नारी आदि शक्ति है । वह इस दुनिया की शिल्पकार है । वह एक माँ है , बहन है , बेटी है , बहु है , पत्नी है और दोस्त भी है । वह अपने जीवन के प्रत्येक रिश्ते को पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ पूरा करती है । एक मकान को घर बनाने का काम एक औरत ही करती है । आज इस लेख में हम आपको नारी शक्ति करण पर एक बहुत ही बेहतरीन निबंध देने जा रहे है । यदि आप नहीं जानते कि क्या नारी सशक्तिकरण वास्तव में हो रहा है और इसमे शिक्षा की भूमिका क्या है ? और इसका निष्कर्ष क्या होगा ? और आप समाज़ को इस विषय पर जागरूक करना चाहते है तो इस निबंध को अवश्य पढे । यह निबंध आप PDF में Download कर सकते है और इसकी मदद से आप Women Empowerment पर Short and Long Essay भी तैयार कर सकते है ।

प्रस्तावना | Introduction

पंडित नेहरू द्वारा दिया गया प्रसिद्ध नारा है ” यदि हम समाज को जागृत करना चाहते है तो महिलाओं का जागृत होना अत्यंत आवश्यक है।”सशक्ति करण का शाब्दिक अर्थ होता है मजबूत बनाना । अर्थात इसका मतलब उस योग्यता से है जब व्यक्ति अपने जीवन से जुड़े हुए फैसलों को स्वयं मजबूती के साथ ले सकते और अपने निर्णय पर अडिग खड़ा रहे । महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य भी उसी क्षमता से है जब स्त्री अपने जीवन और पारिवारिक निर्णय खुद लेने में सक्षम हो जाए । नारी शक्तिकरण एक संघर्ष जो महिलाओं को उनकी सीमा से बाहर लाकर उनके प्रति सामाजिक,  सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक भेदभाव को मिटाने के लिए लड़ा जा रहा है ।

नारी शक्ति से क्या समझते हैं?

स्त्री सृजन कर्ता के रूप में जानी जाती है। उसी से ही मानव जाति का अस्तित्व है अर्थात वही मानव जाति की जननी है । इस नारी शक्ति को ही सामाजिक, राजनैतिक , पारिवारिक स्तर पर समानता , धर्म , विश्वास , न्याय के लिए स्वतंत्रता प्रदान करना ही महिला सशक्तिकरण है । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो महिला सशक्तिकरण के द्वारा स्त्री में एक नई ऊर्जा उत्पन्न होती है जिसके प्रभाव से वह अपने वास्तविक अधिकारों का सही उपयोग कर सकती है। स्त्री के आर्थिक सशक्तिकरण का मतलब होता है की उसे अपने जीवन से जुड़े आय , संपत्ति आदि के निर्णय लेने का अधिकार हो।यह एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया है जो नारी को अपनी प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए नए अवसर प्राप्त हो सके ।

नारी सशक्तिकरण का इतिहास

हमारे प्राचीन ग्रंथों एवं पुराणो में जगह -जगह नारी की महत्वता का गुणगान देखने को मिलता है । नारी की महिमा का बखान करते हुए लिखा गया है –
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”

अर्थात जहाँ स्त्री की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते है । नारी इतिहास की बात की जाए धन की देवी लक्ष्मी , विद्या की देवी सरस्वती , माँ गंगा , दुर्गा, देवी सीता , राधा  जिनको हम पूजते है और उनके आशीर्वाद से ही खुशहाली आती है । प्राचीन काल में भी स्त्रीआँ किसी पुरुष से कम नहीं थी । रानी लक्ष्मी बाई , सरोजिनी नायडू , बेगम हज़रत महल , ज्योतिभा फुले , अरुण आसिफ अली ये वो नाम है जिन्हे हर भारतीय जानता है और जिनके साहस और योग्यता से सभी भली-भांति परिचित है ।

आधुनिक युग

समय-समय पर महिलाओं के उत्थान के लिए की समाज सुधारको ने प्रयास किया है । राजा राम मोहन राय के प्रयासों से देश को सती प्रथा जैसी कुप्रथा से छुटकारा मिल पाया और ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत की । किन्तु पिछले कुछ दशकों की तुलना में आज की नारी की स्तिथि बहुत बेहतर है । अब महिलायें किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है । वे उच्च शिक्षा प्राप्त करती है , उच्च पदों पर नौकरिया करती है । आज की नारी आत्मनिर्भर है और अपने अधिकारों के लिए जागरूक है ।

महिला सशक्तिकरण का महत्व

देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण का देश के विकास और प्रगति पर सीधा असर होता है।  जिस देश में नारी अधिक शिक्षित और कार्यशील होंगी उतनी ही उस देश की आय में बढ़ोत्तरी होगी और उस देश में नैतिक मूल्यों का विकास होगा। आज की नारी स्वतंत्र है और घर की चार दीवारी से निकल कर हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है। आज हमारे सामने ऐसी की महिलाओं के उदाहरण देखने को मिलते है जिन्होंने समाज़ और परिवार की जंजीरों को तोड़कर नारी सम्मान के लिए संघर्ष किया।

