तुलसी विवाह पूजन विधि व व्रत कथा

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Tulsi Vivah Pujan Vidhi Va Vrat Katha : तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम से हुआ था इसीलिए हम उसी दिन को तुलसी विवाह के रूप में मनाते है | हिन्दू धर्म में तुलसी विवाह का बहुत महत्व है और इस दिन से ही सभी तरह के शुभ कार्य जैसे गृहप्रवेश, विवाह, व्रत, त्यौहार आदि शुरू कर दिए जाते है क्योकि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के दिन विश्राम करने के लिए अपने शयनकक्ष में चले जाते है जिसकी वजह से सभी तरह के शुभ कार्य रुक जाते है | इसीलिए हम आपको तुलसी के विवाह के दिन व्रत रखने का महत्त्व तुलसी विवाह की कथा, तुलसी विवाह कथा, Kannada Marathi pdf तथा शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी देते है जो की आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है |

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तुलसी विवाह २०१७ डेट

Tulsi Vivah 2017 Date : तुलसी विवाह की डेट हर साल कार्तिक महीने में आती है और इसी दिन भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम का विवाह तुलसी माता से हुआ था | हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह किया जाता है | इस साल यानि साल 2017 में तुलसी जी का विवाह 1 नवंबर को शुभ मुहूर्त में किया जायेगा सभी हिन्दू धर्म के लोग इसी दिन तुलसी माता के लिए व्रत रख सकते है |

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Tulsi Vivah Puja Vidhi In Hindi | Shaligram Vivah

तुलसी विवाह पूजा विधि इन हिंदी : तुलसी माता के पूजन वाले दिन आपको तुलसी माता के लिए व्रत भी रखना पड़ता है इसके बारे में हम आपको जानकारी देते है की किस तरह से आप व्रत रख सकते है व इस दिन पूजन कर सकते है :

  1. तुलसी विवाह वाले दिन सबसे पहले आप तुलसी माता को पौधे को गेरू से सजा ले |
  2. तत्पश्चात आप तुलसी के पौधे पर एक लाल रंग की ओढ़नी उढ़ा दे |
  3. फिर आप तुलसी माता के पौधे के चारो तरफ विवाह जैसा मंडप बना दे व तुलसी माता के ऊपर श्रंगार की सारी वस्तुएँ चढ़ा दे |
  4. उसके बाद तुलसी माता के मंत्र का जाप ॐ तुलस्यै नम: करना चाहिए |
  5. उसके बाद आप सभी देवता का नाम लेकर धूपबत्ती जलाये |
  6. उसके बाद एक नारियल लेकर तुलसी माता के पास टीके के रूप में चढ़ा दे |
  7. सबसे आखिर में आप भगवान शालिग्राम की मूर्ति हाथ में लेकर तुलसी माता के चारो तरफ सात बार परिक्रमा करे इस तरह से आपकी तुलसी विवाह की पूजा संपन्न हो जाएगी |

तुलसी विवाह पूजन विधि व व्रत कथा

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तुलसी विवाह की कथा

Tulsi Vivah Ki Katha : शास्त्रों के अनुसार जालंधर नामक एक बहुत ही भयंकर राक्षस था जिसे की युद्ध में हराना नामुमक़िन था सभी देवतागण उनसे खौफ खाते थे और वह बहुत शक्तिशाली था जिसकी वजह से उसने पूरे संसार में अत्याचार कर रखा था | और उसकी वीरता का राज उसकी धर्मपत्नी वृंदा का उसके प्रति पत्नी धर्म का पालन करना था जिस कारणवश वह पूरे विश्व में सर्वविजयी बना हुआ था | जालंधर के अत्याचार के कारणवश सभी देवता भगवान विष्णु के पास सहायता मांगने पहुंचे तब भगवान विष्णु ने उसके अत्याचारों को जानकर देवताओ की मदद करने का फैसला किया |

उसके बाद जब जालंधर युद्ध के लिए जा रहे थे तब भगवान विष्णु वृंदा के सतीत्व धर्म को भंग करने के लिए जालंधर का अवतार लेकर उनके पास पहुँच गए | उसके बाद जालंधर युद्ध में हार गया और उनकी मृत्यु हो गयी | उसके बाद उन्हें भगवान विष्णु के उस अवतार के बारे में पता चला तो उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया की आप एक पत्थर की मूर्त बन जायेंगे | उसके बाद वह अपनी पति की मृत्यु के पश्चात् उन्ही के साथ सती हो गयी | जहाँ उन्होंने अपने प्राण त्यागे वही पर तुलसी का पौधा उत्पन्न हो गया |

उसके बाद भगवान विष्णु ने वृंदा को यह वचन दिया की अगले जन्म में तुम्हारा जन्म तुलसी के रूप में होगा और तुम्हारा विवाह मेरे साथ होगा | इसी वजह से अगले जन्म में भगवान विष्णु ने शालिग्राम के रूप में जन्म लिया और कार्तिक मास की एकादशी के दिन तुलसी माता से विवाह किया |

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