Gudi Padwa 2020 Calendar : हिन्दू धर्म में समय – समय पर कई त्यौहार आते है और हर त्यौहार का अपना महत्व होता है। ये सभी पर्व किसी न किसी पुरानी मान्यता का प्रतीक है और लोगों की आस्था से जुड़े हुए है । इन्ही त्यौहार में से एक है गुड़ी पड़वा । इस दिन India Calendar के अनुसार नया साल शुरू होता है । इस दिन को प्रतिपदा या Ugadi उगाड़ी प्रतिपदा भी कहा जाता है । ये हिन्दू पंचांग के हिसाब से चैत्र नवरात्री के पहले दिन मनाया जाता है।

आज हम आपको इससे जुड़ी सभी जानकारी को विस्तार से बताने जा रहे है । Gudi padwa kab hai? उसकी date, puja, katha, kalnirnay 2021 की सारी सूचना आप यहाँ देख सकते है।

गुडी पाडवा 2020

गुड़ी पड़वा का पर्व खास तौर पर महाराष्ट्र(maharashtra)में और कोंकण जाति के लोगों द्वारा हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के शुरू होने की खुशी में मनाया जाता है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा (Lord Brahma) जी ने इस दिन इस सृष्टि का सृजन किया था। इस दिन लोगों घर की अच्छे से साफ- सफाई करते है फिर घर में रंगोली बनाते है और सजावट करते है । इसके साथ लोगों घर के दरवाजों पर बंदरवार भी लगाते है । बंदरवार को घर के मुख्य दरवाजे पर लगाने का मुख्य कारण है की एक तो ये बहुत ही शुभ मानी जाती है और इनके होने से किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर सकती।

गुड़ी पड़वा की तिथि व् शुभ मुहूर्त

गुड़ी पड़वा शुभ मुहूर्त

गुड़ी पड़वा का शुभ मुहूर्त 2020

हर साल ये पर्व हिन्दी कैलंडर के पहले महीने चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा (Padwa) के दिन मनाया जाता है । चैत्र का महिना सबसे पावन महीना माना जाता है । माना जाता है इस माह के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा के दिन सूर्योदय होता है उसी दिन ये पर्व मनाया जाता है । कभी – कभी ऐसा भी होता है की पड़वा के दिन सूर्योदय दो दिन भी होता है तब उनमे से पहली तिथि को गुढी पढ़वा मनाई जाती है।

गुड़ी पड़वा की तिथि और दिन (Date & Day of Gudi Padwa)

25 March 2020 दिन – बुधवार

Gudi Padwa का शुभ मुहूर्त 

तिथि के आरंभ का समय – 24 मार्च को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट तक

तिथि के अंत का समय – 25 मार्च को शाम 5 बजकर 26 मिनट तक

गुड़ी पड़वा पर्व का महत्‍व

गुड़ी पड़वा का Hindu Religion में विशेष महत्व है और इसके साथ अन्य कई तथ्य भी जुड़े हुए है जिनके बारे में हम आपको सम्पूर्ण रूप से बता रहे है:-

  • माना जाता है की इस दिन प्रभु श्री राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे।
  • इस दिन छत्रपती शिवाजी की विजय को याद किया जाता है ।
  • हिंदुओं में साढ़े तीन मुहूर्त को बहुत ही शुभ माना जाता है। ये मुहूर्त इस प्रकार है – 1) गुड़ी पड़वा 2) अक्षय तृतीया 3) दशहरा और आधा मुहूर्त होता है दिवाली के दिन का।
  • गुड़ी का अर्थ होता है विजय पताका या ध्वज । इसलिए इसे धर्म-ध्वज के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसके और भी कई नाम है जैसे की ब्रह्म ध्वज और इन्द्र ध्वज।
  • मान्यता भी ऐसी है की इस दिन से सतयुग का भी शुभारंभ हुआ था ।
  • इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी हो जाती है ।
गुड़ी पड़वा पूजा विधि

गुड़ी पड़वा की पूजन विधि

प्रतिपदा की पूजा करने की विधि देखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं का अनुसरण करे:

  • सबसे पहले प्रातः काल उठकर अपने शरीर पर बेसन का उबटन और तेल लगाये ।
  • फिर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करे।
  • जिस जगह पर गुड़ी लगानी है उस जगह को अच्छी तरह से धोकर साफ कर ले। घरों को गोबर से भी लीपा जाता है ।
  • सूर्य के उदय होने के कुछ समय के पश्चात ही इस ये pooja की जानी चाहिए ।
  • घर में सुंदर रंगोली बनाकर और फूलों से सजावट करे ।
  • फिर घर के सब लोग इकट्ठा होते है और आपस में नव संवत्सर की बधाई देते है ।
  • मीठे नीम के पत्ते को प्रसाद में खाकर पूजा की शुरुआत की जाती है। उसके साथ इमली की चटनी भी बनाई जाती है ।
  • इसके अलावा पूरन पोली, खीर, पूड़ी आदि पकवान भी बनते है ।

कथा

दक्षिण भारत में गुड़ी पड़वा बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भगवान श्री राम के समय को त्रेतायुग कहा जाता है। उस समय भारत के दक्षिणी भाग में बालि का शासन था । जब रावण माँ सीता कर हरण कर लंका ले गया तब उनको वापस लाने के लिए राम जी को रावण को हराना था । इस काम के लिए उन्हे एक विशाल सेना की आवश्यकता थी जो रावण की सेना का सामना कर सके। इस प्रकार जब चलते चलते राम और लक्ष्मण जी वह पहुंचे तो हनुमान जी के माध्यम से उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई । सुग्रीव ने उनको बताया की बालि ने किस प्रकार उसके राज्य और पत्नी को हड़प लिया है और अपने बल का गलत उपयोग कर लोगों पर अत्याचार कर रहा है । तब राम जी ने अपने बाण से बाली का वध कर दिया और प्रजा को उसके अत्याचार से मुक्त कराया। इसी दिन को हिंदुओं में गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है ।

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