आज की महिला पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़ी है । वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी है । वह घर की रसोई से निकलकर हिमालय से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी कुशलता का परचम लहरा चुकी है ।

महिला सशक्तिकरण में बाधा

भारतीय संस्कृति बहुत प्राचीन है । जिसमे अनेक धर्म -जाति , रीति -रिवाजों , का समावेश दिखाई देता है। कभी-कभी ये परंपरायेँ स्त्री को रोक लेती है ।

  1. औरत के मार्ग में आने वाली बाधाएँ निम्नलिखित है:समाज में फैली पुरुष प्रधानता की सोच के चलते महिलाओं के समक्ष कई कठिनाइयाँ उत्पन्न होती है।
  2. पुरानी विचारधाराओं के चलते कई जगह महिलाओं को घर से बाहर निकलने की अनुमति नही मिल पाती है।
  3. रुढ़िवादी विचारधारा के कारण औरत अपने आपको पुरुषों से कम समझने लगती है और उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है ।
  4. नौकरी करने वाली महिलयों को हर जगह अच्छा वातावरण नहीं मिल पता है , उनका शोषण भी किया जाता है।
  5. भारत में एक निजी क्षेत्र में एक लड़की को एक लड़के की तुलना में कम आय का भुगतान किया जाता है ।
  6. आज भी अनेक घर ऐसे है जहाँ एक बेटी की शिक्षा को उतना महत्व नहीं दिया जाता जितना एक बेटे की शिक्षा को दिया जाता है और इसी करण लड़किया योग्य होते हुए भी शिक्षित नहीं हो पाती।
  7. नाबालिक बलिकायों की शादी हमारे समाज की बहुत खराब प्रथा है जहाँ 18 साल से पहले ही बलिकायों का विवाह कर दिया जाता है जबकि उन्मे इतनी समझ नहीं होती है ।

सरकार की भूमिका

भारत सरकार द्वारा नारी हिट के लिए की योजनाए चलाई जाती है । कन्या भ्रूण हत्या को रोकने , बालिकाओं को शिक्षित करने , उनके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से अनेक योजनाएँ लाई गई जिनमे से कुछ प्रकार है :

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ इस योजना का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोककर, बलिकायों के भविष्य को उज्ज्वल करने का था ।

उज्जवला योजना इस योजना का मुख्य उद्देश्य परिवार की महिला के नाम से एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करना था । क्युकी ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे पर या कच्चे ईधन की सहायता से भोजन पकाने पर उनको बीमारी होने की अनुपात अधिक था।

महिला हेल्पलाइन योजना इस योजना के तहत महिलाए 24 घंटे 181 पर डायल करके उनके खिलाफ किसी भी प्रकार अपराध की शिकायत करवा सकती है ।

वन स्टॉप सेंटर स्कीम  निजी या व्यक्तिगत क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ ये स्कीम काम करती है जिसका निवेश निर्भया फंड द्वारा किया जाता है ।

इसके अलावा अन्य कई योजनाएँ और अधिनियम भारत सरकार द्वारा लागू किए गए है जो नारी विकास हो गति प्रदान करेंगे ।

  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (1948)
  • हिंदू विवाह अधिनियम (1955)
  • अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम (1956)
  • दहेज निषेध अधिनियम (1961)
  • समान पारिश्रमिक अधिनियम (1976)
  • सती (रोकथाम) अधिनियम (1987)
  • घरेलू हिंसा अधिनियम (2005)

नारी सशक्तिकरण में बौद्ध धर्म की महत्ता

महात्मा गौतम बुद्ध के समय स्त्रीयों की स्तिथि अत्यंत दयनीय थी । लेकिन उन्होंने अपने अनुयायियों में महिलायो को स्थान दिया । उन्होंने अपने उपदेश में कहा – “84 लाख योनियों में से मोक्ष मिलने का परम सौभाग्य केवल मनुष्य जाति को ही प्राप्त होता है । मोक्ष केवल पुरुषों को ही नही वरन स्त्री को भी मिल सकता है ।” उन्होंने अपने संघ में भिक्षुणीयों को भी समान स्थान दिया । बौद्ध साहित्यों से ज्ञात होता है कि उस काल में स्त्रियाँ घूँघट में नहीं रहती थी । वरन वे विदुषी हुआ करती थी । बौद्ध धर्म में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया और नारी को पुरुष के समान स्थान और अधिकार दिया ।

उपसंहार | Conclusion

आज भारत की गिनती उन देशों में होती है जो तेज गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहे है । जिसके लिए आने वाले समय में महिलयों के सशक्त होने पर भी ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है । हालांकि आज समाज़ में महिला डॉक्टर, अध्यापक, राजनेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, वैज्ञानिक आदि क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर चुकी की किन्तु अभी भी सभी महिलायें पूर्ण रूप से स्वतंत्र और सुरक्षित नहीं है। देश की आधी आबादी होने के कारण देश की उन्नति और विकास महिलाओं के उन्नति और विकास पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में देश के नागरिक की सोच बदल रही है लेकिन फिर भी इस दिशा में कुछ और प्रयास करने की आवश्यकता है ।

Mahila Sashaktikaran Par Nibandh – Essay on Women Empowerment in Hindi
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