Rabindra jayanti 2020: रवीन्द्र जयंती वह दिन है जो महान विद्वान और उपन्यासकार रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती को दर्शाता है। रईस नाथ रबींद्र नाथ टैगोर का जन्मदिन बैसाख के 25 वें दिन मनाया जाता है। कोलकाता में, इसे लोकप्रिय रूप से पोंचेशे बोइशाख कहा जाता है और पूरे पश्चिम बंगाल में औपचारिक रूप से मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार रवीन्द्र जयंती 8 या 9 मई को मनाई जाती है। इस दिन रवींद्रनाथ को याद किया जाता है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर कविता

मन में है बसा वही मधुर मुख ।
जागूँ या देखूँ मैं सपना, लगे वही अपना ।।
जीवन में भूलूँगा कभी नहीं ।
जानो या जानो न तुम ।।
मन में है बजे सदा वही मधुर बाँसुरी ।
मन में जो बसे तुम ।
बता नहीं पाऊँ ।
इन कातर नयनों में वही रखूँ सनमुख ।।

मेघ बादल में मादल बजे, गगन मेंसघन सघन वो बजे ।।
उठ रही कैसी ध्वनि गंभीर, हृदय को हिला-झुला वो बजे ।
डूब अपने में रह-रह बजे ।।
गान में कहीं प्राण में कहीं—
कहींतो गोपन थी यह व्यथा
आज श्यामल बन — छाया बीच
फैलकर कहती अपनी कथा ।
गान में रह-रह वही बजे ।।

Rabindra Jayanti Poem in Hindi

एक टुकु छोआं लागे
एक टुकु कौथा शूनि
ताई दिये मोने मोने
रोची मोमो फाल्गुनी
किछू पौलाशेर नेशा
किछू बा चाँपाये मेशा
ताईदिये शूरे शूरे
जे टूक काछे ते आशे
खनिकेर फाँके फाँके
चोकितो मोनेर कोने
जे टुकुजाये रे दूरे
भाबना काँपाये शूरे
ताई निये जाये बैला
नूपूरेरो ताल गूनी
थोड़ी सी छुअन लगी
थोड़ी सी बातें सुनी
उन ही से मन में मेरे
रची मंने फाल्गुनी
कुछ तो पलाश का नशा
कुछ चंपा के गंध मिला
उन ही से सुर पिरोये
रंग ओ’ रस जाल बुने
जो थोड़ी देर पास आते
क्षणों के बीच में से
चकित मन कोने में
स्वप्न की छवि बनाते
जो थोड़ी भी दूर जाते
भावना स्वर कँपाते
उन ही से दिन बिताये
नूपुर के ताल गिने
थोड़ी सी छुअन लगी…

Poems In Bengali

ওহ, আম্র মাঞ্জি, ও রি, আমর মঞ্জি
কি হঠাৎ হৃদয় কেন জারি ..
গন্ধে আপনার ধুলো আমার গান
দিশিস-দিশিতে গুনজ একই কি ত্রি ..
ঢাল-ঢাল উড়ে আছে পূর্ণিমা,
গন্ধে তোমার, মিলি আজ চন্দ্রমা ..
রানিং পাগল হোক দখিন ভোজন,
বিরতি হচ্ছে অর্গলা,
এদিকে গেল, উড়ে গেল,
চহুন্দিশ হু উ ফেরি ..

হিন্দিতে রবীন্দ্র জয়ন্তী কবিতা
মনের মধ্যে বুস ওয়াই মধুর মুখ।
জাগুন বা দেখি আমি স্বপ্ন, চলাচল করেই তার ..
জীবন মধ্যে ভুলুনগা কখনও না
জানো বা জানো না তুমি ..
মনের মধ্যে বুজ সাসা ওয়াই মধুর বান্সসুরি
মন যে জ্য বসসে তোমাকে
বল না
এই কাটার নায়নে ভী রাখু সানকাম ..

মেঘে মেঘে মালে বাজ, গগনে জমকালো সন্নিবেশ।
উঠছে ক্যাসি শব্দ ক্রমবর্ধমান, হৃদয় হোল-ঝুলা যে বুজে
ডুব তার মধ্যে থাকো – বজায় ..
গন মধ্যে कहीं प्राण में कहीं-
সেতু গপা
আজ শয়ামল বেন – শাড বিচ
फैलकर कहती তার कथा
গন মধ্যে থাক-হঠাৎ সে বুজে ..

Rabindranath Thakur Kobita

ओरे, ओरे भिखारी, मुझे किया है भिखारी,
और चाहो भला क्या तुम !
ओरे ओरे भिखारी, ओरे मेरे भिखारी,
गान कातर सुनाते हो क्यों ।।
रोज़ दूँगी तुम्हें धन नया ही अरे,
साध पाली थी मन में यही,
सौंप सब कुछ दिया, एक पल में ही तो
पास मेरे बचा कुछ नहीं ।।
तुमको पहनाया मैंने वसन ।
घेर आँचल से तुमको लिया ।।
आस पूरी की मैंने तुम्हारी,
अपने संसार से सब दिया ।।
मेरा मन प्राण यौवन सभी,
देखो मुट्ठी, उसी में तो है ।।
ओरे मेरे भिखारी, ओरे, ओरे भिखारी
हाय चाहो अगर और भी,
कुछ तो दो फिर मुझे और तुम ।।
लौटा जिससे सकूँ उसको
तुमको ही मैं,
ओ भिखारी ।।

Rabindranath Tagore poems in Hindi

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ओ करबी, ओ चंपा, चंचल हौठीं तेरी डालें ।
किसको है देख लिया तुमने आकाश में जानूँ ना जानूँ ना ।।
किस सुर का नशा हवा घूम रही पागल, ओ चंपा, ओ करबी ।
बजता है नुपुर ये किसका जानूँ ना ।।
क्षण क्षण में चमक चमक उठतीं तुम ।
करती हो रह रह कर ध्यान भला किसका ।।
किसके रंग हुई बेहाल फूल फूल उठती हर डाल ।
किसने है आज किया अदभुत्त ये साज जानूँ ना ।।

ओ री, आम्र मंजरी, ओ री, आम्र मंजरी
क्या हुआ उदास हृदय क्यों झरी ।।
गंध में तुम्हारी धुला मेरा गान
दिशि-दिशि में गूँज उसी की तिरी ।।
डाल-डाल उतरी है पूर्णिमा,
गंध में तुम्हारी, मिली आज चन्द्रिमा ।।
दौड़ रही पागल हो दखिन वातास,
तोड़ रही अर्गला,
इधर गई, उधर गई,
चहुँदिश है वो फिरी ।।

Rabindra Tagore Poem in Hindi – रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती कविता
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