आज की दुनिया में हर कोई किसी ना किसी पर इल्जाम लगता है । अकसर लोगों को प्यार में एक दूसरे पर इल्जाम लगाते हुए देखा जाता है। कभी – कभी एक छोटा इल्जाम भी रिश्तों में दरार पैदा कर देता है । इसलिए किसी पर भी कोई भी इल्जाम लगाने से पहले हमे सोच लेना चाहिए क्युकी इनसे व्यक्ति का दिल टूट जाता है । आज हम आपके लिए कुछ New, Latest Iljam शायरी लेकर आए है । जिन्हे आप आपने स्टैटस पर लगा सकते है  या अपने दोस्तों को भेज भी सकते है । आइए पड़ते है कुछ खास , चुनिंदा Jhute Ilzaam की शायरी । ये आप Bewafai ka Ilzaam Shayari के रूप में भी पढ़ सकते है ।

Famous Ilzam Shayari in Hindi

मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पर न जा
इश्क मासूम है इल्जाम लगाने पर न जा

चिराग जलाने का सलीका सीखो साहब
हवाओं पे इल्ज़ाम लगाने से क्या होगा

उदास वक्त, उदास जिन्दगी, उदास मौसम,
कितनी चीजो पे इल्जाम लगा है तेरे ना होने से।

सबको फिक्र है अपने आप को सही साबित करने की
जैसे जिन्दगी नहीं कोई इल्जाम है

मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पर न जा,
इश्क मासूम है इल्जाम लगाने पर न जा।

लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब
किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा

हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है,
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है,
हम हर बार चुप रह जाते है,
क्योंकि वो अपना होने का हक जता जाते है।

दुनिया को मेरी हकीकत का पता कुछ भी नहीं,
इल्जाम हजारो हैं पर खता कुछ भी नहीं।

लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब,
किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा।

ये मिलावट का दौर हैं “साहब” यहाँ,
इल्जाम लगायें जाते हैं तारिफों के लिबास में।

खुद न छुपा सके वो अपना चेहरा नकाब में,
बेवजह हमारी आँखों पे इल्ज़ाम लग गया।

Jis Ke Liye Sab Kuchh Luta Diya Humne,
Wo Kehte Hai Unko Bhula Diya Humne,
Gaye The Hum Unke Aansu Pochne,
Ilzaam De Diya Ki Unko Rula Diya Humne.

Ilzaam Shayari in Urdu

नाहक़ हम मजबूरों पर ये तोहमत है मुख़्तारी की
चाहते हैं सो आप करें हैं हम को अबस बदनाम किया

बज़्म-ए-इशरत में मलामत हम निगूँ बख़्तों के तईं
जूँ हुबाब-ए-बादा साग़र सर-निगूँ हो जाएगा

फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की,
जैसे ये जिन्दगी, जिन्दगी नही, कोई इल्जाम है।

इश्क़ की बेताबियां होशियार हों
अहल-ए-दिल पर ज़ब्त का इल्ज़ाम है

दिल के मुआमलात में नासेह शिकस्त क्या
सौ बार हुस्न पर भी ये इल्ज़ाम आ गया

मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पर न जा,
इश्क मासूम है इल्जाम लगाने पर न जा।

उदास जिन्दगी,
उदास वक्त,
उदास मौसम,
कितनी चीजो पे इल्जाम लगा है
तेरे ना होने से।

दिल पे आये हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं
लोग अब मुझको तेरे नाम से पहचानते हैं

Ilzam Mohabbat Ke Darr Se Chor Diya Sheher Apna,
Warna Yeh Choti Si Umar Pardes Ke Qabil Toh Na Thi

Kuch Bhi Ho Main Toh Ilzam Tumhe Hee Dunga,
Tum Masoom Bahut Ho Magar Tauba Tumhari Aankhen

Har Tarah Ke Ilzaam Ko She Lete Hai Zindagi Ko Yuhi Jee Lete Hai Milaa Lete Hai Jhinse Haat Dosti Ka Un Haaton Se Phir, Zeher Bhi Pee Lete Hai

