कविता (हिंदी लेख)

इंसान की इंसानियत पर कविता हिंदी

Insan Ki Insaniyat Par kavita Hindi : हमारी इस देश में कई एक से एक महान कवि हुए है जिन्होंने अपनी रचनाओं से पूरी दुनिया में अपने नाम को फैलाया उन्होंने इस दुनिया की हर चीज़ पर कविताये लिखी | इसीलिए कुछ कवियों ने इंसान के ऊपर भी कविताये लिखी है जो की आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है और उन्हें पढ़ कर आप इंसान की इंसानियत के बारे में अधिक जानकारी पा सकते है व इन्हे पढ़ कर किसी भी सोशल वेबसाइट पर शेयर कर सकते है |

यहाँ भी देखे : बाल दिवस पर कविता | चिल्ड्रन्स डे पोएम्स इन हिंदी

इंसानियत पर एक कविता | A poem on Humanity

खुला बाजार ये कैसा
यहाँ मजहब भी है बिकता,
कि बिकता है इंसान यहाँ
और हर रब भी है बिकता ।
न जाने कैसी दुनिया है
कि अब ईमान नहीं टिकता,
मुझे हिन्दू भी दिखता है
मुझे मुस्लिम भी दिखता है,
मगर अफ़सोस कि बन्दा
खुदा का अब नहीं दिखता।
कि बिकता है इंसान यहाँ
और हर रब भी है बिकता ।
है पैसों से नाम, शोहरत
कि है औकात पैसों से,
कि जिससे होती है
इज्जत बूढ़े बुजुर्गों की
शर्म आती है मुझको की
अब वो सलाम नहीं दिखता।
कि बिकता है इंसान यहाँ
और हर रब भी है बिकता ।
हो अपनापन यहाँ जिसमें
वो रिश्ता अब नहीं दिखता
दिखते हैं लुटेरे हर तरफ
इरादे नापाक हैं जिनके
बचाने सामने आये
फरिश्ता अब नहीं दीखता
कि बिकता है इंसान यहाँ
और हर रब भी है बिकता ।
खुला बाजार ये कैसा
यहाँ मजहब भी बिकता है,
कि बिकता है इंसान यहाँ
और हर रब भी है बिकता ।

यहाँ भी देखे : कुमार विश्वास कोई दीवाना कहता है

मानवता पर छोटी कविता

रंग से ना करो प्यार, वो इक दिन ढल जाएगा
इंसानियत को दो मान, वो ही तुम्हारे काम आएगा |
धर्म अधर्म से दूर होके, इंसानियत का दिया जलाओ यारो
बुरे समय में, इन्सान ही इन्सान के काम आएगा |
आग लगाना भी अच्छा है, अगर अहंकार को लगा सको
आंसू बहाना भी अच्छा है, अगर पश्चाताप के बहा सको |

झूक जाना भी अच्छा है, अगर रिश्ता बचा सको
अपनों में अपनापन नापने से पहले, जरा खुद की भी जांच करो |
दुसरो से आस रखने से पहले, खुद की काबिलियत की तलाश करो

आस आस ही रह जाएगी, इक दिन काश हो जाएगी
कल के इंतज़ार से पहले, आज की कीमत का ख्याल करो |

इंसान की इंसानियत पर कविता हिंदी

इंसानियत पर हिन्दी कविता | Poem About Human

एक कुत्ता मेरे पास आया,
बोला तुम इंसान हो।
मैंने कहा, तुम्हें कोई शक है,
बोला शक नहीं, मुझे यकीन है।
तुम्हारे चेहरे पर इंसान का नकाब है
इंसानियत का तुम्हारे पास कोई हिसाब है।
सुबह उठते ही सारा अपने पेट में ठूंस लेते हो,
ऑफिस जाकर दूसरों से फिर घूस लेते हो,
रात को शराब पीकर नोचते हो जीवित मांस,
गला काटकर अपने भाई का,
छीन लेते हो उसकी सांस।
काली कमाई से विशाल अट्टालिकाएं बनाते हो,
भगवान को पांच रुपए का प्रसाद चढ़ाकर मूर्ख बनाते हो,
देश को चंद सिक्कों में दुश्मनों को बेच आते हो,
फिर भी गर्व से अपने को इंसान कहलवाते हो।
हम कुत्तों में न जात है, न पात है,
हमारी पूंजी हमारे जज्बात हैं,
जिसका हम नमक खाते हैं,
जान उसके लिए लड़ा जाते हैं,
उसके बाद भी हम कुत्ते कहलाते हैं।
हम चंद सिक्कों में,
अपना स्वाभिमान नहीं बेचा करते हैं,
आखिरी दम तक मालिक से वफा करते हैं।
अब तुम खुद फैसला करो,
हम कुत्ते होकर भी इंसानियत,
अपने अंदर पाले हैं,
तुम इंसान का मुखौटा लगाकर,
कुत्तापन और हैवानियत के पुतले हो।

यहाँ भी देखे : प्रकृति पर कविता हिंदी में – Hindi Poem On Nature For Class 8

इंसानी दुनिया का दस्तूर भी क्या बताऊ यारों.
यहाँ तो अमीरी से रिश्ते बनाये जाते हैं.
और गरीबी से रिश्ते छिपाये जाते है.
इस दुनिया में अब ऐसे हीं इंसानियत निभाई जाती है
दूसरों को हँसाने के लिए नहीं , रुलाने के लिए मेहनत की जाती है.
अपनी जीत के लिए नहीं , दूसरों की हार के लिए मेहनत की जाती है.
यहाँ तो लोग जुदा हैं अपने ही वजूद से.
क्योंकि यहाँ लोग अपने आप से ज्यादा दुसरो में व्यस्त रहा करते हैं.
इस दुनिया में अब इंसानियत शर्मिंदा है
यहाँ तो अपनों को छोड़ गैरों से रिश्ते निभाए जाते हैं.
अपनापन और प्यार कोई मायने नहीं रखता यहाँ,
यहां तो बस पैसो से रूप दिखाए जाते हैं .
भावनाओं का कोई मोल नहीं है आज कल यहाँ,
यहां तो बस रूप रंग से रिश्ते बनाये जाते हैं.
यहाँ तो बस शर्तों पर रिश्ते बनाये जाते हैं.
रिश्तों का एहसास कहीं गुम सा हो गया है यहाँ.
प्यार का वजूद कहीं दफ़न सा हो गया है यहाँ.
यहाँ तो बस रिश्ते मतलब से निभाए जाते हैं.
अपनो से नहीं पैसों से रिश्तेदारी निभाई जाती है
इस दुनिया में इंसानियत अब ऐसे ही निभाई जाती है!

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top