Rani Padmavati History – Padmavati Story In Hindi

Padmavati Story In Hindi

रानी पद्मावती हिस्ट्री – पद्मावती स्टोरी इन हिंदी : भारत एक इतिहासकार देश है जिसका इतिहास बहुत ही ज्यादा रोचक है इसमें कई महान राजा व राजाओ का इतिहास भी हमें देखने को मिलता है | इनमे से एक रानी और भी थी जिनका नाम रानी पद्मावती था जिसे हम रानी पद्मिनी के नाम से भी जानते है यह चित्तौड़ की महारानी थी यह १३ वी १४ वी सदी की महान रानियों में से एक थी तथा यह पुरे भारत में अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी इसीलिए हम आपको रानी पद्मावती जी के इतिहास के बारे में कुछ रोचक जानकारी बताते है जिसकी मदद से आप उनके बारे में काफी कुछ जान सकते है |

यह भी देखे :1857 के स्वतंत्रता सेनानी

Padmavati Movie Story

1540 ईंसवी में मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखा गया महाकाव्य में रानी पद्मावती का जिक्र मिलता है उसके अनुसार अब बॉलीवुड में भी उनके ऊपर मूवी बनने जा रही है जिस स्टोरी के निर्देशन संजय लीला भंसाली द्वारा किया गया है जिसकी स्टोरी हम आपको बताना चाहेंगे |

यह भी देखे : कहानी राजा हरिश्चंद्र की

Padmavati Devi Story In Hindi

रानी पद्मिनी जी का जन्म सिंहला में हुआ था तथा इनके पिता का नाम गंधार्व्सेना तथा माता का नाम चम्पावती था उनके पास एक अत्यधिक तोता भी था जिसका नाम हीरामणि था | रानी पद्मावती दिखने में अत्यंत सुन्दर थी और पूरी दुनिया में उनकी खूबसूरती के चर्चे थे इसीलिए उनके पिता ने उनका स्वयंवर करने का निश्चय किया जिसके लिए दुनिया भर से बड़े-2 राजाओ व राजपूतो निमंत्रण भेजा गया |

वह निमंत्रण चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह के पास भी पहुंचा था जो की सिसौदिया राजवंश के राजा थे जिनकी पहले से करीब 13 पत्नियां थी लेकिन पद्मावती की खूबसूरती के कारणवश राजा का उनसे विवाह करने का मन हुआ इसीलिए वह भी स्वयंवर में शामिल हुए | और उस स्वयंवर में उनकी टक्कर राजा मलखान सिंह से हुई थी जिसे उन्होंने परास्त किया और स्वयंवर जीत लिया | उसके बाद वह पद्मिनी से विवाह करके अपने राज में वापिस आ गए |

वह एक पराक्रमी व साहसी योद्धा थे लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें अपनी नयी पत्नी यानि की रानी पद्मिनी से अत्यधिक प्यार हो गया जिस कारणवश उन्होंने उनसे विवाह करने के पश्चात् अन्य कोई विवाह न करने का निश्चय किया |

राघव चेतन का धोखा

उनकी सभा में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान व गुणकारी कलाकार थे जिनमे से एक संगीतकार भी था जिसका नाम राघव चेतन था वह एक बहुत अच्छा संगीतकार था और इस बात को पूरा राज्य जनता था लेकिन वह एक जादूगर भी था इस बात से सभी लोग अनजान थे लेकिन वह अपनी जादूगरी को प्रतिद्वंदियों को हारने के लिए प्रयोग करता था | एक बार वजह जादू कर रहा था तब उसे जादू करते हुए सेना ने पकड़ लिया और महाराज रावल रतन सिंह के पास ले गयी |

महाराज को यह बात बिलकुल पसंद नहीं आयी और उन्होंने उस संगीतकार को गधे पर बिठा कर पुरे राज्य में घुमाने का आदेश दिया | उसके बाद उसकी सजा पूरी होते ही राघव चेतन बदला लेने के उद्देश्य से वहां से चला गया |

Rani Padmavati History

राघव चेतन पहुचा खिलजी के पास

उसके बाद वह वहां से भाग गया और दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी के पास पहुंचा गया और उसने उन्हें रानी पद्मिनी के रूप व सौंदर्य के ऊपर अनेक बखान किये जिसकी वजह से उस दिल्ली के सुल्तान के मन में रानी पद्मावती से मिलनी की लालसा उठी |

यह भी देखे : shivaji maharaj history in hindi

अलाउद्दीन खिलजी पहुंचे राजा रावल रतन सिंह के राज्य

उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी अपने कुछ शक्तिशाली सेनानियों के साथ चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह के राज्य में मेहमान के तौर पहुंचे और वहां जाकर राजा रतन से उनकी सुन्दर पत्नी को देखने की इच्छा जाग्रत की लेकिन रानी पद्मावती ने उनकी इस बात से साफ़ इंकार कर दिया और उन्हें मुँह दिखने से मना कर दिया | उसके बाद राजा रावल रतन से पद्मिनी से निवेदन करते हुए अलाउद्दीन खिलजी की शक्ति व पराकर्म के बारे में विस्तार से बताया और कहा की वो हमारे मेहमान है अगर आप उन अंदर करती हो तो यह उनको भी अच्छा है लगेगा |

राजा के बहुत समझाने के बाद रानी उनकी बात मान गयी लेकिन उसने कहा की वह मेरा चेहरा केवल आईने में ही दिखेंगे और अलाउद्दीन खिलजी उनकी इस बात को मान जाते है | तब रानी अपने चेहरे का प्रतिबिम्ब शीशे पर दिखाती है उनका चेहरा देख कर राजा भौचक्के रह जाते है और उन्हें अपना बनाने की चाह उनके अंदर आ जाती है | उसके बाद अगले दिन वह अपने उन ताक़तवर सैनिको के बल पर राजा रावल रत्न सिंह को अगवाह कर लेते है और बदले में रानी पद्मिनी को मांगते है |

गोरा और बादल का युद्ध

उसके बाद राजा रावल रतन सिंह की सेना में गोरा और बादल नामक सेनाध्यक्ष थे जो की राजपूत चौहान थे उन्होंने राजा रतन सिंह को छुड़ाने के लिए अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध किया जिस युद्ध में गोरा की तो मृत्यु हो गयी लेकिन बादल महाराज को छुड़ाने में कामयाब हुआ और छुड़ा कर अपने महल में ले आया |

उसके बाद अलाउद्दीन क्रोधित होकर अपनी पूरी सेना व ताक़त के साथ राजा रावल रतन सिंह के किले पर आक्रमण कर देता है | लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी वह किले का मुख्य द्वार नहीं खोल पाते | उसके बाद राजा अलाउद्दीन अपनी पूरी सेना को आदेश देता है की वह पुरे किले को चारो तरफ से घेर ले जिसके बाद खुद राजा रावल रतन सिंह को उनसे युद्ध करने के लिए मज़बूर होना पड़ता है और वह अपनी सेना को मरते दम तक युद्ध करने का आदेश देते है उस महान युद्ध में राजा रतन सिंह की संपूर्ण सेना हारने लग जाती है और राजा रावल सिंह की भी मृत्यु हो जाती है |

इस बात का पता चलते ही राजा रानी पद्मावती आग में कूद कर अपनी जान दे देती है |

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*