बसंत पंचमी पर निबंध 2018 | Basant Panchami In Hindi Essay – Saraswati Nibandh

Basant Panchami In Hindi Essay

Basant Panchami Par Nibandh | बसंत पंचमी इन हिंदी एस्से : बसंत पंचमी का दिन हिन्दू धर्म के लिए बहुत महत्व रखता है इस उत्सव को ऋतू परिवर्तन का त्यौहार भी कहा जाता है इस दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है यह दिन सभी स्कूल, कॉलेज में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है | सभी कक्षा क्लास 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 12 के बच्चो को उनके पाठ्यक्रम में बसंत पंचमी के बारे में बसंत पंचमी पर कविता, निबंध, भाषण पढ़ाये जाते है | इसीलिए हम आपको बसंत पंचमी के ऊपर एस्से बताते है जिसकी मदद से आप बसंत पंचमी के बारे में अधिक जानकरी जान सकते है |

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बसंत पंचमी के बारे में

Basant Panchami Ke Baare Me : बसंत पंचमी को ‘श्रीपंचमी’ या ‘वसंत पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है यह उत्सव पूरी दुनिया में पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है | जिसमे की बसंत पंचमी पर कविता भी बच्चो को कई स्कूल व कॉलेजों में पढाई जाती है | हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार हर साल माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह उत्सव 2018 में जनवरी माह की 22 तारीख को है | बसंत पंचमी के दिन ज्ञान, संगीत और कला की देवी माता सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है | मौसम के अनुसार यह दिन सर्दी ऋतू के जाने का प्रतिक होता है इस दिन सबहि लोग पीले वस्त्र धारण करते है |

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बसंत ऋतु पर निबंध – बसंत पंचमी पर निबंध हिंदी में

बसन्त पंचमी का उत्सव ॠतु परिवर्तन का त्यौहार है। बसन्त पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। ये पूजा भारत में हिन्दी कैलेण्डर के अनुसार माघ मास के पंचमी तिथि (पाँचवे दिन) को किया जाता है। ये पूजा हिन्दु धर्म एवं विद्यार्थीयों के लिए बहुत मायने रखती है। क्योंकि माता सरस्वती को विद्या-बुद्धि, कला और संगीत की देवी माना जाता है।
बसंत ॠतु को ॠतुओं का राजा कहा जाता है। इसके आते ही मौसम खुशनुमा हो जाता है। ठंढ़ का असर खत्म होने लगता है। इस दिन पीला रंग आकर्षण का केंद्र होता है। लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं, और पीली मिठाई बनाई जाती है। ये रंग माँ सरस्वती और सरसों की फसलों को समर्पित होता है। फल-फूल, फसलें खिल उठते हैं। पीले लहलहाते हुए सरसों के खेत से बसंतोत्सव की शोभा बढ़ जाती है। प्रकृति और समस्त जीव-जंतु में नवजीवन का संचार होता है। इस मौके पर लोग पतंगे उड़ाकर भी उत्सव का आनंन्द लेते हैं। इस मौसम में हर मौसम का आंनद लिया जा सकता है।

बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है। हिन्दु धर्म में बच्चों के शिक्षण प्रक्रिया का शुभारंभ इस दिन पहला अक्षर लिखवा कर किया जाता है। सभी विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। गली-मुहल्लो में पूजा के पंड़ाल बनाए जाते हैं। सरस्वती माता की मूर्ति स्थापित की जाती है। शिक्षक विद्यार्थी और सभी लोग श्रद्धा पूर्वक माता सरस्वती की आराधना करते हैं। पूजा में किताब-कॉपी पेन-पेंसिल पढ़ने लिखने की सारी सामाग्री को माता के चरणों में रखकर आर्शिवाद लेते हैं। और विद्या-बुद्धि की मनोकामना करते हैं। सभी उपवास रखकर पूजा से निवृत होने के पश्चात ही प्रसाद ग्रहण कर के भोजन करते हैं। लोग पूजा पंड़ालों के भ्रमण करते हुए प्रसाद लेते हैं। बच्चों में खासकर उत्साह नजर आता है। कुछ स्थानों में संध्या में बच्चे मनोरंजन के इंतजाम करते हैं। वाद-विवाद, संगीत-नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसके दूसरे दिन मूर्ति की पूजा कर उसे जल में प्रवाहित कर एक दिवसीय इस उत्सव का समापन किया जाता है।

