हनुमान जयंती 2020: भगवान हनुमान का जन्म, पूरे हिंदू समुदाय द्वारा हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम के एक भक्त, भगवान हनुमान की पूजा की जाती है, जो कि भगवान के प्रति उनके असीम जुनून और समर्पण के लिए है। हिंदू भगवान हनुमान को शक्ति, ऊर्जा और अथाह भक्ति का प्रतीक मानते हैं। हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार, हनुमान जयंती हनुमान मंदिरों में जाकर उनकी पूजा करके मनाई जाती है। पूजा और प्रार्थना करने के अलावा, लोग इस अवसर पर उपवास भी करते हैं।

Hanuman Jayanti Vrat Importance | Benefits

हनुमान जयंती व्रत, जिसे हनुमान जयंती उपवास के रूप में भी जाना जाता है, चैत्र पूर्णिमा के दिन, यानी हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। महाराष्ट्र और भारत के अन्य पश्चिमी हिस्सों में, हनुमान जयंती से पहले हनुमान जयंती के दिन मनाया जाता है, उत्तर भारत में लोग वास्तविक हनुमान जयंती के दिन उपवास करते हैं। महिलाओं द्वारा प्रचलित अधिकांश हिंदू उपवासों और व्रतों के विपरीत, हनुमान जयंती व्रत ज्यादातर पुरुषों द्वारा मनाया जाता है, विशेष रूप से पहलवानों और बॉडी बिल्डरों द्वारा। त्यौहार की तैयारियाँ और व्रत सुबह जल्दी शुरू हो जाते हैं। घरों को अच्छी तरह से साफ किया जाता है और भगवान हनुमान की मूर्तियों, पिंडों या चित्रों को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद सिंदूर का लेप किया जाता है और आगे एक दीपक जलाया जाता है।

हनुमान जयंती व्रत करने से फायदे:

Hanuman Jayanti Vrat Importance

प्रार्थना का जाप किया जाता है और मिठाई और केले चढ़ाए जाते हैं। भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। एक भक्त के कैलिबर के आधार पर, चालीसा को कई बार दोहराया जाता है। हनुमान आरती का पाठ, या आरती बजरंगबली की, प्रार्थनाओं के अंत का प्रतीक है। जो लोग हनुमान जयंती पर व्रत या उपवास का चयन करते हैं, वे इसे सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखते हैं। हालांकि, जो लोग आंशिक रूप से उपवास रखते हैं, वे साबूदाना खिचड़ी खाने के कुछ अपवादों के साथ, फलों और दूध का सेवन करते हैं। शाम को पूजा-अर्चना करने या पड़ोस के हनुमान मंदिर जाकर व्रत तोड़ा जाता है। हालांकि, ऐसे भक्त हैं जो अगले दिन सुबह ही अपना उपवास समाप्त करते हैं।

hanuman jayanti 2020 date

हनुमान जयंती 8 अप्रैल 2020 (बुधवार)

हनुमान जयंती पूजा का समय

पूर्णिमा तीथी शुरू होती है = 12:01 Pm on 07/Apr/2020

पूर्णिमा तीथि समाप्त = 08:04 on 08/Apr/2020

हनुमान जयंती की कथा | Hanuman Jayanti Vrat Katha in Hindi | Story

चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान श्री हनुमान जी का जन्म दिवस होने के विषय में एक कथा प्रसिद्ध है. कहते है, कि जब अग्नि देव से मिली खीर, राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को बांट दी, तो कैकेयी के हाथ में से एक चील ने झपट्टा मारकर कुछ खीर मुंह में ले ली, और वापस उड गई. चील जब उडती-उडती देवी अंजना के आश्रम के ऊपर से उड रही तो, अंजना ऊपर देख रही थी.

अंजना का मुंह खुला होने के कारण खीर का थोडा भाग उसके मुंह में आकर गिर गया और अनायास ही वह उस खीर को खा गई. जिससे उनके गर्भ से शिवजी के अवतार हनुमान जी ने जन्म लिया. चैत्र मास की पुन्य तिथि पूर्णिमा के मंगलवार के दिन, जनेऊ धारण किये हुए हनुमान जी का जन्म हुआ था.

हनुमान जयंती के दिन श्रद्वालु जन अपने- अपने सामर्थ्य के अनुसार, सिंदुर का चोला, लाल वस्त्र, ध्वजा आदि चढाते है. केशर मिला हुआ चंदन, फूलों में कनेर आदि के पीलोए फूल, धूप, अगरबती, गाय के शुद्ध घी का दीपक, आटे को घी में सेंककर गुड मिलाये हुए, लड्डू जिन्हें कसार के लड्ड भी कहा जाता है. उनका भोग लगाया जाता है.

नारियल और पेडों का भोग भी लगाने से भगवान श्री हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते है. इसके अतिरिक्त दाख-चूरमे का प्रयोग भोग में किया जा सकता है. केला आदि फल भी चढायें, जाते है. कपूर से श्री राम भक्त की आरती की जाती है. प्रदक्षिणा करके, नमस्कार किया जाता है. भजन कीर्तन और जागरण कराने का विशेष महत्व है.

श्री हनुमान जयंती के दिन सुन्दर काण्ड, हनुमान चालीसा आदि का पाठ किया जाता है. इस तिथि में कई जगहों, पर मेला भी लगता है. जिन स्थानों पर मेला लगता है, उन स्थानों में से कुछ स्थान सालासर, मेंहदीपुर, चांदपोल स्थान प्रमुख है

हनुमान जयंती व्रत कथा 2020 | Hanuman Jayanti Vrat Katha & Puja Vidhi
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