Essay (Nibandh)

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर निबंध | Essay in Hindi | Pdf Download

International Youth Day: अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस विश्व युवा दिवस के साथ भ्रमित नहीं होना है। विश्व युवा दिवस की स्थापना 1986 में पोप जॉन पॉल II द्वारा की गई थी, जो युवाओं को मसीह के प्रेम को दुनिया के सामने लाने के लिए जवाब देने के लिए एक आमंत्रण के रूप में था। विश्व युवा दिवस प्रत्येक वर्ष पाम रविवार को मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस एक संयुक्त राष्ट्र समर्थित उत्सव है, जबकि विश्व युवा दिवस कैथोलिक परंपरा के भीतर स्थापित एक उत्सव है। हालांकि तकनीकी रूप से अलग-अलग समारोह, अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस और विश्व युवा दिवस दोनों दुनिया भर में युवा लोगों के मूल्य को पहचानते हैं।

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने 1985 में युवाओं के पहले अंतर्राष्ट्रीय वर्ष का जश्न मनाया। एक दशक बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुधार के लिए देखने के लिए राष्ट्रों की नीतियों और दिशानिर्देशों के लिए वर्ल्ड प्रोग्राम ऑफ एक्शन फॉर यूथ (डब्ल्यूपीईआर) को अपनाया। दुनिया के युवाओं की स्थिति। हालांकि, यह 2000 तक नहीं था कि दुनिया ने पहला अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया।

Essay on International Youth Day in Hindi

Essay in 100 words

भारत में, ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन महान भारतीय दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था। भारत सरकार ने 1984 में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में 12 जनवरी की तिथि को घोषित किया और 1985 से हर साल 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था। उनका मूल नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी एक ग्रहणी थीं।

स्वामी विवेकानंद ने पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की। 1893 में शिकागो धर्म संसद में गए और 1896 तक अमेरिका में रहे। स्वामी विवेकानंद ने 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में ‘रामकृष्ण मठ’ की स्थापना की। उन्होंने ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। स्वामी विवेकानंद एक संत व भारत के सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने कई विषयों पर अपने बहुमूल्य विचार दिये हैं। स्वामी विवेकानंद ने योग, राजयोग तथा ज्ञानयोग जैसे ग्रंथों की रचना की।

Essay in 200 words

भारत में, ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन महान भारतीय दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था। भारत सरकार ने 1984 में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में 12 जनवरी की तिथि को घोषित किया और 1985 से हर साल 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था। उनका मूल नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी एक ग्रहणी थीं।

स्वामी विवेकानंद ने पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की। 1893 में शिकागो धर्म संसद में गए और 1896 तक अमेरिका में रहे। स्वामी विवेकानंद ने 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में ‘रामकृष्ण मठ’ की स्थापना की। उन्होंने ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। स्वामी विवेकानंद एक संत व भारत के सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने कई विषयों पर अपने बहुमूल्य विचार दिये हैं। स्वामी विवेकानंद ने योग, राजयोग तथा ज्ञानयोग जैसे ग्रंथों की रचना की।

स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं देश की सबसे बड़ी दार्शनिक संपत्ति हैं। इस दार्शनिक गुरु की जन्म तिथि पर युवा दिवस घोषित करने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी में इन पवित्र आदर्शों को पैदा करना है। राष्ट्रीय युवा दिवस का दिन रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय के साथ ही उनकी शाखा केन्द्रों पर स्वामी विवेकानंद के प्रति काफी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। विभिन्न स्थानों पर इस दिन मंगल आरती, होम, ध्यान, भक्ति-गीत, धार्मिक प्रवचन और संध्या आरती आदि का आयोजन होता है। देश की लगभग सभी शिक्षण संस्थाओं में राष्ट्रीय युवा दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Essay in 300 words

हर वर्ष 12 जनवरी को भारत में पूरे उत्साह और खुशी के साथ राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया जाता है। इसे आधुनिक भारत के निर्माता स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को याद करने के लिये मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने के लिये वर्ष 1984 में भारतीय सरकार द्वारा इसे पहली बार घोषित किया गया था। तब से (1985), पूरे देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में इसे मनाने की शुरुआत हुई।12 जनवरी 2020, शुक्रवार को पूरे भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया गया।

यह सर्वज्ञात है कि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के लिये भारतीय सरकार ने घोषित किया था। स्वामी विवेकानंद का दर्शन और उनके आदर्श की ओर देश के सभी युवाओं को प्रेरित करने के लिये भारतीय सरकार द्वारा ये फैसला किया गया था। स्वामी विवेकानंद के विचारों और जीवन शैली के द्वारा युवाओं को प्रोत्साहित करने के द्वारा देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिये राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने का फैसला किया गया था।

इसे मनाने का मुख्य लक्ष्य भारत के युवाओं के बीच स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों के महत्व को फैलाना है। भारत को विकसित देश बनाने के लिये उनके बड़े प्रयासों के साथ ही युवाओं के अनन्त ऊर्जा को जागृत करने के लिये यह बहुत अच्छा तरीका है।

पौष कृष्णा सप्तमी तिथि में वर्ष 1863 में 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस हर वर्ष रामकृष्ण मिशन के केन्द्रों पर, रामकृष्ण मठ और उनकी कई शाखा केन्द्रों पर भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार मनाया जाता है।

