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सफला एकादशी २०१७ – व्रत कथा पूजा विधि

Saphala Ekadashi 2020 – Vrat Katha Pujan Vidhi : भारत देश में एकादशी के व्रत का बहुत महत्व है हर एकादशी व्रत से किसी न किसी प्रकार की पौराणिक कथा का उल्लेख मिलता है सफल एकादशी का भी ऐसा ही कुछ महत्व है जिसमे की भगवान नारायण की पूजा अर्चना की जाती है तथा उन्ही के लिए विधिपूर्वक व्रत रखा जाता है | इसीलिए हम आपको सफला एकादशी के बारे में जानकारी देते है की इस व्रत में किस तरह से आपको क्या करना है ? इसकी व्रत कथा क्या है ? इसके बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए आप यहाँ से जानकारी पा सकते है |

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सफला एकादशी कब है

Saphala Ekadashi Kab Hai : हिंदी पंचांग के अनुसार सफला एकादशी हर बार पौष मास के कृष्णा पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ती है | अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सफला एकादशी 2020 में 13 दिसंबर को पड़ रही है इसी दिन सफला एकादशी का व्रत रखने का प्रावधान है |

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Saphala Ekadashi Vrat Vidhi

सफल एकादशी व्रत विधि : सफल एकादशी के दिन आपको किस प्रकार से व्रत रखना है इसके बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए आप यहाँ से जानकारी पा सकते है :

  1. पद्ध पुराण के अनुसार सफ्ला एकादशी के दिन व्रत रखने वाले को सुबह उठ कर स्नान करना चाहिए |
  2. उसके बाद भगवान विष्णु का विधिवत मंत्रो के साथ जाप करना चाहिए तथा व्रत का प्रण लेना चाहिए |
  3. उसके बाद दीप, धूप, नारियल, फल, सुपारी, बिजौरा, नींबू, अनार, सुंदर आंवला, लौंग, बेर, आम से भगवान विष्णु की आराधना की जानी चाहिए |
  4. उसके बाद भगवान विष्णु को भोग लगाना चाहिए |
  5. उसके बाद ब्राह्मणो को भोजन करवा कर भगवान का प्रसाद सभी को वितरण कर देना चाहिए |
  6. इस दिन दान करने का बहुत महत्व है इसीलिए अपनी सामर्थ्यनुसार ब्राह्मणो को दान भी किया जाना चाहिए |

सफला एकादशी २०१७

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सफला एकादशी व्रत कथा

Saphala Ekadashi Vrat Katha : एक बार चम्पावती राज्य में महिष्मति नामक राजा रहते थे, जिसके चार बेटे थे। उनमे से सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक था जो की बहुत अभिमानी था और सभी प्रकार के बुरे कार्यो में सलंग्न रहता था | वह इतना बुरा था और उसने अपने जीवन में इतने पाप किये थे की वह सदैव देवता, ब्राह्माण, वैष्णव आदि की निंदा करता रहता था | उसके इसी प्रकार से बुरे कार्यो में लगे रहने के कारणवश राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया | उसके बाद वह एक पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा और उसने अपने पिता के राज्य में चोरी करने की योजना बनायीं | वह कई बार पहरेदारो के हाथो पकड़ा जाता लेकिन राजा का पुत्र मान कर उसे सब लोग छोड़ देते थे |

एक बार की बात है वह पीपल के पेड़ के नीचे अधिक शीत पड़ने के कारणवश बेहोश हो गया और दो दिन तक ऐसे ही बीमार पड़ा रहा और उसे खाने के लिए भी कुछ नहीं मिला इस तरह से वहां पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखी थी तब लुम्पक ने भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की और उन्हें स्वास्थ्य होने की कामना की | इस तरह से से उसने सफला एकादशी के व्रत का विधिपूर्वक पालन कर लिया और उसके सभी पाप नष्ट हो गए | जब इस बात का पता लुम्पक को लगा तो उसने सारे गलत काम छोड़ कर अच्छे कामो में अपना ध्यान लगाने की चेष्टा की और भगवान से प्रार्थना की वह अपने सारे गलत काम करना बंद कर देगा |

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