सरस्वती पूजा में आज उत्सव का स्थान आडम्बर ने ले लिया है। लोग उच्च ध्वनि में गाने बजाया करते हैं। फिल्मी गाने लगाए जाते हैं। आईटम गानो में नृत्य किया जाता है। ध्वनि प्रदूषण होने से बीमारों और वृद्धों को परेशानी होती है। अपनी संस्कृति को नजरअंदाज कर इसे र्सिफ मनोरंजन का माध्यम बना दिया गया है।

बसंत पंचमी बहुत ही खास पर्व है। सरस्वती पूजा बहुत ही पवित्र आयोजन है। एैसे में शोर-शराबे इस त्यौहार की गरिमा खण्डित करते हैं। ये दिन सादगी और श्रद्धा से मनाना चाहिए। मनोरंजन के कई तरीके हैं। जरूरी नहीं की लाऊड स्पीकर में ऊच्ची आवाज में फिल्मी-गानो और नाच से मजे किए जाएँ। सांस्कृतिक, वाद-विवाद जैसे कार्यक्रमों से नयी पीढ़ी को शिक्षा प्राप्त होती है। सभी बड़े-बुजुर्गों सहित इसके आनंद ले पाते हैं। ये दिन शिक्षा को समर्पित होता है। इस उत्सव का मान रखना समाज और हमारी जिम्मेदारी बनती है। जिससे ये शांति और गरिमापूर्वक सम्पन्न हो सके।

बसंत पंचमी पर निबंध 2018

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Short Essay On Basant Panchami In Hindi Language

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती को विद्या की देवी भी कहा जाता है। यह पूजा माघ महीने के शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व जनवरी या फरवरी माह में आता है। सरस्वती पूजा के दिन विद्यार्थी और बहुत सारे लोग मां सरस्वती की वंदना करते हैं। बहुत सारे स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की प्रतिमा बैठाई जाती है और पूजा की जाती है। छात्र और छात्राएं सरस्वती पूजा के दिन सुबह-सुबह नहा-धोकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं और फिर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इस दिन बहुत सारे लोग सभी जगहों पर जाकर मां सरस्वती की प्रतिमा का दर्शन करते हैं। स्कूल में सरस्वती पूजा का आयोजन भव्य तरीके से किया जाता है। इसमें सभी शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और आने वाले सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण करते हैं। सरस्वती पूजा में छात्र-छात्राएं मां सरस्वती से अधिक से अधिक विद्या प्राप्त करने की विनती करते हैं।

आजकल ऐसा देखा गया है कि सरस्वती पूजा में बहुत सारी जगहों में पांडाल लगाए जाते हैं और वहां गाने बजाए जाते हैं और गानों पर बहुत सारे स्टूडेंट डांस करते हैं। इससे इस पूजा की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे गिरती जा रही है। छात्र-छात्राएं और अभिभावकों को यह चाहिए कि वह इस पूजा की पवित्रता को बनाए रखें।

सरस्वती पूजा में सरस्वती जी की प्रतिमा एक या दो दिन के लिए बैठाई जाती है और फिर पूजा के दूसरे या तीसरे दिन प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के समय बहुत सारे लोग सड़कों पर जा रही सरस्वती जी की प्रतिमा को देखते हैं और नमन करते हैं। बहुत सारे स्टूडेंट काफी हर्षोल्लास के साथ मूर्ति का विसर्जन करते हैं।

