता देगा और इस व्रत की मदद से आपको रावण पर विजय भी प्राप्त होगी उसके बाद से अब तक इस व्रत को विजय प्राप्ति के लिये किया जाता है.

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Ekadashi Vrat Udyapan Vidhi in Hindi

एकादशी  व्रत में क्या-2 करे और क्या-2 न करे किस तरह से भगवन विष्णु का पूजन करे इस एकादशी व्रत उद्यापन विधि इन हिंदी और व्रत सामग्री इसकी पूरी जानकारी हमारी इस पोस्ट से हम आपको देते है :

  • एकादशी व्रत करने के बाद स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्नदान और गौदान से अधिक पुन्य फलों की प्राप्ति होती है |
  • एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है
  • व्रत पूजन में धूप, दीप, नैवेध, नारियल का प्रयोग किया जाता है
  • विजया एकादशी व्रत में सात धान्य घट स्थापना की जाती है. सात धान्यों में गेंहूं, उड्द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. इसके ऊपर श्री विष्णु जी की मूर्ति रखी जाती है
  • इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को पूरे दिन व्रत करने के बाद रात्रि में विष्णु पाठ करते हुए जागरण करना चाहिए
  • व्रत से पहले की रात्रि में सात्विक भोजन करना चाहिए. और रात्रि भोजन के बाद कुछ नहीं लेना चाहिएएकादशी व्रत 24 घंटों के लिये किया जाता है. व्रत का समापन द्वादशी तिथि के प्रात:काल में अन्न से भरा घडा ब्राह्माण को दिया जाता है

 

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