सुभाष चंद्र बोस पर शायरी – Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti SMS

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti SMS

Subhash Chandra Bose Par Shayari : नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में ओडिशा के कटक शहर में हुआ था इनके पिता जानकीदास बोस जो कि पेशे से वकील थे तथा माता का नाम प्रभावती देवी था | सुभाष चंद्र बोस को हमारे भारतवर्ष में लगभग हर उम्र का व्यक्ति जानता है इसीलिए 23 जनवरी के दिन हर साल उनकी जयंती के उपलक्ष्य में कुछ कार्यक्रम भी किए जाते हैं | इसीलिए हम आपको सुभाष चंद्र बोस की जयंती के लिए कुछ शायरियों के बारे में जानकारी देते हैं जो कि शायरियां आपके लिए महत्वपूर्ण है जिनसे आपके अंदर देशभक्ति की भावना जागने लगती है |

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रेरणादायक शायरी

एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा, निष्ठा कर्तव्य और बलिदान. जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है. अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो..

इतना तो आप भी मानेंगे, एक न एक दिन तो मैं जेल से अवश्य मुक्त हो जाऊँगा, क्योंकि प्रत्येक दुःख का अंत होना अवश्यम्भावी है …

अपने कॉलेज जीवन की देहलीज पर खड़े होकर मुझे अनुभव हुआ, जीवन का कोई अर्थ और उद्देश्य है…

व्यर्थ की बातों में समय खोना मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता..

मैं चाहता हूँ चरित्र ,ज्ञान और कार्य

मेरे जीवन के अनुभवों में एक यह भी है, मुझे आशा है की कोई-न-कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती…

मैंने जीवन में कभी भी खुशामद नहीं की है, दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता….

जिस व्यक्ति में सनक नहीं होती, वह कभी भी महान नहीं बन सकता, परन्तु सभी पागल व्यक्ति महान नहीं बन जाते, क्योंकि सभी पागल व्यक्ति प्रतिभाशाली नहीं होते. आखिर क्यों ? कारण यह है की केवल पागलपन ही काफी नहीं है इसके अतिरिक्त कुछ और भी आवश्यक है….

Subhash Chandra Bose Shayari

ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए…

मैं संकट एवं विपदाओं से भयभीत नहीं होता. संकटपूर्ण दिन आने पर भी मैं भागूँगा नहीं, वरन आगे बढकर कष्टों को सहन करूँगा …..

मुझे यह नहीं मालूम की, स्वतंत्रता के इस युद्ध में हममे से कौन कौन जीवित बचेंगे. परन्तु में यह जानता हूँ, अंत में विजय हमारी ही होगी….

तुम मुझे खून दो ,मैं तुम्हें आजादी दूंगा..

मैंने अमूल्य जीवन का इतना समय व्यर्थ ही नष्ट कर दिया, यह सोच कर बहुत ही दुःख होता है. कभी कभी यह पीड़ा असह्य हो उठती है, मनुष्य जीवन पाकर भी जीवन का अर्थ समझ में नहीं आया. यदि मैं अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाया, तो यह जीवन व्यर्थ है, इसकी क्या सार्थकता है ?

मुझमे जन्मजात प्रतिभा तो नहीं थी, परन्तु कठोर परिश्रम से बचने की प्रवृति मुझमे कभी नहीं रही…

ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए.

जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे…

सुभाष चंद्र बोस पर शायरी

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सुभाष चन्द्र बोस के क्रांतिकारी शायरियां

सुबह से पहले अँधेरी घडी अवश्य आती है, बहादुर बनो और संघर्ष जारी रखो, क्योंकि स्वतंत्रता निकट है…

भावना के बिना चिंतन असंभव है, यदि हमारे पास केवल भावना की पूंजी है तो चिंतन कभी भी फलदायक नहीं हो सकता. बहुत सारे लोग आवश्यकता से अधिक भावुक होते हैं, परन्तु वह कुछ सोचना नहीं चाहते

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके.

भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है जो लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी.

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके.. एक शहीद की मौत मरने की इच्छा, ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके…

संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले नहीं था….

अगर संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़, तब जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है…

यदि आपको अस्थायी रूप से झुकना पड़े, तब वीरों की भांति झुकना…

Shayari On Subhash Chandra Bose In Hindi

हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो, हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो, फिर भी हमें आगे बढ़ना ही है..सफलता का दिन दूर हो सकता है, पर उसका आना अनिवार्य है….

निसंदेह बचपन और युवावस्था में, पवित्रता और संयम अति आवश्यक है…

मेरे मन में कोई संदेह नहीं है, कि हमारे देश की प्रमुख समस्यायों जैसे गरीबी ,अशिक्षा , बीमारी , कुशल उत्पादन एवं वितरण का समाधान, सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है …..

इतिहास में कभी भी विचार-विमर्श से कोई निर्णायक परिवर्तन हासिल नहीं किया गया है

मुझे जीवन में एक निश्चित लक्ष्य को पूरा करना है. मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है. मुझे नेतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है…

मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं, और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है….

हमें अधीर नहीं होना चहिये, न ही यह आशा करनी चाहिए, की जिस प्रश्न का उत्तर खोजने में न जाने कितने ही लोगों ने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, उसका उत्तर हमें एक-दो दिन में प्राप्त हो जाएगा….

मैंने अपने छोटे से जीवन का बहुत सारा, समय व्यर्थ में ही खो दिया है..

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