Basant Panchami Poem In Hindi | बसंत पंचमी पर कविता

बसंत पंचमी पर कविता

बसंत पनाचामी पोएम इन हिंदी | Basant Panchami Par Kavita : बसंत पंचमी का त्यौहार हिन्दू धर्म के लोगो के लिए बहुत महत्व रखता है यह त्यौहार शीत ऋतू के जाने तथा बसंत ऋतू के आने का सन्देश होता है जिसमे की सरस्वती माँ की अर्चना होती है | यह उत्सव पुरे भारत में धूमधाम के साथ मनाया जाता है जिसमे की कक्षा क्लास 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 12 के छात्रों को बसंत ऋतू पर कविता या वसंत पंचमी पर कविता पढाई जाती है इसीलिए हम आपको सुमित्रानंदन पंत या और भी कई प्रसिद्ध कवियों द्वारा बसंत पंचमी के ऊपर लिखी गयी कुछ कविताये बताते है जो की आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है |

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सुमित्रानंदन पंत की वसंत पर कविता – बसंत ऋतु कविता

Sumitrananadan Pant Ki Vasant Par Kavita : बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है तथा बच्चो को स्कूल व कॉलेजों में बसंत पंचमी पर निबंध पढ़ाया जाता है इसीलिए अगर आप बसंत पंचमी की विशेज के बारे में कविताये जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी
छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमन्ग छाई हर मन मे
लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँदेखो नभ मे उडते पतन्ग
भरते नीलगगन मे रन्ग
देखो यह बसन्त मसतानी
आ गई है ऋतुओ की रानी

Happy Basant Panchami Poem In Hindi

मिटे प्रतीक्षा के दुर्वह क्षण,
अभिवादन करता भू का मन !
दीप्त दिशाओं के वातायन,
प्रीति सांस-सा मलय समीरण,
चंचल नील, नवल भू यौवन,
फिर वसंत की आत्मा आई,
आम्र मौर में गूंथ स्वर्ण कण,
किंशुक को कर ज्वाल वसन तन !
देख चुका मन कितने पतझर,ग्रीष्म शरद, हिम पावस सुंदर,
ऋतुओं की ऋतु यह कुसुमाकर,
फिर वसंत की आत्मा आई,
विरह मिलन के खुले प्रीति व्रण,
स्वप्नों से शोभा प्ररोह मन !
सब युग सब ऋतु थीं आयोजन,
तुम आओगी वे थीं साधन,
तुम्हें भूल कटते ही कब क्षण?
फिर वसंत की आत्मा आई,देव, हुआ फिर नवल युगागम,
स्वर्ग धरा का सफल समागम !

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वसंत पंचमी पर हिंदी कविता – वसंत पंचमी पर कविता

अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।
महक उड़ी है चहके चिड़िया।
भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
सोलह सिंगार से क्यारी सजी है।
रस पीने को आ रहे हैं।
लगता है इस चमन बाग में।
फिर से चांदी उग आई है।।
अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।

सुमित्रानंदन पंत की वसंत पर कविता

वसंत पंचमी Par Kavita – वसंत पर 5 कविता

उड़-उड़कर अम्बर से।
जब धरती पर आता है।
देख के कंचन बाग को।
अब भ्रमरा मुस्काता है।
फूलों की सुगंधित।
कलियों पर जा के।
प्रेम का गीत सुनाता है।
अपने दिल की बात कहने में।
बिलकुल नहीं लजाता है।
कभी-कभी कलियों में छुपकर।
संग में सो रात बिताता है।
गेंदा गमके महक बिखेरे।
उपवन को आभास दिलाए।
बहे बयारिया मधुरम्-मधुरम्।
प्यारी कोयल गीत जो गाए।
ऐसी बेला में उत्सव होता जब।
वाग देवी भी तान लगाए।
आयो बसंत बदल गई ऋतुएं।
हंस यौवन श्रृंगार सजाए।

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Poem On Basant Panchami In Hindi For Class 2, 7

