Ravidas Jayanti 2021: संत रविदास जी जो कि भारत में 15 वीं शताब्दी के महान कवि, समाज-सुधारक और भगवान के परम भक्तों में से एक थे I जिनेह संत रविदास जी के नाम से भी जाना जाता है I उनका जन्म भारत में यू पी राज्य के वाराणसी नमक शहर के सीर गोवर्धनपुर, में सन 1450 में हुआ था I गुरु रविदास जी ने अपने जीवनकाल में अपने द्वारा रचित रचनाओं तथा दोहों के जरिये समाज में भ्रमण करती बुराइयों (Evils) और कुरीतियों (Curiosity) को दूर किया और उन्होंने अपने दोहों के द्वारा समाज को भक्ति और उदारता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया था| आइये देखिए उनकी कुछ मशहूर कवितायेँ, दोहे, शायरी, स्टेटस, स्तिथि, मैसेज, कोट्स आदि|

Guru Ravidass ji Jayanti wishes


कह रैदास तेरी भगति दूरि है,
भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर,
पिपिलक हवै चुनि खावै।
गुरु रविदास जयंती की हार्दिक बधाइयाँ।
हैप्पी गुरु रविदास जयंती।
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साथ ही आप रविदास के दोहे भी देख सकते हैं|

Ravidas Jayanti Shayari in Hindi


हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं,
पेख्यो सोइ रैदासा।।
गुरु रविदास जयंती की हार्दिक बधाइयाँ।
हैप्पी गुरु रविदास जी जयंती।
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Guru Ravidass ji Status in Hindi


वर्णाश्रम अभिमान तजि, पद रज बंदहिजासु की।
सन्देह-ग्रन्थि खण्डन-निपन, बानि विमुल रैदास की।।
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कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव,
जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।
गुरु रविदास जयंती की हार्दिक बधाइयाँ।
हैप्पी गुरु रविदास जयंती।
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गुरू रविदास जयंती की शुभकामनाएं


जाति-जाति में जाति हैं,
जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
गुरु रविदास जयंती की हार्दिक बधाइयाँ।
हैप्पी गुरु रविदास जयंती।
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मन चंगा तोह कठौती में गंगा।
संत परंपरा के महान योगी और
परम ज्ञानी संत श्री रविदास जी को कोटि कोटि नमन।
हैप्पी गुरु रविदास जयंती।
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गुरु रविदास जयंती शायरी


Agar Ek Arya Akela Hai Toh Usse Sawayam Adhyayan Karna Chahiye.
Agar Do Ho Toh Unhe Paraspar Prashnottar Karna Chahiye
Aur Agar Ek Se Jyada Ho Toh Unhe Satsang Karna Chahiye
Aur Vedo Ke Adhyaya Padne Chahiye. Happy Guru Ravidas Jayanti!
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The regal realm with the sorrow-less name
they call it Begumpura, a place with no pain,
no taxes or cares, none owns property there,
no wrongdoing, worry, terror, or torture.
Oh, my brother, I’ve come to take it as my own,
my distant home, where everything is right…
They do this or that, they walk where they wish,
they stroll through fabled palaces unchallenged.
Oh, says Ravidas, a tanner now set free,
those who walk beside me are my friends.
– Guru Ravidas Ji
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संत रविदास जयंती शायरी


Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani
To hi Mohi Mohi Tohi Anter Kaisa
Tujhaai Sujhantaa Kachhoo Nahei
Chal Man Har Chatsal Parhaoon. !!
Happy Guru Ravidass Ji Jayanti !!
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Bhala Kisi Ka Nahi Kar Sakte
Toh Bura Kisi Na Mat Karna Phool
Jo Nahi Ban Sakte Tum Kaante Bankar Mat Rehna!
Happy Guru Ravidas Jayanti!
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गुरु रैदास जयंती शायरी


Aaj Ka Din Hai Khushiyon
Bhara Aap Ko Poore Parivaar
Sahit Guru Ravidas Jayanti Ki
Bohat Bohat Shubhkaamnaayein!
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Guru Ji Main Teri Patang
Hawa Wich Udd Di Jawangi
Guru Ji Dor Hattho Na Chhadi
Main Katti Jawaan Gi
Gur Ravidas Jayanti Di Lakh Lakh Wadhaiyaan!
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गुरु रविदास शायरी


चरन पताल सीस असमांना,
सो ठाकुर कैसैं संपटि समांना।
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चारि बेद जाकै सुमृत सासा,
भगति हेत गावै रैदासा।।
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Guru Ravidas Ji Jayanti Shayari


जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड मेँ बास।
प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रविदास।।
अर्थ :- रविदास जी कहते है की जिस रविदास को देखने से लोगो को घृणा (Disgust) आती थी, जिनका निवास नर्क कुंद के समान था। ऐसे रविदास का ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाना सच में फिर से उनकी मनुष्य के रूप में उत्पत्ति हो गयी है।
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जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
अर्थ :- इस दोहे में संत रविदास जी कहते हैं कि केले के तने को छिला जाये तो पते के निचे पता और पते के नीचे पता मिलता है और अंत में कुछ भी नहीं मिलता है। ठीक उसी प्रकार इन्सान भी जातियों (Caste) में बंट गया है। उनका कहना है कि इन जातियों ने इन्सान को बांट दिया है। अंत में इन्सान भी खत्म हो जाता है। पर जातियां खत्म नहीं होती है। संत रविदास जी कहते हैं कि जब तक जातियां (Caste) खत्म नहीं होगी तब तक इन्सान एक नहीं हो सकता है।
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Guru Raidas Shayari


कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै।
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वर्णाश्रम अभिमान तजि, पद रज बंदहिजासु की।
सन्देह-ग्रन्थि खण्डन-निपन, बानि विमुल रैदास की।।
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Guru Ravidas Status in Hindi


जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड मेँ बास।
प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रैदास।।
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गुरु मिलीया रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी।
चोट लगी निजनाम हरी की महारे हिवरे खटकी।।
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Guru Ravidas ke Dohe


जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
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रैदास कहै जाकै हृदै, रहे रैन दिन राम।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम।।
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रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।
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जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड मेँ बास।
प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रैदास।।
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रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच।
नर कूँ नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच।।
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करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस।
कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास।।
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गुरु रविदास के अनमोल वचन


कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।
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ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न।
छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।।
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कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै।।
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हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।
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हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस।
ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास।।
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गुरु मिलीया रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी।
चोट लगी निजनाम हरी की महारे हिवरे खटकी।।
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वर्णाश्रम अभिमान तजि, पद रज बंदहिजासु की।
सन्देह-ग्रन्थि खण्डन-निपन, बानि विमुल रैदास की।।
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संत रविदास शायरी 2021 – Ravidas Jayanti Shayari in Hindi – Quotes, Status, Wishes & Poetry
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