होलिका दहन 2018 – होलिका कौन थी ? – होलिका दहन की कहानी, कथा, स्टोरी, इतिहास, समय-टाइम, शुभ मुहूर्त

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वैसे तो भारत में कई ऐसे त्यौहार हैं जिन्हे भारत वर्ष के लोग बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं| हर त्यौहार को मनाने के पीछे कुछ कारण होता हैं| होली और दिवाली ऐसे त्यौहार हैं जिन्हे हिन्दू समाज बड़ी श्रद्धा से मनाता हैं| इस साल २०१८ में होली १ मार्च को हैं और रंगो वाली होली २ मार्च को हैं| होली का त्योहार बड़े हर्षोउल्लास से मनाया जाता हैं| इसे सबसे ज्यादा उत्तरी भारत में मनाया जाता हैं|| कहा जाता हैं की इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी| आज के इस पोस्ट में हम आपको हिरण्यकश्यप की कहानी आदि के बारे में जानकारी देंगे|

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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त – होलिका दहन टाइम – समय

होलिका दहन का त्यौहार पूर्णिमा तिथि को फाल्गुन मास में मनाया जाता हैं इसी वजह से होलिका दहन को पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं| 1 मार्च 2018 को प्रातः काल सुबह 8 बजे से पूर्णिमा लग जाएगी परन्तु उसी समय भद्रा भी लग रही हैं| कुछ पंडितो का यह भी कहना हैं की भद्रा को होलिका का दहन नहीं होना चाहिए | भद्रा ख़त्म हो जाने पर दहन किया जा सकता हैं| इस साल होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त 12.08 से 12.54 को दोपहर का हैं| शाम को 7:30 पर भद्रा काल ख़त्म हो जाने पर आप होलिका दहन कर सकते हैं|

Holika Dahan In Hindi

इस साल होलिका दहन जिससे हम सब छोटी होली भी कहते हैं वो १ मार्च को हैं| हिन्दू धर्म में इस दिन का बहुत महत्व हैं| इस दिन को इसीलिए मनाया जाता हैं की इस दिन बुराई हारी थी और अच्छाई जीती थी| माना जाता हैं की इस दिन आप अपने अंदर की सारी बुराइयों को होलिका की अग्नि में जलाकर ख़त्म कर सकते हैं| कुछ लोगो का यह भी मानना हैं की इस दिन आपकी सारी इच्छा पूरी होती हैं| होलिका दहन प्रथा बहुत ही पावन प्रथा हैं और इससे लोग सच्ची श्रद्धा से मनाते हैं| यह पर्व होलिका दहन के 40 दिन पहले से ही आरम्भ हो जाता हैं| 40 दिन पहले ही लोग लकडिया और सूखा गोबर और कंडे इकठ्ठा करते हैं और उसे होलिका दहन के दिन जलाते हैं|

होलिका की कहानी – प्रहलाद की कहानी

इस त्यौहार को मनाने के पीछे भी एक कथा हैं| इस कथा का पुराणों में भी ज़िक्र हैं| कहा जाता हैं के पुराने जमाने में जब देवताओ का काल था तब पृथ्वी पर एक अत्याचारी राजा था जिसका नाम हिरण्यकश्यप था| वो बहुत ही क्रूर और अत्याचारी था| उसे अपनी ताकतों का इतना घमंड था की वे विष्णु भगवान् को देवता नहीं समझता था| कहा जाता हैं की उसे विष्णु भगवान् से और उनकी शक्तियों से घृणा थी| उनके बेटे का नाम प्रहलाद था और वे विष्णु भगवान के बहुत बड़े भक्त थे| वो पूरे दिन विष्णु के नाम का जाप करते रहते थे|

होलिका दहन 2018

होलिका दहन की कथा – होलिका दहन स्टोरी

जब हिरण्यकश्यप को यह बात का पता चली तो उसने अपने ही पुत्र को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को बुलाया| होलिका को वरदान था की अग्नि उसको कुछ नुकसान नहीं पहुंचा सकती| इसी बात का फ़ायदा उठाकर होलिका प्रहलाद को जलते हुए कुंड में लेकर बैठ गई| प्रहलाद विष्णु भगवान् के भक्त थे इसी वजह से उन्हें कुछ नहीं हुआ और होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गयी | इसी वजह से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के दिन से भी जाना जाता हैं|

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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन की पूजा-विधि

  • सबसे पहले हम आपको बताते हैं की इस पूजा में क्या सामग्री लगती हैं | इसमें सबसे पहले रोली, चावल, साबुत, हल्दी, फूल, नारियल, सूट, बताशे और छोटे छोटे गोबर की उपलों की माला लगती हैं|
  • इस पूजा में सबसे पहले आपको एक थाली लेनी होगी| उस थाल में सारी सामग्री रखकर एक चांदी के लोटे में पानी का बर्तन रखे|
    इस सब के बाद पूजा के स्थान पर जाए जहा होलिका दहन करते हैं |
  • वहां जाकर पूजा की सामग्री पर थोड़ा जल छिड़क कर ऊं पुण्डरीकाक्ष: पुनातु, मंत्र का जाप करे| इसके बाद हाथ में जल के साथ साथ फूल लेकर इस मंत्र का जाप करे |
    ऊं विष्णु: विष्णु: विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया अद्य दिवसे सौम्य नाम संवत्सरे संवत् 2073 फाल्गुन मासे शुभे शुक्लपक्षे पूर्णिमायां शुभ तिथि रविवासरे -गौत्र (अपने गौत्र का नाम लें) उत्पन्ना-(अपना नाम बोलें) मम इह जन्मनि जन्मान्तरे वा सर्वपापक्षयपूर्वक दीर्घायुविपुलधनधान्यं शत्रुपराजय मम् दैहिक दैविक भौतिक त्रिविध ताप निवृत्यर्थं सदभीष्टसिद्धयर्थे प्रह्लादनृसिंहहोली इत्यादीनां पूजनमहं करिष्यामि।
  • इसके बाद भगवान् गणेश का ध्यान करके हाथ में फूल और चावल ले| और ऊं गं गणपतये नम: आह्वानार्र्थे पंचोपचार गंधाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि मंत्र का जाप करे और भगवान् गणेश पर फूल और बताशे चढ़ाए|
  • इसके बाद माँ अम्बिका का ध्यान करे और उनके नाम का फूल और रोरी चावल अर्पित करे | उसके बाद भगवान् नृसिंह और प्रहलाद का ध्यान करे और उनके नाम के फूल अर्पित करे| इसके बाद होलिका के सामने दोनों हाथ जोड़कर सृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव:मंत्र का जाप करे|
  • इसके बाद सारी सामग्री होलिका के समीप छोड़े और होलिका पर कच्चा सूट बांधे| इसके बाद होलिका को अग्नि देकर सात बार परिक्रमा करे| परिक्रमा पूरी हो जाने पर लोटे का जल अर्पित करके हाथ जोड़े|

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