गोवर्धन पूजा विधि, कथा व महत्व

गोवर्धन पूजा विधि, कथा व महत्व

Goverdhan Puja Vidhi, Katha Va Mahatv : हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली के बाद भी कई त्योहारों को मनाया जाता है उनमे से एक त्यौहार गोवेर्धन पूजा होती है इस दिन भगवान गोवेर्धन की पूजा की जाती है | दिवाली के अगले ही दिन इस पूजा का आयोजन किया जाता है यह पूजा भी हमारे जीवन में बहुत महत्व रखती है इसीलिए हम आपको गोवेर्धन पूजा के बारे में जानकारी देते है की यह पूजा क्यों रखी जाती है और इस पूजा का क्या समय है ? इसका क्या महत्व है ? तथा पूजन विधि क्या है ? इसके बारे में जानकारी पाने के लिए आप हमारी इस पोस्ट को पढ़ कर इसके बारे में उचित जानकारी पा सकते है |

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गोवर्धन पूजा का समय

Goverdhan Puja Ka Samay : गोवर्धन पूजा हर साल दिवाली के एक दिन बाद यानि की कार्तिक मास के कृष्णा पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है इस साल यानि 2017 में हिन्दू धर्म में गोवर्धन पूजा 20 अक्टूबर को की जाएगी | और इसके पूजन के लिए अलग से मुहूर्त निर्धारित किया गया है अगर आप इन मुहूर्तो में गोवर्धन पूजा करते है तो यह आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा |

गोवर्धन पूजा पर्व तिथि – 20 अक्तूबर 2017, शुक्रवार
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – प्रातः 06:28 बजे से 08:43 बजे तक
गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त – दोपहर बाद 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – रात्रि 00:41 बजे से (20 अक्तूबर 2017)
प्रतिपदा तिथि समाप्त – रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)

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गोवर्धन पूजा का महत्व | गोवर्धन पूजा कथा

Goverdhan Puja Ka Mahatv : अन्नकूट के दौरान गोवर्धन पूजा एक प्रमुख प्रथा है। यद्यपि कुछ ग्रंथ गोवर्धन पूजा और अन्नकुट का पर्याय समानार्थ हैं, हालांकि गोवर्धन पूजा दिन-लम्बी अन्नकूट महोत्सव का एक भाग है। गोवर्धन पूजा कैसे की जाती है इसके कई रूप हैं। एक अनुष्ठान में गाय गोबर या गंदगी के छोटे-छोटे घाट बनाने के लिए गोवर्धन पर्वत का प्रतीक होता है, जो फूलों से सुशोभित हो जाते हैं और बाद में उनकी चारों ओर घूमते हुए पूजा करते हैं। भगवान गोवर्धन को भी प्रार्थना की जाती है। भागवत पुराण में वर्णित के रूप में, गोवर्धन पूजा को मुख्य रूप से कृष्ण को उनकी अंगुली पर गोवर्धन हिल को उठाने से पहचाना गया है, जो इंद्र के मुंह से क्रोध से अपना आश्रय मांगते हैं।

कई मंदिरों, या पूजा के हिंदू स्थानों में, इस दिन देवी देवताओं को ‘अन्नकूट’ का भोग लगाया जाता है। शाकाहारी खाद्य पदार्थों की एक विशाल सामग्री पारंपरिक रूप से देवताओं के समक्ष स्तरों या चरणों में व्यवस्थित की जाती है। इस दिन देवी देवताओं के सामने मिठाइयों का भी भोग लगाया जाता है | इसी वजह से इस दिन का एक महत्वपूर्ण दिन होता है और यह हिन्दू धर्म के लिए बहुत धार्मिक मान्यता रखता है |

गोवर्धन पूजा का समय

गोवर्धन पूजा विधि

Goverdhan Puja Vidhi : यदि आपको गोवर्धन पूजा के विषय में किसी प्रकार का कोई संदेह होता है तो इसके लिए आप हमारे द्वारा बताई गयी विधि से भगवान गोवर्धन की पूजा करके लाभ पा सकते है :

  1. इस दिन हमें सुबह जल्दी उठ कर पवित्र जल से स्नान करना होता है |
  2. घर में अन्नकूट के प्रसाद बनाया जाता है |
  3. उसके बाद आप घर के आँगन में भगवान गोवर्धन की प्रतिमा गोबर की सहायता से बनाये |
  4. इस गोबर में आप गाय से प्राप्त होने वाले पदार्थ दूध, दही, घी अथवा आपकी खेती से जुड़े अन्य औज़ारो को गोबर में मिलाया जाता है |
  5. उसके बाद आपको गोवर्धन महाराज की प्रतिमा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है |
  6. उसके बाद नैवैध चढ़ाना होता है और गोवर्धन आरती और गोवर्धन पूजा मंत्र पढ़ा जाता है |
  7. उसके साथ ही हमें भगवान कृष्णा की आरती उतारनी होती है |
  8. उसके बाद सभी भक्तो को अन्नकूट का परसाद बाँटना होता है इस तरह से आपकी गोवर्धन पूजा सफल हो जाती है |

गोवर्धन पूजा मंत्र

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं व्यपोहतु।।

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गोवर्धन आरती

Goverdhan Aaarti : गोवर्धन पूजा के समय आपको उनकी आरती उतारने के लिए इस आरती का प्रयोग करना है इस आरती को गए कर ही आप उनकी वंदना कर सकते है :

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,
और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

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