स्वतंत्रता दिवस पर शायरी | आजादी की शायरी

15 अगस्त की शायरी

Swatanrata Diwas Par Shayari | Azadi Ki Shayari : जिस दिन हमारे भारत देश को आज़ादी मिली उस दिन को स्वंत्रता दिवस के नाम से जाना जाता है इस देश को आज़ादी दिलाने के लिए हमारे देश के कई महान पुरुषो ने अपने जान न्योछावर कर दी तो हम आपको उन्ही कुछ देशभक्त नेताओ, क्रांतिकारियों, स्वाधीनता सेनानी द्वारा कही गयी कुछ देशभक्ति के ऊपर शायरी बताते है | इन शायरियो को पढ़ कर आपका अपने देश के प्रति प्यार और ज्यादा और उभरेगा | वैसे इससे पहले हम स्वंत्रता संग्राम के सेनानी, स्वंत्रता दिवस पर कविता और महिला स्वंत्रता सेनानी के बारे में पढ़ चुके है जिसके माध्यम से अपने स्वंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले देशभक्तो के बारे में जाना इसीलिए अब हम आपको आज़ादी के ऊपर शायरी बताते है जिनसे आप काफी कुछ सीख सकते है |

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15 अगस्त की शायरी

गूंज रहा है दुनिया में भारत का नगाड़ा
चमक रहा आसमा में देश का सितारा
आजादी के दिन आओ मिलके करें दुआ
कि बुलंदी पर लहराता रहे तिरंगा हमारा

भूल न जाना भारत मां के सपूतों का बलिदान
इस दिन के लिए हुए थे जो हंसकर कुरबान
आजादी की ये खुशियां मनाकर लो ये शपथ
कि बनाएंगे देश भारत को और भी महान

हम आजाद हैं, ये आजादी कभी छिनने नहीं देंगे
तिरंगे की शान को हम कभी मिटने नहीं देंगे
कोई आंख भी उठाएगा जो हिंदुस्तान की तरफ
उन आंखों को फिर दुनिया देखने नहीं देंगे

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए
बस अमन से भरा यह वतन चाहिए
जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए
और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

खून से खेलेंगे होली,
अगर वतन मुश्किल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना
अब हमारे दिल में है,

कर जस्बे को बुलंद जवान
तेरे पीछे खड़ी आवाम
हर पत्ते को मार गिरायेंगे
जो हमसे देश बटवायेंगे

मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है

कुछ नशा तिरंगे की आन का है;
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है;
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा;
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है..!!

भारत देश हमको जान से प्यारा है
हिन्दुस्तानी नाम हमारा है।
न बर्षा में गलें न सर्दी से डरें न गर्मी से तपें ।
हम फौजी इस देश की शान है..!

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स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

वतन पर शायरी

तिरंगा हमारा हैं शान- ए-जिंदगी
वतन परस्ती हैं वफ़ा-ए-ज़मी
देश के लिए मर मिटना कुबूल हैं हमें
अखंड भारत के स्वपन का जूनून हैं हमें..!!

ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं शासक कई,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता..!!

कभी सनम को छोड़ के देख लेना,
कभी शहीदों को याद करके देख लेना,
कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो,
देश से कभी इश्क करके देख लेना..!!

बस ये बात हवाओं को बताये रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना,
लहू देकर जिसकी हिफाज़त की शहीदों ने,
उस तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना… जय हिन्द ।

मुझे तन चाहिए , ना मुझे धन चाहिए,
बस अमन से भरा मेरा वतन चाहिए,
जिन्दा रहूं तो इस मातृ-भूमि के लिए,
और जब मरू तो तिरंगा कफ़न चाहिये… जय हिन्द ।।

जिन्हें है प्यार वतन से, वो देश के लिए अपना लहू बहाते हैं,
माँ की चरणों में अपना शीश चढ़ाकर, देश की आजादी बचाते हैं,
देश के लिए हँसते-हँसते अपनी जान लुटाते हैं… जय हिन्द ।।

लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली अगर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है… जय हिन्द ।।

हर किसी के दिल पे एक दास्ता लिख जाउगा,
जाते जाते में जमी को आसमा लिख जाउगा,
अगर किसी ने देखा आख भर के मेरे हिंद को,
सरहदों पर खून से हिन्दुस्तान लिख जाउगा

होली वही जो स्वाधीनता की आन बन जाये,
होली वही जो गणतंत्रता की शान बन जाये,
भरो पिचकारियों में पानी ऐसे तीन रंगो का,
जो कपड़े पर गिरे तो हिँदुस्थान बन जाये…!!

हम भी तिरे बेटे हैं ज़रा देख हमें भी
ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से शिकायत नहीं करते

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब
सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए

हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके लेकिन
ऐ ख़ाक-ए-वतन क़र्ज़ अदा क्यूँ नहीं होता

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स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति शायरी

जवानो नज़्र दे दो अपने ख़ून-ए-दिल का हर क़तरा
लिखा जाएगा हिन्दोस्तान को फ़रमान-ए-आज़ादी

काबे को जाता किस लिए हिन्दोस्ताँ से मैं
किस बुत में शहर-ए-हिन्द के शान-ए-ख़ुदा न थी

ख़ुदा ऐ काश ‘नाज़िश’ जीते-जी वो वक़्त भी लाए
कि जब हिन्दोस्तान कहलाएगा हिन्दोस्तान-ए-आज़ादी

ख़ूँ शहीदान-ए-वतन का रंग ला कर ही रहा
आज ये जन्नत-निशाँ हिन्दोस्ताँ आज़ाद है

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

मिट्टी की मोहब्बत में हम आशुफ़्ता-सरों ने
वो क़र्ज़ उतारे हैं कि वाजिब भी नहीं थे

फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

तन-मन मिटाए जाओ तुम नाम-ए-क़ौमीयत पर
राह-ए-वतन पर अपनी जानें लड़ाए जाओ

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

ऐ ख़ाक-ए-वतन अब तो वफ़ाओं का सिला दे
मैं टूटती साँसों की फ़सीलों पे खड़ा हूँ

ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ
महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है

ऐ वतन जब भी सर-ए-दश्त कोई फूल खिला
देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

हम अहल-ए-क़फ़स तन्हा भी नहीं हर रोज़ नसीम-ए-सुब्ह-ए-वतन
यादों से मोअत्तर आती है अश्कों से मुनव्वर जाती है

 

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