कोट्स (Quotes)

रवींद्रनाथ टैगोर के विचार व उद्देश्य

Ravindranath Tagore Ke Anmol Vichar : रविंद्र नाथ टैगोर का नाम भारत में लगभग में सभी लोग जानते होंगे वह एक विश्विख्यात कवि थे जिन्होंने भारत का राष्ट्रगान लिखा था इसके अलावा इनकी कई ऐसी कहानियां जो की उनके द्वारा लिखी गयी जिसकी वजह से यह भारत के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाये रखे हुए है | इसीलिए हम आपको रविंद्रनाथ टैगोर जी के विचारो के बारे में बताते है जो की हमारे लिए काफी प्रेरणादायक सिद्ध होते है जिसकी मदद से आप उनके बारे में बहुत कुछ जान सकते है |

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रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के उद्देश्य

Ravindranath Tagor Ka Shiksha Ke Uddeshya : रविंद्र नाथ टैगोर जी ने शिक्षा के ऊपर कई सारी रचनाये की और शिक्षा के ऊपर कई उपदेश भी दिए हम आपको उन्ही उपदेशो में से कुछ विचार बताते है जिन्हे आप पढ़ सकते है और रविंद्रनाथ टैगोर जी के बारे में जान सकते है :

दुनिया का प्रत्येक बच्चा अपने जन्म के साथ ये संदेश लेकर आता है कि भगवान अभी भी मनुष्य से निराश नहीं हुआ है|

अगर आप अपनी गलतियों के दरवाजे बंद कर लेगे, तो खुद ब खुद आप बाहर रह जाएगे|

मत कहो कि यह सुबह है, और इसे कल के नाम से ख़ारिज मत करो| इसे एक नए बच्चे की तरह देखो, जिसका अभी तक नाम भी नहीं रखा गया है|

मित्रता की गहराई को परिचय की लम्बाई से नापा नहीं जा सकता

वे लोग जो अच्छा करने में बहुत ज्यादा व्यस्त रहते है, वो स्वयं अच्छा बनने के लिये समय ही नहीं निकाल पाते

आस्था (Faith) वह पक्षी है, जो भोर (सुबह) के समय अँधेरा होने पर भी प्रकाश को महसूस करता हैं|

यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता, तो दूसरे दरवाजे से जाऊँगा या नया दरवाजा बनाऊंगा| क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार में हो, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही

मिट्टी के बंधन से मुक्ति किसी भी पेड़ के लिए आजादी नहीं हो सकती

बर्तन में रखा पानी चमकदार होता है, और समुन्द्र का पानी गहरा होता है| अथार्त लधु सत्य स्पष्ट होता है, जबकि महान सत्य मौन रहता है|

कला के माध्यम से कलाकार स्वयं को उजागर करता है, ना कि अपनी वस्तुओ को

हम स्वतंत्रता तब हासिल कर पायेंगे, जब हम उसकी पूरी कीमत चूका देंगे

रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के उद्देश्य

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Rabindranath Tagore Quotes In Hindi

रबीन्द्रनाथ टैगोर कोट्स इन हिंदी : रविंद्रनाथ जी के कोट्स जानने के लिए आप नीचे बताये गए कोट्स को पढ़े और उन कोट्स को आप आपने दोस्तों को भी शेयर कर सकते है :

हम यह प्रार्थना न करें कि हमारे सामने चुनौतियाँ और ख़तरें न आयें बल्कि हमें यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हम उन चुनौतियों का सामना निडरता से कर पायें |

तितली महीने नहीं बल्कि क्षण गिनती हैं और इसीलिए उसके पास पर्याप्त समय होता हैं|

हर एक समस्या जिससे हम मुहं फेर लेते है, वो एक भूत बनाकर हमारा पीछा करती रहती है|

मैंने सपना देखा कि जीवन एक आनंद है| मैं जागा तो पाया कि जीवन तो सेवा है, जब मैंने सेवा की तो जाना कि सेवा में ही आनंद है

जो मन की पीड़ा को सही तरह से नहीं बता पाता, उसी व्यक्ति को क्रोध ज्यादा आता है

जो हमारा है वो हमें तभी मिल पायेगा, जब हमारे अन्दर उसे स्वीकार करने की क्षमता होगी

खुश रहना सरल होता है, पर सरल रहना बहुत मुश्किल होता है

जो व्यक्ति बहुत सारी वस्तुओं और सम्पति का स्वामी होता हैं, उसके पास डरने को बहुत कुछ होता हैं|

फूल की पंखुडियां तोड़ कर आप उसकी सुन्दरता इकठ्ठा नहीं कर सकते

मौत का अर्थ प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है, यह तो सिर्फ दीपक को बुझाना हैं क्योंकि सुबह हो चुकी हैं

सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है

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रवीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा

Ravindranath Tagore Ki Shiksha : टैगोर जी से हमें काफी कुछ सिखने को मिलता है उनकी बताई गयी शिक्षा आज भी हमारे लिए बहुत महत्त्व रखती है इसीलिए आप उन शिक्षाओं के बारे में जानकर उनके विचारो को पढ़ सकते है :

कट्टरता सच को उन हाथों में सुरक्षित रखने की कोशिश करती है जो उसे मारना चाहते हैं

पंखुडियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकठ्ठा करते

हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी

मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा आनंद है

मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है

मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती

किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है

जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है ; यदि हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं

मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है

मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं

मैं एक आशावादी होने का अपना ही संसकरण बन गया हूँ. यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता तो दुसरे से जाऊंगा- या एक नया दरवाजा बनाऊंगा. वर्तमान चाहे जितना भी अंधकारमय हो कुछ शानदार सामने आएगा

हर बच्चा इसी सन्देश के साथ आता है कि भगवान अभी तक मनुष्यों से हतोत्साहित नहीं हुआ है

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