Chaitra Navratri 2020 : हिन्दू धरम में नवरात्रों का विशेष महत्व है। हिन्दी पंचांग के अनुसार नवरात्री साल में चार बार आती है – चैत्र, आषाढ़ , आश्विन और पौष के माह में । इन नौ दिनों में देवी के नौ अवतारों की पूजा- आराधना की जाती है । इन दिनों लोग माता की भक्ति में लीन रहते है उनकी आरती और भजन करते है । अष्टमी या नवमी के दिन 9 कन्याओं को माता का रूप मानकर उनको भोजन करते है तिलक करते है और पैर छूते है । आज हम इस विषय पर निबंध लिखने जा रहे है जिसका माध्यम से आप अपने स्कूल , कालेज में होने वाले निबंध प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता , essay & speech Competition में भाग ले सकते है।

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Chaitra Navratri Essay in Hindi | Essay on Navratri

Navaratri par Nibandh : नवरात्री के इस पावन अवसर पर आपको मिलेंगे ये निबंध व लेख किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection है जिसे आप whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं जो की class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के लिए काफी आवश्यक हैं|

प्रस्तावना

हिन्दू धर्म में अनेक देवी देवताओं की पूजा की जाती है और समय – समय पर उनसे जुड़े त्यौहार पूरे देश में मनाये जाते है । आज हम बात करते है नवरात्री के प्रसिद्ध पर्व की जो पूरे देश में बाड़ी धूम धाम से मनाया जाता है । ये देवी शक्ति के विभिन्न रूपों की आराधना करने का त्यौहार है और ये संस्कृत शब्द से बना है जिसका की अर्थ होता है नौ रातें। इन नौ दिनों में माँ शक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है । इस नौ देवियों को नव दुर्गा भी कहा जाता है जो की लक्ष्मी , सरस्वती और दुर्गा माँ के ही अवतार है ।

लोग इन नौ दिनों में व्रत , उपवास रखते है और आखिरी दिन कन्या और लांगुर पूजन करके उपवास खोलते है । ये त्यौहार पूरे देश में अलग – अलग प्रकार से लोग मानते है । जगह -जगह मेले का आयोजन होता है जहाँ लोग गरबा और डांडियाँ खेलने जाते है । ये पर्व लोगों की ईश्वर में आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है ।

नवरात्री के प्रकार

चैत्र या वसंत की नौ दुर्गे : हिन्दू पंचांग के अनुसार ये वर्ष के पहले माह चैत्र में मनाया जाता है और अंग्रेजी महीनों के हिसाब से मार्च के महीने में ही इसका आगमन होता है। इस समय तक सर्दियाँ जा चुकी होती है और बसंत ऋतु का सुहाना मौसम होता है।

आषाढ़ नवरात्र : ये नव दुर्गे जून या जुलाई के महीने में आते है इनको गायत्री नवरात्रों के नाम से भी जाना जाता है।

शरद नवरात्री : हिन्दी महीने में ये आश्विन के माह में मनाया जाता है जो की अक्टूबर या नवम्बर में माना जाता है।

इसमे जगह – जगह पर देवी की मूर्ति की स्थापना की जाती है। बंगाल में इस नौ दुर्गों का विशेष महत है। 8 वे दिन को दुर्गाष्टमी का दिन बंगाल राज्य में बहुत ही धूम – धाम से मनाया जाता है । 10 वाँ दिन विजय दशमी या विजय दशहरे के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है । इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था । इस प्रकार ये दिन बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

पौष नवरात्री : जैसा की नाम से ज्ञात है ये पर्व हिन्दी पौष के महीने में और अंग्रेजी दिसंबर या जनवरी को होता है।

देवी के नौ रूप और उनका जाप मंत्र

नवरात्री माँ दुर्गा के नौ रूप

माँ दुर्गा के नव स्वरूप

1. माँ का पहला रूप “शैलपुत्री” – पहले प्रतिपदा के दिन माँ के शैल पुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है जिनकी पूजन से चंद्र दोष समाप्त होता है।

वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।
वृषारूढां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

2. द्वितीय स्वरूप “ब्रह्मचारिणी” – ब्रह्म अर्थात ‘तपस्या’ और चारिणी अर्थात ‘आचरण करने वाली’। दौज या द्वितीया तिथि को भगवती के उस रूप की भक्ति की जाती है जो देवी तप का आचरण करती है ।

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

3. तृतीया स्वरूप “चंद्रघंटा” – देवी के इस रूप के मष्तिष्क पर अर्ध चंद्र और 10 भुजाएँ होती है। इनकी पूजन से परम शांति का अनुभव होता है और परलोक में भी कल्याण होता है ।

पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

4. चतुर्थ स्वरूप “कूष्मांडा” – चौथे दिन  माँ कूष्मांडा की पूजा होती है जिनकी आठ भुजाएँ है और सिंह उनकी सवारी है ।

सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।

5. पंचम स्वरूप “स्कंदमाता” – देवी की चार भुजाये है और ये सिंह पर सवार है । सौरमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं।

सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।।

6. षष्ठी “कात्यायनी” – इनका रंग स्वर्ण के सामान है और इनकी चार भुजाये है । इनका वहाँ भी सिंह है छठे दिन ईनकी पूजा की जाती है।

चंद्रहासोज्ज्वलकरा, शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यात्, देवी दानवघातनी।।

7. सप्तम स्वरूप “कालरात्रि” – इनका वर्ण बिल्कुल काला होता है । ये असुरों की विनाशक है । इसके चार हाथ है और तीन नेत्र है।

एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी।।

8. अष्टम स्वरूप “माँ महागौरी”- इनका रंग सफेद है । साथ ही साथ वस्त्र और आभूषण भी श्वेत वर्ण के है ।

श्वेते वृषे समारूढा, श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यात्, महादेवप्रमोददाद।।

9. माँ का नौवां स्वरूप “मां सिद्धिदात्री” – ये माँ सभी प्रकार की सिद्धियों की प्रदायिनी है। ये कमल के फूल पर विराजित है और चार भुजाये है इनकी। इनका वाहन भी सिंह ही है ।

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

उपंसहार या निष्कर्ष

नवरात्री के दिनों में सभी लोग माँ की भक्ति में भाव- विभोर होकर उनकी पूजा – अर्चना करते है । लगता है की मानों देवी माँ स्वयं अपने भक्तों को आशीर्वाद देने धरती पर अवतरित हुई है । ये बहुत ही शुभ समय होता है और ऐसे में देवी की पूजा करने से सभी प्रकार की विघ्न, बाधाओं और बुरी शक्तियों का नाश होता है । दुर्गा माँ बुराईयों का नाश करने वाली और अंधकार को मिटाकर प्रकाश देने वाली है । इनकी पूजा करने से रोगों का नाश होता है और जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।

Navratri par Nibandh | Navratri Essay In Hindi & English
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