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Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi

हरतालिका तीज व्रत कथा इन हिंदी : हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है और इस व्रत को कुंवारी लड़कियों या औरतो द्वारा रखा जाता है इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा की जाती है | यह व्रत संकल्प शक्ति का प्रतीक और अखंड सौभाग्य की कामना करने वाला व्रत माना जाता है इसीलिए हम आपको हरतालिका तीज के दिन रखने वाले व्रत के बारे में जानकारी देते है की इस व्रत को रखने का क्या उद्देश्य है या इस व्रत को रखने का क्या महत्व है | हरतालिका तीज के व्रत के पीछे एक रहस्यमयी कथा भी है जो की हमारे लिए जानने योग्य है जिसकी जानकारी हम आपको अपनी इस पोस्ट के माध्यम से देते है |

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Hartalika Teej 2020 In Hindi

हरतालिका तीज 2020 इन हिंदी : हिंदी पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज हर साल शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती है और अब यानि 2020 में अंग्रेजी कैलेंडर की डेट के अनुसार हिन्दू धर्म में इसे 24 अगस्त को मानाने का प्रावधान है | यह व्रत हिन्दू औरतो के लिए बहुत फायदेमंद होता है और उन्हें के द्वारा इस व्रत को रखा जाता है |

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Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi

Hartalika Teej Vrat Vidhi

हरतालिका तीज व्रत विधि : हरतालिका तीज पर आपको व्रत किस प्रकार रखना है इस जानकारी के लिए आप नीचे बताये गए तरीके पढ़ सकते है इसी तरह आपको व्रत रखना है :

  1. यह व्रत निरजला किया जाता है यानि की पुरे दिन बिना कुछ खाये पिए इस व्रत को रखना पड़ता है |
  2. इस दिन पूजन के लिए आप भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश जी की प्रतिमा काली मिटटी से बनाये |
  3. उसके बाद पको फुलेरा बनाये तथा एक चौकी लगाए जिस पर सांतिया का चिन्ह भी बनाये और उसके ऊपर केले के पत्ते भी रखे और भगवान जी की प्रतिमा को केले के पत्ते पर रखे |
  4. उसके बाद कलश का पूजन किया जाता है और उस प्रतिमा पर जल, कुमकुम, हल्दी, चावल और पुष्प चढ़ाते है |
  5. उसके बाद माता गौरी पर श्रंगार चढ़ाया जाता है और हरतालिका की कथा पढ़ी जाती है |
  6. उसके बाद आप आरती गण प्रारम्भ करते है जिसके लिए पहले आपको भगवान गणेश जी की आरती फिर भगवान शिव जी की उसके बाद माँ गौरी की आरती उतारी जाती है |
  7. उसके बाद चौकी के चारो तरफ परिक्रमा की जाती है और व्रत रखना पड़ता है |
  8. उसके बाद सुहागन स्त्री माँ गौरी को आखरी बार सिन्दूर चढाती है और सुहाग लेती है |
  9. उसके बाद अंत में आपको प्रतिमाओं पर ककड़ी व हलवे का भोग लगाया जाता है और अंत में ककड़ी खाकर ही इस व्रत को तोडा जाता है |

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Hartalika Teej Ki Kahani

हरतालिका तीज की कहानी : माता गौरी ने सती के बाद पार्वती के रूप में हिमालय की पुत्री के रूप जन्म लिया और माता पार्वती बचपन से ही भगवन शिव को अपने पति के रूप में चाहती थी अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने बहुत प्रयास किये लेकिन उनके इस तप से भगवान विष्णु खुश हुए और उन्होंने हिमालय से पार्वती से विवाह हेतु हाथ माँगा | किन्तु पार्वती को यह अच्छा नहीं लगा क्योकि वह शिव जी की पत्नी बनना चाहती थी |

जिसके लिए पार्वती जी की सहेलियों ने उन्हें अगवा कर लिया और वहां उन्होंने कठोर तपस्या की और अपने बालों से शिव लिंग बनाया और प्रार्थना की जिसके फलस्वरूप भगवान शिव इतना प्रभावित थे कि उन्होंने देवी पार्वती से शादी करने के लिए उनका हाथ माँगा आखिरकार, देवी पार्वती भगवान शिव के साथ एकजुट हो गए थे और उनके पिता के आशीर्वाद के साथ उनके साथ विवाह हुआ था। तब से, दिन को हरतालिका तीज कहा जाता है क्योंकि देवी पार्वती की महिला मित्र को भगवान शिव से शादी करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देवी को अपहरण करना था। हरतालिका का मतलब है हरतालिका “हरित” और “आलिका” क्रमशः इसका मतलब हुआ “अपहरण” और “महिला मित्र” यानि महिला मित्रो द्वारा अपहरण |

 

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