71st republic day पर कविता 2020 : गणतंत्र दिवस यानी की रिपब्लिक डे भारत के लिए बड़ा ही गर्व व सम्मान का दिन है क्योंकि इस दिन हमारे देश का का सविंधान लागू हुआ था | भारत देश का सविंधान 26 जनवरी 1950 को सशक्त हुआ था जिससे गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट (1935) को हटा दिया था |Bharat के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने Government House में  26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।

भारत का संविधान 26 नवम्बर, 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था, और एक एक स्वतंत्र गणराज्य बनने की दिशा में देश के संक्रमण को पूरा करने के लिए लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ R-Day 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया था | गणतंत्र दिवस की कविता हर कसी को गोरान्वित महसूस करने के लिए काफी होती हैं इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं Gantantra Diwas पर गणतंत्र दिवस पर कविता यानी की 26 जनवरी कवितायें जो की आप अपने शुभचिंतको को भेज सकते हैं |

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गणतंत्र दिवस कविता

सीने पर गोली खाते हैं
अपनी जान गंवाते हैं
इस तरह शहीद अपना देश बचाते हैं
देश के आगे छोटी हमारी जान है
तिरंगा हमारी शान है

सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता
जिसके गुण गाता है संसार सारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा

माह जनवरी छब्बीस को हम
सब गणतंत्र मनाते |
और तिरंगे को फहरा कर,
गीत ख़ुशी के गाते ||

संविधान आजादी वाला,
बच्चो ! इस दिन आया |
इसने दुनिया में भारत को,
नव गणतंत्र बनाया ||

क्या करना है और नही क्या ?
संविधान बतलाता |
भारत में रहने वालों का,
इससे गहरा नाता ||

यह अधिकार हमें देता है,
उन्नति करने वाला |
ऊँच-नीच का भेद न करता,
पण्डित हो या लाला ||

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने,
बात यही बतलाई ||

इसके बाद बतायी बातें,
जन-जन के हित वाली |
पढ़ने में ये सब लगती हैं,
बातें बड़ी निराली ||

लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी,
ऊँचे पद पा सकते |
और बढ़ा व्यापार नियम से,
दुनिया में छा सकते ||

देश हमारा, रहें कहीं हम,
काम सभी कर सकते |
पंचायत से एम.पी. तक का,
हम चुनाव लड़ सकते ||

लेकर सत्ता संविधान से,
शक्तिमान हो सकते |
और देश की इस धरती पर,
जो चाहे कर सकते ||

लेकिन संविधान को पढ़कर,
मानवता को जाने |
अधिकारों के साथ जुड़ें,
कर्तव्यों को पहचानो ||

गणतंत्र दिवस पर कविता

पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान।
भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥
वक्ता चतुर सुजान, देश का गौरव गाओ।
श्रोताओं का मान करो नारे लगवाओ॥
इसी रीति से बनो सुनेता ‘रामसुहावन’।
कीर्ति-लाभ का समय सुहाना यह दिन पावन॥
भाई तुमको यदि लगा, जन सेवा का रोग।
प्रजातंत्र की ओट में, राजतंत्र को भोग॥
राजतंत्र को भोग, मजे से कूटनीति कर।
झण्डे-पण्डे देख, संभलकर राजनीति कर॥
लाभ जहां हो वहीं, करो परमार्थ भलाई।
चखो मलाई मस्त, देह के हित में भाई॥
कथनी-करनी भिन्नता, कूटनीति का अंग।
घोलो भाषण में चटक, देश-भक्ति का रंग॥
देश-भक्ति का रंग, उलीचो श्रोताओं पर।
स्वार्थ छिपाओ प्रबल, हृदय में संयम धरकर॥
अगले दिन से तुम्हें, वहीं फिर मन की करनी।
स्वार्थ-साधना सधे, भिन्न जब करनी-कथनी॥
बोलो भ्रष्टाचार का, होवे सत्यानाश।
भ्रष्टाचारी को मगर, सदा बिठाओ पास॥
सदा बिठाओ पास, आंच उस पर न आए।
करे ना कोई भूल, जांच उसकी करवाए॥
करे आपकी मदद, पोल उसकी मत खोलो।
है गणतंत्र महान, प्रेम से जय जय बोलो॥
कर लो भ्रष्टाचार का, सामाजिक सम्मान।
सुलभ कहां हैं आजकल, सदाचरण-ईमान॥
सदाचरण-ईमान मिले तो खोट उछालो।
बन जाओ विद्वान, बाल की खाल निकालो॥
रखो सोच में लोच, उगाही दौलत भर लो।
प्रजातंत्र को नोच, कामना पूरी कर लो॥

Poem On Republic Day In Hindi

आज नई सज-धज सेगणतंत्र दिवस फिर आया है।
नव परिधान बसंती रंग कामाता ने पहनाया है।
भीड़ बढ़ी स्वागत करने कोबादल झड़ी लगाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों मेऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।
धरनी मां ने धानी साड़ीपहन श्रृंगार सजाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।
भारत की इस अखंडता कोतिलभर आंच न आने पाए।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाईमिलजुल इसकी शान बढ़ाएं।
युवा वर्ग सक्षम हाथों सेआगे इसको सदा बढ़ाएं।
इसकी रक्षा में वीरों नेअपना रक्त बहाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।

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गणतंत्र दिवस की कविता

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये;

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

अपना 67वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे;

देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,

भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,

थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,

था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,

पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,

थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।|

गणतंत्र दिवस पर छोटी कविता

देखो 26 जनवरी है आयी, गणतंत्र की सौगात है लायी।

अधिकार दिये हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध।

हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन,

लाला किले पर होता है जब प्रधानमंत्री का भाषन,

नयी उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन,

अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन,

2 मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन।

सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है,

आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है,

संविधान इसका संचालक है, हम सब का वो पालक है,

लोकतंत्र जिसकी पहचान है, हम सबकी ये शान है,

गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान है।

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गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी कवितायें | Republic day Poem
1 Comment

1 Comment

  1. Anjali | 1HindiShare

    January 23, 2020 at 6:29 pm

    बहुत ही बढ़िया कविता ..जय हिन्द

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