Saraswati Nibandh

Essay On Basant Panchami Festival In Hindi – Basant Panchami Long Essay In Hindi

प्रस्तावना – संसार के प्रत्येक देश में त्यौहारों की अपनी-अपनी परंपरा है भारत तो त्योहारों का धनी है। यहां प्रत्येक मास और पक्ष में कोई ना कोई त्यौहार अवश्य आ जाता है। यदि माघ में बसंत पंचमी है तो फागुन में होली चैत में रामनवमी है तो वैशाख में वैशाखी। जेष्ठ में गंगा दशहरा है तो सावन में रक्षाबंधन का उत्सव मनाया जाता है। इन सभी त्योहारों में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है ।इसे श्री पंचमी भी कहते हैं। यह पूजा पूर्वी भारत -पश्चिमोत्तर -बांग्लादेश -नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है।

समय – यह त्यौहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस समय शरद ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु का आगमन होने से मौसम बड़ा सुहावना हो जाता है. पेड़ों में नए -नए पत्ते फूल तथा खेतों में पीली सरसों बड़ी ही मन भावनी लगती है इस समय ना तो अधिक सर्दी होती है। और ना अधिक गर्मी । शीतल मंद सुगंध पवन चलने लगती है। सारे पशु -पक्षी लता -वृक्ष स्त्री -पुरुष आनंद मग्न से दिखाई पड़ते हैं। ऐसे सुहाने मौसम में बसंत पंचमी का पर्व आता है । बसंत ऋतु को ऋतुराज कहते हैं तथा गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि रितुओं में मैं बसंत हूं।

सरस्वती पूजा – बसंत पंचमी के दिन ज्ञान तथा विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा पूरी तमन्ना के साथ सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। छात्र गढ़ पूजा के कुछ दिनों पूर्व से ही साज सज्जा के कार्यों में संलग्न हो जाते हैं। पूजा के दिन छात्र-छात्राएं प्रातः कालीन तैयार होकर पूजा पंडालो अथवा पूजन स्थल पर एकत्रित हो जाते हैं। मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है. बच्चे अपनी पुस्तके भी पूजा के सम्मुख रखते हैं. तत्पश्चात विधिवत पूजन कार्य संपन्न कराया जाता है. लोग पुष्पांजलि देते हैं मौसमी फल फूल धूप दीप खीर चंदन वस्त्र तिल आदि वस्तुएं मां के चरणों में समर्पित करते हैं. इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा ज्ञान दायिनी मां सरस्वती की आराधना की जाती है यहां एक प्रार्थना प्रस्तुत है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है

महत्व – अनेक पर्व के साथ बसंत पंचमी पर्व का भी विशेष महत्व है. इस पर्व पर केवल बच्चे ही नहीं अपितु संगीत व साहित्य के महान साधक भी बड़े हर्षोल्लास के साथ आनंद दायिनी मां की पूजा में शामिल होते हैं. संगीत के साधक राग वसंत तथा बहार गाते हैं तथा अपनी संगीत व साहित्य की साधना को मां के चरणों में समर्पित करते हैं। इस पर्व पर अनेक सुंदर पूजा स्थल सजाए जाते हैं जो देखने में बड़े ही मनोहर लगते हैं इसके अतिरिक्त इस त्यौहार के आने पर हमारे जीवन में एक नवीन उत्साह आ जाता है।

उपसंहार – यद्यपि कि यह पावन पर्व है लेकिन कुछ शरारती तत्वों द्वारा पूजा के लिए आयोजन कार्यो द्वारा चंदा लेने का प्रयास किया जाता है. यह लोग चंदा वसूली के नाम पर दुकानदारों वाहन चालकों तथा आम जनता से वसूली करते हैं. ऐसे लोगों का बुनियादी शिक्षा से कोई सरोकार नहीं होता लेकिन गलत कर्मो को पूरा करने के लिए पूजा का सहारा लेते हैं. हमें ऐसे लोगों का विरोध करना चाहिए तथा पूजा की पावनता को अपवित्र होने से बचाना चाहिए.

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