कवि रहीम का जीवन परिचय – Rahim Das Biography in Hindi Language

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kavi Rahim ka jeevan parichay in hindi : भारत के इतिहास में कई ऐसे महान कवी और संत थे जिनकी कविताओं और शायरियो से हमें बहुत प्रेरणा मिली हैं| उन सभी कवियों और संतो में से कवी रहीम का नाम श्रेष्ट कविओ में आता हैं| वे एक संस्कृत के महान कवि थे| वे धर्म से मुसलमान थे लेकिन हिन्दू धर्म से उनका बहुत ही प्रेम था| वे हिंदी साहित्य जगत के बेहद ही प्रसिद्ध कवियों में से एक थे| उनकी रचनाओं में उनका हिन्दू धर्म के प्रति प्रेम भावना झलकती हैं| इस पोस्ट के द्वारा हम आपको कवि रहीम का जीवन परिचय के बारे में जानकारी देंगे| जिससे आपको उनके बारे और जानने में मदद मिलेगी|

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रहीम दास का जीवन परिचय इन हिंदी

संत रहीम का पूरा नाम शेक रहीम खान-ए-खाना था| वे एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते थे| उनका जन्म १६१३ ई. में सन् १५५३ में हुआ था| उनका जन्म लाहौर में बैरम खा के घर में हुआ था| लाहौर उस समय भारत का हिस्सा था | उनका नाम हुमायु सूरी ने बैरम खां के घर जाकर रखा था| बैरम खां ने अकबर को शिक्षा दी थी और वो खान-ए-खाना की उपाधि में विराजित थे| रहीम की माँ सुल्ताना बेगम हरियाणा  से राब्ता रखती थी| सन १५६१ में गुजरात में रहीम के पिता बैरम खा की हत्या हो गई| उनकी मृत्यु  के बाद अकबर ने उनका पालन पोषण अपने धर्म पुत्र की तरह किया था|

Kavi Rahim Biography In Hindi

कवि रहीम का जीवन परिचय

रहीम की पूरी शिक्षा का बीड़ा अकबर ने उठा लिए| जैसे ही उनकी शिक्षा पूरी हुई अकबर ने उनका विवाह अपनी धाय की बेटी माहबानो से करा दिया| इसके बाद उन्हें अकबर ने अपनी सेना का सेनापति बना दिया| उन्होंने सेनापति के पद पर रह कर कई युद्धों में विजय प्राप्त की जिसकी वजह से अकबर ने उन्हें खान-ए-खाना घोषित कर दिया| वे अपने दानवीर व्यक्तित्व की वजह से भी जाने जाते थे| उन्होंने अपने जीवन काल में गरीबो के लिए बहुत दान किया हैं| वे एक कूटनीतिक विचारो वाले भी व्यक्ति थे |

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Life History Of Rahim In Hindi

Rahim Das Biography in Hindi Language

कहा जाता हैं की अकबर का शासन काल हिंदी साहित्य का स्वर्णकाल था| वे एक बुद्धिमान इंसान होने के साथ एक कवी भी थे| उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत से प्रसिद्ध रचनाओं की रचना की थी जिसमे महाभारत, रामायण, गीता और पुराण की कविताओं का वर्णन किया हैं| वे संस्कृत में कविताओं की रचना करते थे पर उन्हें अवधी और ब्रजभाषा में कविता लिखने में महारत हासिल थी| वे हिन्दू समाज के आडम्बर के बड़े आलोचक थे| बरवै, नायिका भेद, मदनाष्टक, नगर शोभा,रास पंचाध्यायी आदि उनकी महान रचनाओं में से एक हैं|वे एक बहुत बड़े कलाप्रेमी और विद्वान थे| सन १५८४ में उनकी सेहत खराब होने के चलते आकाल मृत्यु हो गई| उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले ही दिल्ली में एक मकबरा बनवाया था| वो चाहते थे की उनकी मृत्यु के बाद उन्हें उनकी धर्मपत्नी के साथ दफनाया जाए |

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