कविता (हिंदी लेख)

सरदार वल्लभ भाई पटेल कविता

Sardar Vallabhbhai Patel Kavita : भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री जी व प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती के मौके पर कई लोगो ने उनके ऊपर कई कविताये कही है | सरदार जी का जन्म 31 अक्टूबर 1857 को हुआ था इसीलिए पूरे भारत देश में उन्हें लौह पुरुष या Iron Man Of India के नाम से जाना जाता है इसीलिए हम आपको पटेल जी की कविताओं के बारे में बताते है जिन कविताओं को पढ़ कर आप इनके बारे में काफी कुछ जान सकते है | तो आप नीचे बताई गयी कविताओं को पढ़ कर सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है |

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सरदार पटेल कविता

Sardar Patel Kavita : सरदार पटेल जी के ऊपर कविताये लिखी गयी है जिनके लिए आप नीचे बताई गयी जानकारी को पढ़ सकते है जिससे की आप उनके द्वारा काफी कुछ जान सकते है :

लोह पुरुष की ऐसी छवि
ना देखी, ना सोची कभी
आवाज में सिंह सी दहाड़ थी
ह्रदय में कोमलता की पुकार थी
एकता का स्वरूप जो इसने रचा
देश का मानचित्र पल भर में बदला
गरीबो का सरदार था वो
दुश्मनों के लिए लोहा था वो
आंधी की तरह बहता गया
ज्वालामुखी सा धधकता गया
बनकर गाँधी का अहिंसा का शस्त्र
महकता गया विश्व में जैसे कोई ब्रहास्त्र
इतिहास के गलियारे खोजते हैं जिसे
ऐसे सरदार पटेल अब ना मिलते पुरे विश्व में

देश भक्ति थी जिसके रग में.
सबल बने, भारत इस जग में.
एकीकरण के स्वप्न को जिसने.
यथार्थ में बदल दिया, भुजबल से.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है !!

नडियाद के वीर, भारतरत्न.
बारडोली सत्याग्रह के सरदार.
जिसके समक्ष हरा निज़ाम.
जिसके समक्ष हरा निज़ाम.
आताताइयों का झूठा स्वाभिमान.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है !!

कर्मवीर, धर्मवीर, कूटनीति.
निर्भीक,सरल, सहेज वेशभूषा.
दूरदर्शिता, मानवता के हिमायती.
अहिंसा,क्रांति, आज़ादी के सेनानी.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है !!

सरदार पटेल कविता

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सरदार पटेल के प्रेरक प्रसंग

Sardar Patel Ke Prerak Prasang : सरदार पटेल जी के कुछ प्रेरक प्रसंग को जानने के लिए आप नीचे बताई गयी जानकारी को पढ़े और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कर सकते है :

हर वर्ष, राष्ट्रीय त्योहारों के अवसर पर,
दूरदर्शन आकाशवाणी से,
प्रथम प्रधान मंत्री नेहरू का,
गुणगान सुन –
मैं भी चाहता हूं,
उनकी जयकार करूं,
राष्ट्र पर उनके उपकार,
मैं भी स्वीकार करूं।
लेकिन याद आता है तत्क्षण,
मां का विभाजन,
तिब्बत समर्पण,
चीनी अपमान,
कश्मीर का तर्पण –
भृकुटि तन जाती है,
मुट्ठी भिंच जाती है।
विद्यालय के भोले बच्चे,
हाथों में कागज का तिरंगा ले,
डोल रहे,
इन्दिरा गांधी की जय बोल रहे।
मैं फिर चाहता हूं,
उस पाक मान मर्दिनी का
स्मरण कर,
प्रशस्ति गान गाऊं।
पर तभी याद आता है –
पिचहत्तर का आपात्‌काल,
स्वतंत्र भारत में
फिर हुआ था एक बार,
परतंत्रता का भान।
याद कर तानाशाही,
जीभ तालू से चिपक जाती है,
सांस जहां कि तहां रुक जाती है।
युवा शक्ति की जयघोष के साथ,
नारे लग रहे –
राहुल नेतृत्व लो,
सोनिया जी ज़िन्दाबाद;
राजीव जी अमर रहें।
चाहता हूं,
अपने हम उम्र पूर्व प्रधान मंत्री को,
स्मरण कर गौरवान्वित हो जाऊं,
भीड़ में, मैं भी खो जाऊं।
तभी तिरंगे की सलामी में
सुनाई पड़ती है गर्जना,
बोफोर्स के तोप की,
चर्चा २-जी घोटाले की।
चाल रुक जाती है,
गर्दन झुक जाती है।
आकाशवाणी, दूरदर्शन,
सिग्नल को सीले हैं,
पता नहीं –
किस-किस से मिले हैं।
दो स्कूली बच्चे चर्चा में मगन हैं,
सरदार पटेल कोई नेता थे,
या कि अभिनेता थे?
मैं भी सोचता हूं –
उनका कोई एक दुर्गुण याद कर,
दृष्टि को फेर लूं,
होठों को सी लूं।
पर यह क्या?
कलियुग के योग्य,
इस छोटे प्रयास में,
लौह पुरुष की प्रतिमा,
ऊंची,
और ऊंची हुई जाती है।
आंखें आकाश में टिक जाती हैं –
पर ऊंचाई माप नहीं पाती हैं।

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