इतिहास

हनुमानजी के 10 पराक्रम जानिए

Hanumanji Ke 10 Parakram Janiye : महाबली हनुमान जो की बहुत बड़े रामभक्त थे वह एक महाबली थे जिनके आगे किसी भी शक्ति का कोई असर नहीं होता था | हनुमान को उनकी शक्तियां देवताओ द्वारा मिली थी हनुमान जी ने चाहे माता अंजनी की कोख से जन्म लिया लेकिन वह पवनपुत्र कहलाते थे और वायुदेव ही उनके पिता थे | इसीलिए आज हम आपको हनुमान जी के कुछ ऐसे पराक्रमो के बारे में बताते है जो की आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते है |

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हनुमान जी का इतिहास

Hanuman Ji Ka Itihaas : भगवान हनुमान जी का व्यक्तित्व बहुत ही शक्तिशाली थे इसीलिए हम आपको हनुमान जी के इतिहास के बारे में जानकारी देते है की उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुत पराक्रम किये हम आपको उनमे से कुछ पराक्रमो के बारे में बताते है :

1. हनुमान जी का जन्म

हिन्दू धर्म के ग्रन्थ रामायण में हुनमान जी एक अजेय योद्धा थे ग्रंथो के अनुसार इनके जन्म स्थान के बारे में मतभेद है लेकिन इनकी जन्मतिथि स्पष्ट हो चुकी है उसके मुताबिक हनुमान का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था | इसके अलावा हनुमान जी के पिता के पीछे भी अनेक विशेषज्ञों द्वारा कई मत दिया जाते है कोई कहता है की वे वायुदेव के पुत्र थे कोई कहता है मारुती के पुत्र थे कोई कहता है महादेव के अवतार थे |

2. जब निगल लिया सूर्य

एक बार माता अंजनी हनुमान को कुटिया में सुला कर बहार चली गयी तभी हनुमान जी की नींद टूट गयी और जागते ही उन्हें बहुत तेज़ भूख लगने लगी तभी उन्होंने देखा की सामने एक पीला पका हुआ फल है जो की सूर्यदेव थे | तो वह उस फल को खाने के लिए आकाश में उड़ने लगे पवनपुत्र होने की वजह से पवन देव ने हवा का रुख उनकी दिशा की ओर कर दिया जिससे वह जल्दी सूर्य तक पहुंचकर उन्हें खा गए थे |

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3. समुन्द्र को लांघना

माता सीता की तलाश में समुन्द्र को लांघने के लिए अंगद को आदेश दिया गया लेकिन अंगद बोले की मई समुन्द्र पार जा तो सकता हूँ लेकिन वहां से लौटने की मेरे अंदर क्षमता नहीं है | उस वक़्त हनुमान शक्ति भूल चुके थे लेकिन जामवंत द्वारा उन्हें उनकी शक्तियों का एहसास कराया गया और हनुमान ने दो कदम में ही समुन्द्र को पार कर दिया था |

4. सुरसा से सामना

समुन्द्र को पार करते समय हनुमान जी का सामना सुरसा नाम की नागमाता से हुआ था जिन्होंने एक राक्षसी का रूप ले रखा था और उनके सामना उनसे हुआ और नागमाता ने उन्हें खाने के लिए कहा तभी अपनी बुद्धिमता से हनुमान जी ने उन्हें युद्ध में पराजय किया तभी सुरसा ने उन्हें युद्ध में जीतने का अपने काम में सफलता पाने का आशीर्वाद दिया |

5. राक्षसी माया का वध

जब हनुमान समुन्द्र पार कर रहे थे तो वहां एक राक्षसी रहती थी जिसका नाम माया था वह समुन्द्र के ऊपर उड़ने वाले पक्षियों को खा लेती थी लेकिन जब हनुमान वहां से गुज़र रहे थे तब उन्होंने इसका ये चल पहचान लिया और उनका वध करके आगे बढ़ना प्रारम्भ किया |

हनुमानजी के 10 पराक्रम जानिए

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6. सीता माता का शोक निवारण

जब भगवान हनुमान माता सीता को ढूंढते हुए लंका में पहुंचे तो उन्हें वहां सीता नहीं मिली उन्होंने पूरी लंका छान ली लेकिन फिर विभीषण द्वारा जानकारी मिलने पर वह सीधे उनसे मिलने अशोक वाटिका गए | वहां पहुँचने पर उन्हें माता सीता दिखाई दी और हनुमान ने उन्हें राम जी की अंगूठी देकर शोक निवारण किया और कहा की मै प्रभु श्रीराम का सन्देश लेकर आया हूँ वह जल्द ही आपको यहाँ से छुड़ा लेंगे |

7. अशोक वाटिका को उजाड़ना

माता सीता से मिलने के पश्चात् उनसे आज्ञा पाकर वह बाग़ वाले फलो को खाने के लिए अशोक वाटिका में थे वहां उसकी रक्षा के लिए कई राक्षस और राक्षसनी थी उन्होंने उन सबको मार दिया और वहां के सरे पेड़, फल फूल तोड़ डाले और पूरी अशोक वाटिका को उजाड़ कर रख दिया |

8. अक्षय कुमार का वध

रावण का पुत्र अक्षय कुमार जो की सर्वशक्तिशाली था रावण ने आशिक वाटिका में हुई उत्पत्ति की खबर लेने के लिए उन्हें भेजा तब अक्षय कुमार अपने असंख्य सेना को लेकर हनुमान से युद्ध करने गए वहां जाकर देखा तो हनुमान ने उन्होंने युद्ध के लिए ललकारा तभी एक ही वार ने उन्होंने रावणपुत्र अक्षय कुमार का वध कर डाला |

9. मेघनाथ से युद्ध

अक्षय कुमार की मृत्यु होने के पश्चात अक्षय कुमार का बड़ा भाई मेघनाथ उनसे युद्ध करने के लिए आशिक वाटिका जाता है हनुमान को देख कर मेघनाथ समझ गए की वह कोई साधारण वानर है है और उन्होंने ब्रह्मास्त्र से उनके ऊपर वार कर दिया हनुमान ने ब्रह्मास्त्र का मान रखने के लिए उसे अपने सह लिया और वह ब्रह्मास्त्र के वार से मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़े |

10. लंका दहन

मेघनाथ से युद्ध करने के पश्चात मेघनाथ उन्हें बंदी रावण के पास ले गया तब रावण ने अपनी महिमा और शक्ति के बारे में उन्हें बताया की तुम्हे मुझसे डर नहीं लगता तब भगवान हनुमान ने उन्हें राम की महिमा और शक्ति के बारे में बताया और उनसे क्षमा मांगने को कहा लेकिन रावण राज़ी नहीं हुआ और हुनमान जी की पूछ को नष्ट करने के लिए उनकी पूंछ में आग लगा दी तब हनुमान जी ने गुस्से में पूरी लंका में आग लगा दी |

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