Kalratri Mantra

Kalratri Mantra

कालरात्रि मंत्र : कालरात्रि मात्रा दुर्गा जी का सांतवा स्वरुप है और इनकी पूजा नवरात्रि के दिनों में ही की जाती है इनकी उत्पत्ति के लिए दुर्गा जी ने की थी असुरो के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए किया था | तो आज हम आपको बताएँगे की किस तरह से आप कालरात्रि मंत्र के माध्यम से अपने शत्रुओ का विनाश कर सकते है तो जानिए इस मंत्र के बारे में की इसके अलावा आप और इस मंत्र में क्या लाभ पा सकते है | क्योंकि इस मंत्र को पढ़ने के लिए भी आपको अलग तरह से पढ़ना पड़ता है तो आप इस मंत्र को किस तरह से पढ़ते है इसकी पूरी जानकारी हम आपको देते है |

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Kalratri Puja Mantra

कालरात्रि पूजा मंत्र : नवरात्र के सांतवे दिन माँ कालरात्रि की उपासना इस मंत्र से की जाती है इस मंत्र के जाप करने से सभी बुरी शक्तियों से बचाव व उनका नाश हो जाता है यही मंत्र है जिसके माध्यम से आप माँ कालरात्रि की वंदना कर सकते है वैसे इस मंत्र का जाप आप माँ दुर्गा की वंदना करते समय भी कर सकते है :  :

एकवेणी जपाकर्णपुरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यशरीरिणी॥
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिभर्यङ्करी ॥

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Maa Kalratri Stuti

माँ कालरात्रि स्तुति : यदि माँ कालरात्रि की स्तुति करना चाहे तो उनकी आरती के समय आप ये मंत्र पढ़ सकते है इस मंत्र के माध्यम से आप माँ दुर्गा के सभी स्वरूपो की आरधना कर सकते है :

|| ॐ  ऐं  ह्रीं  क्लीं  श्रीं  कालरात्रि  सर्वं  वश्यं  कुरु ||
|| कुरु वीर्यं  देवी  गनेश्वर्ये  नमः  ||

Kalratri Puja Mantra

Kaalratri Mata

कालरात्रि माता जो की देवी दुर्गा का सांतवा रूप था जब आप उनकी आरती करते है तो आपको इस कथा का पाठ सुनाया जाता है ये कथा निम्न प्रकार है :

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Maa Kalratri Katha in Hindi

माँ कालरात्रि कथा इन हिंदी : कालरात्रि की कथा के अनुसार असुरो पर राज करने वाला असुरो का राजा शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज हुआ करता था जिसने तीनो लोको में हाहाकार मचा रखा था उसके भय के कारणवश सभी देवताओ ने सृष्टि की रचना करने वाले शिव जी का सहारा लिया और उनके पास गए उन्हें सारी बात बताई जिसके बाद शिव जी ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को अपने भक्तो की रक्षा करने को कहा | तभी पार्वती जी ने दुर्गा का रोप्प धारण किया और शुभ-निशुम्भ को मर गिराया लेकिन जब उन्होंने रक्तबीज के ऊपर प्रहार किया तो उसके बहे रक्त से लाखो रक्तबीज उत्पन्न हो गए तभी माँ दुर्गा ने अपने तेज़ से कालरात्रि को उत्पन्न किया | और फिर कई समय तक युद्ध चला और जब देवी दुर्गा ने रक्तबीज का वध किया तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को कालरात्रि ने अपने मुख में लिया और इस तरह से से देवी दुर्गा ने रक्तबीज का गाला काट दिया |

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