त्यौहार

नरक चतुर्दशी पूजन विधि

Narak Chaturdashi : नरक चतुर्दशी या काली चौदस एक हिंदू त्योहार है, जो कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी (14 वें दिन) को विक्रम संवत हिन्दू कैलेंडर में कार्तिक महीने में पड़ता है। यह दिवाली के पांच दिवसीय महोत्सव का दूसरा दिन है। हिंदू साहित्य कहता है कि इस दिन कृष्ण, सत्यभाम और काली ने आशुरा नरकासुरा की हत्या कर दी थी। इसीलिए हम आपको नर्क चतुर्दशी के बारे में बताते है की आपको इस दिन किस तरह से पूजा करनी चाहिए या इसका क्या महत्व है ? पूरी जानकारी पाने के लिए आप हमारी इस पोस्ट को पढ़ सकते है |

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नरक निवारण चतुर्दशी 2020

Narak Nivaran Chaturdashi 2020 : यह कार्तिक माह के कृष्णा पक्ष के चौदस के दिन यह पर्व मनाया जाता है इस दिन का महत्व इसीलिए माना जाता है क्योकि इस दिन नरक में जाने वाले पापो से मुक्ति मिलती है नरक मुक्ति मिल जाती है इसीलिए यह त्यौहार साल 2020 में 18 अक्टूबर के दिन मनाया जायेगा |

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नरक चतुर्दशी पूजा विधि | नरक चतुर्दशी की पूजा

Narak Chaturdashi Puja Vidhi | Narak Chaturdashi Ki Puja : नरक चतुर्दशी के दिन आपको किस प्रकार से पूजा करनी चाहिए इसके लिए आप नीचे बताई गयी जानकारी के अनुसार पूजन कर सकते है :

  1. इस दिन सूर्योदय के बाद उठ कर चन्दन के लेप को शरीर पर लगा कर स्नान करे |
  2. नहाने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दे |
  3. उसके बाद शरीर पर तेल व तिल लगाए |
  4. इस दिन भगवन श्री कृष्णा की उपासना की जाती है
  5. रात के समय में घर की दहलीज़ पर दीप जलाये जाते है और यमराज की पूजा की जाती है |
  6. इसके आलावा आप हनुमान जी की अर्चना भी करे |

नरक चतुर्दशी पूजन विधि

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नरक चतुर्दशी की कथा

Narak Chaturdashi Ki Katha : प्राचीन काल में एक क्रांति देव का नाम राजा हुआ करता था जो की बहुत दानी, शांत और पुण्य आत्मा था जिसने भूल कर भी किसी तरह का कोई पाप नहीं किया होगा | जब वह राजा बहुधा गया तो उसकी मृत्यु का समय नज़दीक आ गया था तब यमराज उन्हें लेने के लिए आये तब उन्हें यह जानकर बहुत दुःख हुआ की उन्हें मोक्ष नहीं नर्क की प्राप्ति होने वाली है |

तब उन्होंने यमदूत से इसके बारे में जानकारी पाना चाही की हे यमदूत जब जब मैने अपने पूरे जीवनकाल में किसी तरह का कोई पाप नहीं किया तो मुझे फिर नर्क क्यों मिल रहा है | तब उन्होंने बताया की एक बार भूलवश एक ब्राह्मण तुम्हारे दर से भूखा ही चला गया जो पाप अब तक तुम्हारे सर स हटा नहीं है | तब जाकर राजा ने यमराज से बोलै की मुझे अपनी भूल सुधारने का थोड़ा समय दो | तब यमराज वहां से चले गए तब राजा ने अपने गुरु से अपने पाप का प्रायश्चित करने का उपाय जाना तब उन्होंने बताया की तुम्हे हज़ार ब्राह्मणो को खाना खिलाना होगा तभी जाकर तुम्हारे पाप नष्ट हो पाएंगे | और राजा ने वैसा ही किया उसने चतुर्दशी के दिन हज़ार ब्राह्मणो को भोजन कराया और उसके पाप नष्ट हो गए इस तरह से उस राजा को मोक्ष की प्रापति हुई |

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