Jaun Elia Poetry

John Elia Shayari In Hindi

जॉन एलिया पोएट्री : जॉन एलिया एक प्रसिद्ध कवि रह चुके है वह कवि के साथ-2 दार्शनिक, लेखक, और स्कॉलर थे आज हम आपको उनके द्वारा लिखी गयी कुछ कविताये बताते है जिनके माध्यम से आप इस कवि के बारे में काफी कुछ जान सकते है यह उर्दू के लेखक भी थे और इन्हें उर्दू के बारे में अधिक ज्ञान था वैसे तो यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है | वैसे तो इनका जन्म उत्तर प्रदेश के अल्मोड़ा जिले में हुआ था बाद में इन्होंने पाकिस्तान की राष्ट्रीयता ली जिसकी बदौलत इन्होंने काफी प्रसिद्धि प्राप्त की | तो आज हम आपको ऐसी ही कुछ बेहतरीन कविताए बताते है जिन्हें पढ़ कर आप जॉन एलिया के चरित्र के बारे में काफी कुछ जान सकते है |

यह भी देखे :  शायरी ऑन टीचर्स इन हिंदी

John Elia Shayari In Hindi

जॉन एलिया शायरी इन हिंदी : जॉन एलिया द्वारा कही गयी कुछ प्रसिद्ध दिल छूने वाली शायरी जो की आप भेज सकते है अपने प्रेमी या प्रेमिका को :

उसके पहलू से लग के चलते हैं
हम कहीं टालने से टलते हैं
मै उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलतें हैं
वो है जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं
क्या तकल्लुफ्फ़ करें ये कहने में
जो भी खुश है हम उससे जलते हैं

यह भी देखे : हिंदी शायरी Bewafa

John Elia Poetry Books

जॉन एलिया पोएट्री बुक्स : जॉन एलिया द्वारा लिखी गयी कुछ प्रसिद्ध कविताये जिनसे आप जान सकते है लव पोएट्री भी :

अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़
वो बरसों बाद जब मुझ से मिला है
भला मैं पूछता उससे तो कैसे
मताए-जां तुम्हारा नाम क्या है?

साल-हा-साल और एक लम्हा
कोई भी तो न इनमें बल आया
खुद ही एक दर पे मैंने दस्तक दी
खुद ही लड़का सा मैं निकल आया

दौर-ए-वाबस्तगी गुज़ार के मैं
अहद-ए-वाबस्तगी को भूल गया
यानी तुम वो हो, वाकई, हद है
मैं तो सचमुच सभी को भूल गया

रिश्ता-ए-दिल तेरे ज़माने में
रस्म ही क्या निबाहनी होती
मुस्कुराए हम उससे मिलते वक्त
रो न पड़ते अगर खुशी होती

दिल में जिनका निशान भी न रहा
क्यूं न चेहरों पे अब वो रंग खिलें
अब तो खाली है रूह, जज़्बों से
अब भी क्या हम तपाक से न मिलें

शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी
नाज़ से काम क्यों नहीं लेतीं
आप, वो, जी, मगर ये सब क्या है
तुम मेरा नाम क्यों नहीं लेतीं

Jaun Elia Poetry

John Elia Poetry Images

जॉन एलिया पोएट्री इमेजेज : जॉन एलिया की इमेज उनकी पोएट्री के साथ और आज ही शेयर कर सकते है और अपडेट करिये अपने व्हाट्सएप्प प्रोफाइल पर :

फारेहा निगारिना, तुमने मुझको लिखा है
“मेरे ख़त जला दीजे !
मुझको फ़िक्र रहती है !
आप उन्हें गँवा दीजे !
आपका कोई साथी, देख ले तो क्या होगा !
देखिये! मैं कहती हूँ ! ये बहुत बुरा होगा !”

मैं भी कुछ कहूँ तुमसे,
फारेहा निगारिना
ए बनाजुकी मीना
इत्र बेज नसरीना
रश्क-ए-सर्ब-ए-सिरमीना

मैं तुम्हारे हर ख़त को लौह-ए-दिल समझता हूँ !
लौह-ए-दिल जला दूं क्या ?
जो भी सत्र है इनकी, कहकशां है रिश्तों की
कहकशां लुटा दूँ क्या ?
जो भी हर्फ़ है इनका, नक्श-ए-जान है जनानां
नक्श-ए-जान मिटा दूँ क्या ?
है सवाद-ए-बीनाई, इनका जो भी नुक्ता है
मैं उसे गंवा दूँ क्या ?
लौह-ए-दिल जला दूँ क्या ?
कहकशां लुटा दूँ क्या ?
नक्श-ए-जान मिटा दूँ क्या ?

मुझको लिख के ख़त जानम
अपने ध्यान में शायद
ख्वाब ख्वाब ज़ज्बों के
ख्वाब ख्वाब लम्हों में
यूँ ही बेख्यालाना
जुर्म कर गयी हो तुम
और ख्याल आने पर
उस से डर गयी हो तुम

जुर्म के तसव्वुर में
गर ये ख़त लिखे तुमने
फिर तो मेरी राय में
जुर्म ही किये तुमने

जुर्म क्यूँ किये जाएँ ?
ख़त ही क्यूँ लिखे जाएँ ?

यह भी देखे : शेर ओ शायरी Ghalib

Jaun Elia Poetry Facebook

जॉन एलिया पोएट्री फेसबुक : आप आज ही फेसबुक पर शेयर करे इस पोएम को और और जाने और अधिक पोएम हमारे माध्यम से :

उसके पहलू से लग के चलते हैं
हम कहाँ टालने से टलते हैं

मैं उसी तरह तो बहलता हूँ यारों
और जिस तरह बहलते हैं

वोह है जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी खुश है हम उससे जलते हैं

है उसे दूर का सफ़र दरपेश
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं

है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं

हो रहा हूँ मैं किस तरह बर्बाद
देखने वाले हाथ मलते हैं

तुम बनो रंग, तुम बनो ख़ुशबू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं

You have also Searched for : 

jaun elia real name
jaun elia quotes
jaun elia poetry books pdf
john elia poetry in urdu font

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*