नवरात्री त्यौहार 2022: जैसा की हम जानते है की नवरात्री का त्यौहार एक धार्मिक हिन्दू त्यौहार है जिस त्यौहार में हम लगातार नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपो की वंदना करते है और माँ दुर्गा के नौ स्वरुपो के लिए व्रत रखते है और इस हर व्रत में हमको अलग अलग रंगों के वस्त्र पहन कर पूजा करनी चाहिए तो आज हम आपको बताएँगे की किस तरह के व्रत रखने चाहिए और क्या क्या कलर पहनने चाहिए और क्या है व्रत की विधियॉ | अगर आप पूजा पाठ में ज़्यादा प्राथमिकता देना चाहते हैं तो यह आर्टिकल कैसे करे शिव पूजा व देखना भी आवश्यक है |

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2022के व्रत की तारीख 

आइये जानते हैं क्या है 2020 के व्रत की तारीख हिन्दू पंचांग के हिसाब से जिससे आप जान सकते हैं क्या है कुछ महत्वपूर्ण तारीखें | ज़्यादा जानने के लिए पढ़े निचे –

चैत्र नवरात्री 2020 की तारीख

  • शैलपुत्री – इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है। (02अप्रैल 2022,)
  • ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी। (03अप्रैल 2022,)
  • चंद्रघंटा – इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली। (04अप्रैल 2022, )
  • कूष्माण्डा – इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है। (05अप्रैल 2022, )
  • स्कंदमाता – इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता। (06 अप्रैल 2022, )
  • कात्यायनी – इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि। (07 अप्रैल 2022,) 
  • कालरात्रि – इसका अर्थ- काल का नाश करने वली। (08 अप्रैल 2022,)
  • महागौरी – इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां। (09 अप्रैल 2022,)
  • सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली। (10 अप्रैल 2022,)

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नवरात्री इन हिंदी

नवरात्री व्रत की शुरूआत श्रीराम ने अपने खोयी हुई शक्ति को पाने के लिए की थी और पुराण के अनुसार स्वयं माँ भगवती ने इस शक्ति पूजा को महाशक्ति बताया था रामायण के अनुसार जब रावण ने माँ सीता का हरण कर लिया था तो उस समय श्रीराम दुखी और चिंतित थे तो उसी समय श्रीराम अपने भाई लक्ष्मन के साथ रावण को पराजित करने की योजना बना रहे थे तो देवताओ द्वारा ये देखा गया की श्रीराम बहुत ही दुखी और चिंतित है तभी वह आकाशवाणी हुई की हे प्रभु आप अन्य मनुष्यो की तरह इतने चिंतित क्यों है वो दुष्ट रावण ने माँ सीता का अपहरण कर लिया है और आप यहाँ चुपचाप बैठे हो जाओ और अपनी शक्तिओ को याद करो |

नवरात्र का पूजा का तरीका

श्रीराम ने व्रत को आरम्भ करने के लिए नारद द्वारा दिए गए निर्देशो का पालन किया वह एक उत्तम सिंघासन बनाया जिसमे की कल्याणमयी भगवती माँ जगदम्बा की मूर्ति को विराजमान किया जिस पर श्रीराम ने लगातार नौ दिनों तक माँ दुर्गा के उपवास के सभी नियमो का पालन किया और उपवास की मदद से श्रीराम ने अपनी खोयी शुई शक्तिओ को द्वारा पा लिया |

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