महाकवि कालिदास का जीवन परिचय – Sanskrit Poet Kalidas Biography in Hindi

महाकवि कालिदास का जीवन परिचय

भारत के इतिहास में बहुत से विद्वान कवि थे जिनकी रचनाओं की चर्चा आज के युग में भी होती हैं| इन सभी कवियों की सूची में महाकवि कालिदास का नाम प्रथम स्थान पर आता हैं| उन्हें भारत के कुछ महा विद्वान लोग राष्ट्रकवि भी बुलाते हैं| उन्हें लोग महाकवि इसलिए भी भुलाते हैं क्योकि उनकी रचनाओं ने हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव डाला हैं| उनकी रचनाए इतनी प्रचलित हैं की उनकी एक रचना अभिज्ञानशाकुंतलम् का यूरोपियन भाषा में भी अनुवाद हुआ हैं|जब भी महान कवियों की बात आती हैं तो कालिदास का नाम सबसे प्रथम स्थान पर आता हैं| आज के इस पोस्ट में हम आपको महा कवि कालिदास का जीवन परिचय in संस्कृत, कालिदास का जीवन परिचय संस्कृत भाषा में, kalidas jeevan parichay in sanskrit, kalidas jeevan parichay, kaalidas jivan परिचय, कालिदास की संस्कृत रचनाओं के बारे में बताएंगे|

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कालिदास की जीवनी – Jeevan Parichay Of Kalidasa in Hindi

किसी भी पुस्तक में इस बात की चर्चा नहीं हैं की कालीदस किस युग के थे ना ही इस बारे में जानकारी है की कालिदास के माता पिता का नाम क्या था | परन्तु उनकी एक रचना में शासक अग्निमि का ज़िक्र किया हैं और वे १७० ईसापूर्व में शासक थे इसलिए कह सकते हैं की वे १७० ईसापूर्व युग के थे| उनके जन्म स्थल के बारे में भी विवाद हैं कुछ लोग उन्हें उज्जैन का निवासी बताते हैं क्योकि वे उज्जैन से बहुत ही प्रेम करते थे|

कुछ साहित्यो में यह भी ज़िक्र हैं की उनका जन्म उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के कविल्ठा गांव में हुआ था| इसी स्थान पर कालिदास ने अपना बचपन व्यतीत किया और इसी जगह ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की | इसी जगह उन्होंने अपनी कुछ महान कविताओं की भी रचना की जिसमे मेघदूत, कुमारसंभव औऱ रघुवंश जैसी प्रसिद्ध रचाने भी शामिल हैं| कविल्ठा गांव में आज के समय में भी कालिदास की प्रतिमा बनी हैं जिसे वहा की सरकार ने बनवाया था|

Kalidas Ki Biography In Hindi

Sanskrit Poet Kalidas Biography in Hindi

कुछ शास्त्रों और कथाओ में कालिदास के रूप और रंग के बारे में पूरा वर्णन किया गया हैं| कहा जाता हैं की कालीदास का रंग गोरा था| उनके चेहरे पर तेज अलग से ही दिखाई दे जाता था| वे लेम आकृति के थे| उनके चलने के ढंग से ही पता चल जाता था की वे कोई विद्वान है| वे महान शासनकार राजा विक्रमादित्य के नव रत्नो में से एक रत्न थे| जब भी राजा कोई भी विकट परिस्थिति में फस जाते थे तो कालिदास ही उन्हें उस समस्या का समाधान देते थे| उनकी कविता सुनकर आजा बहुत ही प्रसन्न हो जाते थे|

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Kavi Kalidas History In Hindi

कालीदास की भाषा खड़ी भाषा थी| वे वेदो और शास्त्रों के बहुत बड़े विद्वान थे| रचनाओं में कहा जाता हैं की कालिदास अपने प्रारम्भिक जीवन में अनपढ़ थे| उनका विवहा विद्योत्तमा नामक एक राजकुमारी से हुआ थी| कहा जाता हैं की विद्योत्तमा ने शर्त रखी थी की अगर कोई भी विद्वान उन्हें शास्त्रात में पराजित कर देगा तो वे उनसे विवाह रचा लेगी| कालिदास ने उन्हें पराजित करके उनसे विवाह कर लिया| जब विद्योत्तमा को पता चला की वे अनपढ़ हैं तो उन्होंने कालिदास को घर से बाहर निकाल दिया और कहा की जब तक ज्ञान न प्राप्त कर लो तब तक वापस नहीं आना| यह सुनकर वे ज्ञान प्राप्त करने चले गए| वे काली माँ को बहुत मानते थे और उनके आशीर्वाद से वे ज्ञानी और धनी दोनों बन गए|

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