मदर्स डे 2020: मदर्स डे हर साल माताओं को सम्मान देने के साथ-साथ उनकी मातृत्व का सम्मान करने के लिए भी मनाया जाता है। यह प्रतिवर्ष मई के महीने में दूसरे रविवार को मनाया जाता है। माताओं को विशेष रूप से अपने बच्चे के स्कूल में जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। शिक्षक बहुत सारी गतिविधियों के साथ मातृ दिवस की तैयारी शुरू करते हैं। कुछ छात्र हिंदी या अंग्रेजी, निबंध लेखन, हिंदी या अंग्रेजी वार्तालाप, कविता, भाषण, आदि गतिविधियों की कुछ पंक्तियाँ तैयार करते हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों के स्कूल जाती हैं और उत्सव में शामिल होती हैं।

मातृ दिवस कविता – मदर डे पोएम

मां
तुम जो रंगोली दहलीज पर बनाती हो
उसके रंग मेरी उपलब्धियों में चमकते हैं
तुम जो समिधा सुबह के हवन में डालती हो
उसकी सुगंध मेरे जीवन में महकती है
तुम जो मंत्र पढ़ती हो वे सब के सब
मेरे मंदिर में गुंजते हैं
तुम जो ढेर सारी चूडियां
अपनी गोरी कलाई में पहनती हो
वे यहां मेरे सांवले हाथों में खनकती है …

मां
तुम्हारे भाल पर सजी गोल बिंदिया
मेरे कपाल पर रोज दमकती है
तुम्हारे मुख से झरी कहावतें
अनजाने ही मेरे होंठों पर थिरक उठती है
लेकिन मां
मैं तुम जैसी कभी नहीं बन सकी
तुम जैसा उजला रंग भी मैंने नहीं पाया

लेकिन तुम
मेरे विचार और संस्कार में
खामोशी से झांकती हो
क्योंकि तुमसे जुड़ी है मेरी पहचान
यह मैं जानती हूं, यह तुम जानती हो…..

Poem on Mother’s Day in Hindi

अपने आंचल की छाओं में,
छिपा लेती है हर दुःख से वोह
एक दुआ दे दे तो
काम सारे पूरे हों…

अदृश्य है भगवान,
ऐसा कहते है जो…
कहीं ना कहीं एक सत्य से,
अपरिचित होते है वोह…
खुद रोकर भी हमें
हसाती है वोह…
हर सलीका हमें
सिखलाती है वोह…

परेशानी हो चाहे जितनी भी,
हमारे लिए मुस्कुराती है वोह…
हमारी खुशियों की खातिर
दुखो को भी गले लगाती है वो…
हम निभाएं ना निभाएं
अपना हर फ़र्ज़ निभाती है वोह…
हमने देखा जो सपना
सच उसे बनती है वो…

दुःख के बादल जो छाये हमपर
तो धुप सी खिल जाती है वोह…
ज़िन्दगी की हर रेस में
हमारा होसला बढाती है वोह…
हमारी आँखों से पढ़ लेती है
तकलीफ और उसे मिटाती है वोह…
पर अपनी तकलीफ कभी नही जताती है वोह…

शायद तभी भगवान से भी ऊपर आती है वोह…
तब भी त्याग की मूरत नही माँ कहलाती है ‘वोह’….

Mother Day Poem in English

Itni dur tum kyu ho maa
Pass kyu nahi ho maa

Dur dur tak dikhe na maa
Rokar kise dikahau maa

Dard kisse chipau maa
Kaise ye batau maa

Dekh kar tum samjh khud jati
Rone kabhi na mujhe deti

Tab rone ko kona dhudhnti
Tum peeche peeche aa jati

Sath mere baithi rahti
Jab tak me phir has na deti

Mujhe hasa kar hi tum jati
Aansu ko aane na deti

Akele kone me rona tab accha lagta tha
Tumhara peeche aana tab bhata na tha

Ab soona sa har kona hai
Koi nahi yaha ab hai

Chahu jitna ro lu me ab
Hasane wala na koi hai

Bhare bhare aankho se maa
Tum shayad dikti na hogi

Yahi sochkar me toh ab
dinbhar roti rahti

Ek baar phir aa jao maa
Aasoo ab na chipaungi

Bhar bahr kar teri godh me
Jeebhar kar me roungi

Itni door tum kyu ho maa
Pass mere kyu nahi ho maa

Mother’s Day Par Kavita

mothers day poem in hindi

माँ की ममता करुणा न्यारी,
जैसे दया की चादर
शक्ति देती नित हम सबको,
बन अमृत की गागर

साया बन कर साथ निभाती,
चोट न लगने देती
पीड़ा अपने उपर ले लेती,
सदा सदा सुख देती

माँ का आँचल सब खुशियों की,
रंगा रंग फुलवारी
इसके चरणों में जन्नत है,
आनन्द की किलकारी

अदभुत माँ का रूप सलोना,
बिलकुल रब के जैसा
प्रेम के सागर सा लहराता,
इसका अपनापन ऐसा….

