कवि गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय – Biography of Tulsidas in Hindi

कवि गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय

गोस्वामी भारत के सांस्कृतिक इतिहास अपनी रचनाओं के लिए मशहूर हैं| इस काल में बहुत से संस्कृत रचनाकारों ने अपनी कविताओं या श्लोक से हमारे जीवन को प्रभावित किया हैं परन्तु एक ऐसे भी कवी थे जिनका नाम इस सूची में सबसे श्रेष्ट पायदान पर आता हैं| तुलसीदास या फिर गोस्वामी तुलसीदास जी एक बहुत ही प्रचलित कवि थे| उनकी कविताओं की चर्चा आज भी होती हैं| ऑस्ट्रेलिया की एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी में उनकी कविताओं की किताब रखी हैं| उनकी संस्कृत की कविताए बहुत प्रसिद्ध थी| आज इस पोस्ट द्वारा हम आपको संत तुलसीदास के पद ,tulsidas jeevan parichay in hindi ,tulsidas ka jeevan parichay in hindi in short, life of goswami tulsidas in hindi अदि के बारे में जानकारी देंगे|

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Life Introduction Of Tulsidas In Hindi

संत तुलसीदास को गोस्वामी तुलदास या फिर पंडित तुलसीदास के नाम से भी जानते थे| उनका जन्म 1511 में उत्तर प्रदेश के सोरो में हुआ था जो की वर्तमान में कासगंज हैं| कुछ लोग इन्हे आदि कवी वाल्मीकि जी के अवतार भी मानते हैं जिन्होंने रामायण की रचना की थी| उनकी माता का नाम हुलसी देवी था और पिताजी का नाम आत्माराम दुबे था| कुछ विद्वान लोग यह भी कहते हैं की उनका जन्म उत्तर प्रदेश के राजापुर, चित्रकूट में हुआ था| उनका जन्म ब्राह्मण के परिवार में हुआ था| कहा जाता हैं की जन्म लेने के तुरंत बाद उन्होंने राम नाम का जाप किया जिसे सुनकर उनके माता और पिता आश्चर्य हो गए|

Biography Of Tulsidas Written In Hindi

Biography of Tulsidas in Hindi

तुलसीदास का विवाह १५८३ को २९ की उम्र में यमुना के दूसरी पार रहने वाली एक भारद्वाज परिवार की कन्या से करा दिया| उनकी पत्नी का नाम रत्नावली था| वे बहुत ही समझदार और सूंदर कन्या थी| जब तक उनका गोना नहीं हुआ तब तक तुलसी दास काशी में वेदो और पुराणों के अध्यन के लिए चले गए| एक पेहर उन्हें अपनी पत्नी की याद सताने लगी और वे अपने गुरु से आज्ञा लेकर अपनी जन्मभूमि लौट गए| वे अपनी पत्नी से मिलने रात्रि में यमुना नदी तैरकर जाते थे| एक बार उन्होंने अपनी पत्नी को उनके साथ आने को कहा| रत्नावली ने उनको इन पंगतियो के रूप में उत्तर दिया

                                    अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति !
                                    नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत ?

इन पंगतियो ने गोस्वामी तुलसीदास को कवी तुलसीदास में परिवर्तित कर दिया| जब वे अपने घर पहुंचे तो उन्हें पता चला की उनकी अनुपस्तिथि में उनके पिताजी नहीं रहे और उनका घर भी नष्ट हो गया| ये देखकर उन्हें और भी दुःख पंहुचा और वे अपने गांव में ही रहकर लोगो को भगवान् श्रीराम की कहानिया सुनाते थे|

तुलसीदास का साहित्यिक परिचय – Life History Of Tulsidas In Hindi

कवि तुलसीदास का जीवन परिचय इन हिंदी

वे भगवान् श्री राम के भक्त थे| एक बार वे एक गांव से गुजर रहे थे तभी उनकी मुलाक़ात एक प्रेत से हुई जिन्होंने उन्हें हनुमान जी का पता बताया था| जब वे हनुमान जी से मिले तब उन्होंने हनुमान जी से भगवान् रघुनात से मिलने की प्राथना की| तब उन्होंने तुलसीदास को चित्रकूट जाने को कहा| जब वे चित्रकूट गए तब उन्हें दो घोड़ो पर दो सुन्दर राजकुमार जाते हुए दिखे| वे उन्हें देखकर आकर्षित हुए परन्तु पहचान नहीं पाए | तभी वह श्री हनुमान जी ने आकर उन्हें बताया की वे दोनों राजकुमार भगवन राम और लक्ष्मण हैं|

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तुलसीदास की रचनाए

  • रामचरितमानस (1631-1633)
  • हनुमानबाहुक ( भगवान् हनुमान जी के जीवन पर)
  • संकट मोचन
  • दोहावली (दोहों की श्रखला)
  • छप्पय रामायण
  • कवित्त रामायण
  • कलिधर्माधर्म निरूपण
  • रामाज्ञा प्रश्न (ज्योतिष शास्त्रीय पद्धति का ग्रंथ)
  • पार्वती-मंगल (पूर्ण प्रमाणित)
  • हनुमान चालीसा
  • करखा रामायण
  • रोला रामायण
  • झूलना
  • वैराग्य-संदीपनी
  • बरवै रामायण
  • गीतावली (भगवान् राम पर आधारित गीत)
  • कवितावली (अधूरी रचना)
  • दोहावली (दोहों की श्रखला)
  • छप्पय रामायण
  •  संकट मोचन

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