धार्मिक (आस्था)

Rishi Panchami In Hindi

ऋषि पंचमी का व्रत अपने पुराने जन्मो के पापो व जो पाप कर चुके है उससे मुक्ति पाने के लिए रखा जाता है इस व्रत को करने से इंसान से सभी पाप नष्ट हो जाते है | इस व्रत में सप्तऋषि की पूजा की जाती है और यह व्रत उन्ही के लिए रखा जाता है | यह पंचमी किसी तरह का कोई त्यौहार नहीं होता है यह केवल एक उपवास का दिन होता है जिसमे की व्यक्ति को उपवास रखना पड़ता है | हम आपको इस व्रत के बारे में जानकारी देते है की यह व्रत क्यों रखा जाता है ? या इस व्रत का क्या महत्व है ? या यह व्रत किस तरह से रखा जा सकता है इसकी पूरी जानकारी आप हमारे माध्यम से पा सकते है |

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व्रत पूजा विधि

Vrat Puja Vidhi : इस पंचमी के दिन व्रत करने के लिए आपको नीचे बताई गयी जानकारी के अनुसार ही अपने व्रत की पूजा करनी है तभी आपकी पूजा सफल हो पायेगी :

  1. सबसे पहले व्रती उपवास वाले दिन प्रातः उठ कर स्नान करे |
  2. नहाने के बाद स्वच्छ कपडे पहन कर व्रत का प्रण लिया जाता है |
  3. घर के पूजा घर में गोबर से चौक बनाया जाता है और उस पर सप्तऋषि बना कर उसकी पूजा की जाती है |
  4. उसी चौक पर कलश की स्थापना की जाती है |
  5. उसके बाद चौक पर धुप लगा कर व्रत की कथा सुनाई जाती है |
  6. अंत में रात को पूजा में प्रयोग किया गया सामान का सेवन करके व्रत तोडा जाता है |

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Rishi Panchami In Hindi

Rishi Panchami Significance

ऋषि पंचमी सिग्नीफिकेन्स : भद्रप्रदा शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी के रूप में जाना जाता है और आम तौर पर यह पंचमी हरतालिका तीज के दो दिन बाद और गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद आती है । ऋषि पंचमी एक त्यौहार नहीं है, लेकिन यह उपवास ऋषियों को श्रद्धांजलि देने के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला उपवास दिन है, जिसका अर्थ है सात ऋषि और राजस्ववाला दोशा से शुद्ध होना। इस साल यानि 2017 में यह 26 अगस्त को मनाया जायेगा | ऋषि पंचमी का हिन्दू जीवन में बहुत महत्व है इसीलिए इसका महत्व इसकी कथा में मिल जाता है आप ऋषि पंचमी की कथा को जानकर इसके महत्व को जान सकते है :

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Rishi Panchami Vrat Katha In Hindi

ऋषि पंचमी व्रत कथा इन हिंदी : इस व्रत के पीछे एक किंवदंती है ऋषि पंचमी वृत का महत्व बताती है। एक ब्राह्मण उच्चांक उनकी पत्नी सुशीला और एक विधवा पुत्री के साथ रहता था। एक रात ब्राह्मण दंपति को अपनी बेटी को पूरी तरह से कीड़े द्वारा घेरे जाने पर अचम्भा महसूस हुआ । उन्होंने एक विद्वान ऋषि से संपर्क किया ऋषि ने उन्हें बताया कि यह हालत उन पापों का परिणाम थी जो उसने अपने पिछले जन्म में की थी। उन्होंने उनसे समझाया कि वह मासिक धर्म के दिनों में रसोई में प्रवेश करती है। ऋषि ने ऋषि पंचमी के दिन कुछ अनुष्ठानों का पालन करने के लिए बेटी को सलाह दी ताकि वह इस दोष से मुक्त हो सकें। बहुत समर्पण के साथ, विधवा ने सभी अनुष्ठानों को पूरा किया व्रता ने अपना आत्मा दोष से मुक्त कर दिया।

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