Essay in 400 words

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अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस (अंग्रेज़ी: International Youth Day) (IYD) ’12 अगस्त’ को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। किसी भी देश का युवा उस देश के विकास का सशक्त आधार होता है, लेकिन जब यही युवा अपने सामाजिक और राजनैतिक जिम्मेदारियों को भूलकर विलासिता के कार्यों में अपना समय नष्ट करता है, तब देश बर्बादी की ओर अग्रसर होने लगता है। पहली बार सन 2000 में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन किया गया था। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का मतलब है कि सरकार युवाओं के मुद्दों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन 1985 ई. को अंतरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया।

पूरे विश्व में भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। अपने देश में 35 वर्ष की आयु तक के 65 करोड़ युवा हैं। अर्थात् हमारे देश में अथाह श्रमशक्ति उपलब्ध है। आवश्यकता है आज हमारे देश की युवा शक्ति को उचित मार्ग दर्शन देकर उन्हें देश की उन्नति में भागीदार बनाने की, उनमे अच्छे संस्कार, उचित शिक्षा एवं प्रोद्यौगिक विशेषज्ञ बनाने की, उन्हें बुरी आदतों जैसे- नशा, जुआ, हिंसा इत्यादि से बचाने की। क्योंकि चरित्र निर्माण ही देश की, समाज की, उन्नति के लिए परम आवश्यक है। दुश्चरित्र युवा न तो अपना भला कर सकता है, न समाज का और न ही अपने देश का। देश के निर्माण के लिए, देश की उन्नति के लिए, देश को विश्व के विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने के लिए युवा वर्ग को ही मेधावी, श्रमशील, देश भक्त और समाज सेवा की भावना से ओत प्रोत होना होगा।

आज के युवा वर्ग को अपने विद्यार्थी जीवन में अध्ययनशील, संयमी, चरित्र निर्माण के लिए आत्मानुशासन लाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के प्रयास करने चाहिए। जिसके लिए समय का सदुपयोग आवश्यक है। विद्यालय को मस्ती की पाठशाला समझ कर समय गंवाने वाले युवा स्वयं अपने साथ अन्याय करते हैं, जिसकी भारी कीमत जीवन भर चुकानी पड़ती है। बिना शिक्षा के कोई भी युवा अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने में अक्षम रहता है। चाहे उसके पास अपने पूर्वजों का बना बनाया, स्थापित कारोबार ही क्यों न हो। या वह किसी राजनयिक या प्रशासनिक अधिकारी की संतान ही क्यों न हो। इसी प्रकार बिना शिक्षा के जीवन में कोई भी कार्य, व्यापार, व्यवसाय उन्नति नहीं कर सकता। यदि कोई युवा अपने विद्यार्थी जीवन के समय का सदुपयोग कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है तो मनोरंजन, मस्ती और ऐश के लिए पूरे जीवन में भरपूर अवसर मिलते हैं। वर्तमान समय में युवा विद्यार्थियों को रोजगार परक शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, अर्थात् प्रोद्यौगिकी से सम्बंधित विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त करनी चाहिए। जो देश की उन्नति में योगदान देने के साथ-साथ रोजगार की असीम संभावनाएं दिलाती है।

Essay in 500 words

हर वर्ष 12 जनवरी को भारत में पूरे उत्साह और खुशी के साथ राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया जाता है। इसे आधुनिक भारत के निर्माता स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को याद करने के लिये मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने के लिये वर्ष 1984 में भारतीय सरकार द्वारा इसे पहली बार घोषित किया गया था। तब से (1985), पूरे देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में इसे मनाने की शुरुआत हुई।12 जनवरी 2020, शुक्रवार को पूरे भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया गया।

यह सर्वज्ञात है कि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के लिये भारतीय सरकार ने घोषित किया था। स्वामी विवेकानंद का दर्शन और उनके आदर्श की ओर देश के सभी युवाओं को प्रेरित करने के लिये भारतीय सरकार द्वारा ये फैसला किया गया था। स्वामी विवेकानंद के विचारों और जीवन शैली के द्वारा युवाओं को प्रोत्साहित करने के द्वारा देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिये राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने का फैसला किया गया था।

इसे मनाने का मुख्य लक्ष्य भारत के युवाओं के बीच स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों के महत्व को फैलाना है। भारत को विकसित देश बनाने के लिये उनके बड़े प्रयासों के साथ ही युवाओं के अनन्त ऊर्जा को जागृत करने के लिये यह बहुत अच्छा तरीका है।

पौष कृष्णा सप्तमी तिथि में वर्ष 1863 में 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस हर वर्ष रामकृष्ण मिशन के केन्द्रों पर, रामकृष्ण मठ और उनकी कई शाखा केन्द्रों पर भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार मनाया जाता है।

खेल, सेमिनार, निबंध-लेखन, के लिये प्रतियोगिता, प्रस्तुतिकरण, योगासन, सम्मेलन, गायन, संगीत, व्याख्यान, स्वामी विवेकानंद पर भाषण, परेड आदि के द्वारा सभी स्कूल, कॉलेज में युवाओं के द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस या स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस) मनाया जाता है। भारतीय युवाओं को प्रेरित करने के लिये विद्यार्थियों द्वारा स्वामी विवेकानंद के विचारों से संबंधित व्याख्यान और लेखन भी किया जाता है।

उनके आंतरिक आत्मा को प्रोत्साहन, युवाओं के बीच भरोसा, जीवन शैली, कला, शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये देश के बाहर के साथ ही पूरे भारत भर के कार्यक्रमों में भाग लिये लोगों के द्वारा विभिन्न प्रकार के दूसरे कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी होती है।

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