त्यौहार

दत्तात्रेय जयंती 2017 – दत्त पूजा विधि

Dattatreya Jayanti 2020 – Datta Puja vidhi : भगवान दत्तात्रेय जी सर्वशक्तिमान तीनो देवताओ त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु व महेश का एक सयुंक्त रूप है इसी दिन भगवान दत्तात्रेय की उत्पत्ति हुई थी | इसीलिए इस दिन को दत्तात्रेय जयंती के नाम से ही जाना जाता है | भगवान दत्तात्रेय जी की सबसे अधिक पूजा महाराष्ट्र राज्य में की जाती है भगवान दत्त का नाम परब्रह्ममूर्ति सदगुरु,श्री गुरु देव दत्त, गुरु दत्तात्रेय एवम दत्ता भगवान के नाम से भी जाना जाता है | इसीलिए हम आपको दत्तात्रेय जयंती के बारे में जानकारी देते है की इस दिन आपको किस प्रकार पूजन करना चाहिए ?

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Datta Jayanti Date 2020 | Datta Purnima 2020

दत्त जयंती डेट २०१७ | दत्ता पूर्णिमा २०१७ : दत्ता जयंती को दत्ता पूर्णिमा इसीलिए भी कहते है क्योकि यह दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है | यह त्यौहार हर साल मार्गशीर्ष के महीने में पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है उसी तरह इस साल 2020 में यह जयंती 3 दिसंबर के दिन मनाई जाएगी |

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Dattatreya Jayanti Puja | Dattatreya Puja Vidhi

दत्तात्रेय जयंती पूजा | दत्तात्रेय पूजा विधि : भगवान दत्तात्रेय जी की पूजा करने के लिए आप हमारे बताये द्वारा बताये गए तरीको को अपना सकते है जिससे की दत्ता जयंती पर पूजा कर पाएंगे :

  • इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा की जाती है महारास्त्र में कई लोग इस दिन व्रत भी रखते है |
  • इसके अलावा सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए |
  • भगवान दत्ता को गुरु दत्ता के देव के नाम से भी पूजा जाता है |
  • भगवान दत्तात्रेय को दीप, धुप, चन्दन, हल्दी, मिठाई, फल, फूल इत्यादि अर्पित करने चाहिए
  • इनके चरणों की भी पूजा की जाती हैं पुराणों के अनुसार माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय देव गंगा स्नान के लिए आते हैं इसलिए गंगा मैया के तट पर दत्त पादुका की पूजा की जाती हैं. यह पूजा मणिकर्णिका तट एवम बैलगाम कर्नाटका में सबसे अधिक की जाती हैं |
  • उसके बाद भगवान दत्तात्रेय की 7 बार परिक्रमा तथा उनके मंत्र का जाप करना चाहिए |

दत्तात्रेय जयंती 2020

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Datta Jayanti Information In Marathi | दत्तात्रेय जयंती व्रत कथा २०१७

दत्त जयंती इनफार्मेशन इन मराठी | Dattatreya Jayanti Vrat Katha 2020 : ऋषि अत्री और अनुसूया का बेटा दत्तात्रेय के रूप में जाना जाता था। दत्तात्रेय की मां ने त्रिमूर्ति जैसे एक पुत्र को प्राप्त करने के लिए कई तपस या तपस्या की, जिसमें तीन देवताओं अर्थात शिव, विष्णु और ब्रह्मा की शक्ति होनी चाहिए। इस वजह से तीन देवताओं की पत्नियां, अर्थात् माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, माता पार्वती बहुत ईर्ष्यापूर्ण हो गईं। त्रिमुर्ती भगवान अनसुया के सामने दिखाई दिए उनकी मां ने उन पर कुछ मंत्रों का जिक्र किया और उन्हें बच्चों को बनाया। उसने उन्हें अपने दूध के साथ खिलाया, फिर आश्रम में वापस चला गया अनुसूया के रूप में कहानी के बारे में पता था, उसने सभी बच्चों को गले लगाया और उन्हें एक बच्चा बनाया जिसमें तीन सिर और छह पैर और हथियार थे।

जब तीन देवताओं ने अपनी पत्नियों में वापस नहीं लौटा तो वे चिंतित हो गए और अनसूया के पास चले गए। सभी देवताओं ने उन्हें क्षमा करने के लिए अनुसूया से अनुरोध किया और उनके पति वापस लौटने का अनुरोध किया। उसने अपनी माफी माँगी और उन्हें अपने पति को लौटा दिया सभी ईश्वर अपने मूल रूप में प्रकट हुए और उन्हें दत्तात्रेय नाम के बेटे का आशीर्वाद दिया। तीन देवताओं के आशीर्वाद के कारण उनका जन्म हुआ, उन्हें विष्णु का अवतार माना जाता था, और उनके भाई-बहन को शिव और ब्रह्मा के अवतार के रूप में माना जाता था।

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