Sharabi Ilzaam Sharaab Ko Deta Hai Ashiq Bhi Ilzaam Shabaab Ko Deta Hai Koi Nahi Karta, Kabool Apni Bhool Kantaa Bhi Ilzaam Gulaab Ko Deta Hai

Ilzaam Shayari Imagesहिन्दी इल्जाम शायरी 1

अधूरी हसरतो का आज भी इल्ज़ाम है तुम पर,
अगर तुम चाहते तो यह मोहब्बत खत्म न होती।हिन्दी इल्जाम शायरी 2

दियों को ख़ुद बुझा कर रख दिया है
और इल्ज़ाम अब हवा पर रख दिया हैहिन्दी इल्जाम शायरी 3

मोहब्बत तो दिल से की थी, दिमाग उसने लगा लिया
दिल तोड़ दिया मेरा उसने और इल्जाम मुझपर लगा दिया

Ilzaam Shayari 2 Line

उदास जिन्दगी, उदास वक्त, उदास मौसम
कितनी चीजो पे इल्जाम लगा है तेरे ना होने से

ये मिलावट का दौर हैं “साहब” यहाँ
इल्जाम लगायें जाते हैं तारिफों के लिबास में

तूमने ही लगा दिया इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई,
अदालत भी तेरी थी गवाह भी तू ही थी।

फिर शाम को आए तो कहा सुबह को यूं ही
रहता है सदा आप पर इल्ज़ाम हमारा

मेरी तबाही का इल्ज़ाम अब शराब पर हैं
मैं और करता भी क्या तुम पे आ रही थी बात

कोई इल्जाम रह गया हो तो वो भी दे दो
पहले भी हम बुरे थे, अब थोड़े और सही

हँस कर कबूल क्या कर ली सजाएँ मैंने,
ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया हर इलज़ाम मुझ पर मढ़ने का।

हँस कर कबूल क्या कर ली सजाएँ मैंने
ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया हर इलज़ाम मुझ पर मढ़ने का

जागने वालों की बस्ती से गुज़र जाते हैं ख़्वाब
भूल थी किसकी मगर इल्ज़ाम रातों पर लगा

दुनिया को मेरी हकीकत का पता कुछ भी नहीं,
इल्जाम हजारो हैं पर खता कुछ भी नहीं।

Galat Ilzam Shayariहिन्दी इल्जाम शायरी 4

बस यही सोच कर कोई सफाई नहीं दी हमने,
कि इल्ज़ाम झूठे ही सही पर लगाये तो तुमने हैं ।

सबको फिक्र है अपने आप को सही साबित करने की,
जैसे जिन्दगी नहीं कोई इल्जाम है

बेवजह दीवार पर इल्जाम है बंटवारे का
कई लोग एक कमरे में भी अलग रहते हैं

तूमने ही लगा दिया इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई,
अदालत भी तेरी थी गवाह भी तू ही थी।

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ,
प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ,
दिल में दर्द नहीं, उसकी यादें हैं,
अब यादें ही दर्द दे,
तो उसे इल्ज़ाम क्या दूँ।

बेवफा तो वो खुद थी,
पर इल्ज़ाम किसी और को देती है.
पहले नाम था मेरा उसके लबों पर,
अब वो नाम किसी और का लेती है
कभी लेती थी वादा मुझसे साथ न छोड़ने का,
अब बही वादा किसी और से लेती है।

जान कर भी वो मुझे जान न पाए,
आज तक वो मुझे पहचान न पाए,
खुद ही कर ली बेवफाई हमने,
ताकि उन पर कोई इलज़ाम न आये।

तू कहीं भी रहे, सिर तुम्हारे इल्ज़ाम तो हैं
तुम्हारे हाथों के लकीरों में मेरा नाम तो हैं

हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है
हम हर बार खामोश रह जाते है
क्योकी वो अपना होने का हक जता जाते है

मेरे दिल की मजबूरी को कोई इल्जाम ना दे
मुझे याद रख बेशक मेरा नाम ना ले
तेरा वहम है की मैंने भुला दिया तुझे
मेरी एक सांस ऐसी नही जो तेरा नाम ना ले

Best Ilzaam Shayari in hindi | इल्ज़ाम लगाने पर शायरी
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