पीताम्बर ओढ़े है धरती,
यौवन छाया है हर ओर…
माँ सरस्वती पद्मासन पर,
हो रही हैं विभोर…
नील गगन में उड़ी पतंगें,
भँवरों ने भरी उन्मुक्त उड़ान…
हम भी पाएँ विद्या का वर,
हे माँ दो तुम ये वरदान…
चहूँ और है बसंत छाया,
देखो मदन की कैसी माया…
कंचन कामिनी हो रहीं विह्वल,
हैं पिया उनके परदेस गए…
नवयोवनायें हैं पीत वस्त्र में,
जैसे धरती पर फैली हो सरसों…
सुर, कला ओर ज्ञान की देवी,
बाँट रही हैं अमृत सबको…
केसर का है तिलक लगाये,
धरती अपने भाल पे…
हंस भी देखो मोती चुगता,
करता माँ की चरण वंदना…
क्यूँ न पूजें हम भी लेखनी,
करती जो सहयोग बहुत…
न कह पाते होठों से जो,
कर देती सब वो अभिव्यक्त…
और पुस्तकें भी तो होतीं,
मित्र हमारी सच्ची…
ज्ञान बढ़ाती हैं ओर हमको,
करती हैं वो प्रेरित…
पीताम्बर ओढ़े है धरती,
यौवन छाया है हर ओर…
माँ सरस्वती पद्मासन पर,
हो रही हैं विभोर…

Basant Panchami Poem In Hindi Language – India

ऐसा वर मुझे दे भगवान
ज्ञानवान बनूं गुणवान बनूं
ज्ञान दुनिया में सबको बाँटू
इतनी मैं विचारवान बनूं
धर्म की नैया पर बैठकर
अधर्म का परित्याग करूं
सदा सत्य के मार्ग पर चलकर
जीवन नैया पार करूं
दुखियों के दुख को दूर करूं
बेसहारे का मैं सहारा बनूं
गलत मार्ग पर चलने वाले को
सही राह दिखला सकूं
इतना काबिल बनू नाथ मैं
खुशियाँ जग में बांट सकूं
अंधेरा मिटाऊं जग का मैं
जग में प्रकाश फैला सकूं
लालसा नहीं धन दौलत की
ना ही मैं पूजी जाऊं
प्रेम का उपवन लाऊं जग में
कभी ना भाग्य पर इतराऊ
रहूँ आपकी भक्ति में
सदा आप का गान करूं
भक्ति मार्ग पर चलकर मैं
सदा आपका ध्यान करूं
दिल की यही तमन्ना मेरी
सुन ले तू मेरे भगवान
ज्ञानवान बनूं गुणवान बनूं
ऐसा वर मुझे दे भगवान।।

सुमित्रानंदन पंत की वसंत पर कविता

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Aaya Basant Poem in Hindi – Short Poem On Basant Panchami In Hindi

आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
खेल रही गौरैया सरसों की बाल से
मधुमाती गन्ध उठी अमवा की डाल से
अमृतरस घोल रही झुरमुट से बोल रही
बोल रही कोयलिया
आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
नया-नया रंग लिए आ गया मधुमास है
आंखों से दूर है जो वह दिल के पास है
फिर से जमुना तट पर कुंज में पनघट पर
खेल रहा छलिया आ गया बसंत है छा गया बसंत है
मस्ती का रंग भरा मौज भरा मौसम है
फूलों की दुनिया है गीतों का आलम है
आंखों में प्यार भरे स्नेहिल उदगार लिए
राधा की मचल रही पायलिया
आ गया बसन्त है छा गया बसंन्त है

Basant Panchami Par Hindi Kavita – Basant Panchami Par Kavita In Hindi

सर्दी को दे दो विदाई ,
बसंत की है ऋतु आई….
हवा सौरभ लेकर आई,
फूलों ने जिसे लुटाई…..
बागों में बहार है,
भौंरों की गुंजार है…..
तितली की भरमार है,
बुलबुल की पुकार है…..
देखो तो सारी ओर,
कैसे सुन्दर नाचे मोर,
कोई कैसे होगा बोर,
कोयल का जब है शोर….
खेतों में गेहूं चना,
सरसों रंग हल्दी सना.
मधुमक्खी का काम बना….
हम भी ढके बदन,
बसंती पहने हैं वसन…
रंगों का सुभ मिलन,
रंग लगाता है फागन!

वसंत ऋतु मराठी कविता – वसंत ऋतु मराठी माहिती-  Marathi Poem

हिवाळ्यासाठी निरोप द्या,
वसंत ऋतू आहे
हवा सूर्यासह आली,
कोण फुले लुटले …..
गार्डन्स बाहेर,
मोठी मधमाशी
फुलपाखरू पूर्ण आहे,
बुलबुलचा कॉल आहे …..
संपूर्ण पहा,
किती सुंदर नेव्ही मोर,
कसे कोणी भोक होईल,
जेव्हा कोक हा आवाज असतो ….
शेतात गहू हरभरा,
मोहरीचा हळद नीट ढवळून घ्यावा
मधमाशी काम …
आम्ही शरीरात झाकले,
बसंत वेशॅन परिधान करत आहे …
रंग चांगला mingling,
फॅगन रंगराजन!

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