त्यौहार

रमा एकादशी व्रत कथा

Rama Ekadashi Vrat Katha : भारत देश के त्योहारों का देश है जिसमे की कई तरह के त्योहारों को मनाया जाता है और कई तरह के धार्मिक व्रतों को महत्वता दी जाती है | हर साल चौबीस एकादशी होती है और हर एकादशी का अपना एक अलग महत्व होता है वैसे हम सभी जानते है की एकादशी का व्रत हमारे द्वारा किये गए पापो को नष्ट करने वाली होती है इससे हमारे सभी पाप नष्ट हो जाते है लेकिन उसके अलावा हर एकादशी की व्रत विधि, व्रत कथा तथा व्रत का महत्व अलग-2 होता है इसीलिए हम आपको इस व्रत के बारे में जानकारी देते है |

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एकादशी कब है 2020

Ekadashi Kab Hai 2020 : हिंदी कैलेंडर के अनुसार रमा एकादशी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाया जाता है | उसी तरह से रमा एकादशी का व्रत अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल 2020 में 15 अक्टूबर के दिन रखे जाने का प्रावधान है |

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रमा एकादशी व्रत विधि

Rama Ekadashi Vrat Vidhi : रमा एकादशी के दिन किस तरह से पूजा करनी चाहिए क्या व्रत विधि है ? इसके बारे में जानकारी पाने के लिए आप नीचे बताई गयी जानकारी के अनुसार विधिपूर्वक पूजन कर सकते है :

  1. इस व्रत को दशमी के दिन ही शुरू करना चाहिए |
  2. उसके बाद एकादशी के दिन सुबह उठ कर नित्य कामो से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए |
  3. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करे और भगवान विष्णु का धूप, पंचामृत, तुलसी के पत्तों, दीप, नेवैद्ध, फूल, फल आदि से पूजा करे |
  4. व्रत वाले दिन भगवान का जागरण करे |
  5. उसके बाद द्वादशी के दिन विष्णु भगवान का पूजन करे और ब्राह्मणो को भोजन करे और दान करे |
  6. उसके बाद आपको खुद भोजन ग्रहण करके व्रत तोड़ देना चाहिए |

रमा एकादशी व्रत कथा

एकादशी का महत्व

Ekadashi Ka Mahatv : पद्ध पुराण के अनुसार रमा एकादशी हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण व्रत होता है इस व्रत को करने से हमें कामधेनु और चिंतामणि के सामान पुण्यो की प्राप्ति होती है | यह व्रत मनुष्य के पापो का नाश करने वाला मन जाता है और इस व्रत को करने से इंसान के पाप नाश करके उसे विष्णु धाम प्राप्त हो जाता है और इस व्रत के प्रभाव करने से धन – धान्य की कमी दूर हो जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है |

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रमा एकादशी की कथा

Rama Ekadashi Ki Katha : एक बार महानकुंड नाम का एक महान राजा था, जो भगवान विष्णु के महान भक्त थे। मुकुंद की बेटी चंद्रभागा थी, जो शोभान से शादी कर चुकी थी। चंद्रभागा ने अपने पति से एकदशी के पवित्र दिन को उपवास करने का अनुरोध किया। यद्यपि शोभन अस्वस्थ थे लेकिन उन्होंने उपवास का पालन करने पर सहमति व्यक्त की क्योंकि वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था। हालांकि शोभन की कमजोर शरीर तेजी से संभाल नहीं पाई और अगले सुबह वह मर गया। शोभान की मृत्यु के बाद, वह एक विशेष स्थान पर गया जो दूसरों के लिए अदृश्य था।

जब वह वहां एक ब्राह्मण था, जो चंद्रभौग को जानता था कि वे उस पर गए। शोभना ने तब उन्हें समझाया कि राम एकदशी के विशेष उपवास का निरीक्षण करने का महत्व। ब्राह्मण घर वापस चले और चंद्रभगा को वात की महानता सुनाई। जब उसने वात को देखा और भगवान विष्णु को समर्पित पूजा की पेशकश की, उसके पति सोभान की जिंदगी लौटा दी गई थी। इस तरह रमा एकदशी की विशेष उपवास की महानता है, देखकर जो भक्तों के जीवन में महान भाग्य और समृद्धि ला सकते हैं।

 

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