प्यारी प्यारी मेरी माँ
प्यारी-प्यारी मेरी माँ
सारे जाग से न्यारी माँ.

लोरी रोज सुनाती है,
थपकी दे सुलाती है.
जब उतरे आँगन में धूप,
प्यार से मुझे जगाती है.

देती चीज़ें सारी माँ,
प्यारी प्यारी मेरी माँ.

उंगली पकड़ चलाती है,
सुबह-शाम घुमाती है.
ममता भरे हुए हाथों से,
खाना रोज खिलाती है.

देवी जैसी मेरी माँ,
सारे जाग से न्यारी माँ…

मदर डे पोएम इन हिंदी

माँ भगवान का दूसरा रूप
उनके लिए दे देंगे जान

हमको मिलता जीवन उनसे
कदमो में है स्वर्ग बसा

संस्कार वह हमे बतलाती
अच्छा बुरा हमे बतलाती

हमारी गलतियों को सुधारती
प्यार वह हमपर बरसती.

तबियत अगर हो जाए खराब
रात-रात भर जागते रहना

माँ बिन जीवन है अधुरा
खाली-खाली सुना-सुना

खाना पहले हमे खिलाती
बादमे वह खुद खाती

हमारी ख़ुशी में खुश हो जाती
दुःख में हमारी आँसू बहाती

कितने खुश नसीब है हम
पास हमारे है माँ

होते बदनसीब वो कितने
जिनके पास ना होती माँ….

A Mother’s Day Poem From Daughter

बाजुओं में खींच के आजाये गी जैसे क़ाएनात
अपने बच्चे के लिए ऐसे बाहें फेलाती है माँ

ज़िन्दगी के सफ़र मै गर्दिशों की धुप में
जब कोई साया नहीं मिलता तब बहुत याद आती है माँ

प्यार कहते हैं किसे और ममता क्या चीज़ है
कोई उन बच्चों से पूछे जिनकी मर जाती है माँ

सफा-ए-हस्ती पे लिखती है असूल-ए-ज़िन्दगी
इसलिए तो मक़सद-ए-इस्लाम कहलाती है माँ

जब ज़िगर परदेस जाता है ए नूर-ए-नज़र
कुरान लेके सर पे आ जाती है माँ

लेके ज़मानत में रज़ा-ए-पाक की
पीछे पीछे सर झुकाए दूर तक जाती है माँ

काँपती आवाज़ में कहती है बेटा अलविदा
सामने जब तक रहे हाथों को लहराती है माँ

जब परेशानी में फँस जाते हैं हम परदेस में
आंसुओं को पोंछने ख्वाबों में आ जाती है माँ

मरते दम तक आ सका न बच्चा घर परदेस से
अपनी सारी दुआएं चौखट पे छोड़ जाती है माँ

बाद मरने के बेटे की खिदमत के लिए
रूप बेटी का बदल के घर में आ जाती है माँ…

Mother’s Day Poem From Son

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कोई अौर झुलाता है झूले मैं तो भी रो जाता हूँ,
मैं तो बस अपनी माँ की थपकी पाकर ही सो पाता हूँ।

कुछ ऐसा रिश्ता है मेरा मेरी माँ से
दर्द वो ले लेती है सारे और मैं बस मुस्कुराता हूँ।

यूँ तो जमाने के नजरों मैं मैं बड़ा हो गया हूँ,
पर दूर जब माँ से होता हूँ तो रो जाता हूँ।

चारदिवारी से घिरा वो कमरा बिन तेरे घर नहीं लगता माँ,
मैं हर रोज अपने ही कमरें मैं मेहमान हो जाता हूँ।

जब भी ज़माना मुझे कमजोर करने की कोशिश करता है,
याद करके तुझे माँ मजबूत बन जाता हूँ।

जब सोचता हूँ कुर्बानियां तेरी माँ
आंसुओं के समंदर में खो जाता हूँ।

मैं रात-रात भर जागता ही रहता हूँ माँ,
अब तेरे आँचल में छुप कर कहाँ सो पाता हूँ।

मदर्स डे पर कविता – Mother’s Day Poem in Hindi
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