Ganga Dussehra

Ganga Dussehra Date 2017

गंगा दशहरा : जैसा की हम सभी जानते है कि भारत एक त्यौहारो का देश है इसीलिए हम आपको जून के महीने पड़ने वाले सबसे धार्मिक त्यौहार गंगा दशहरा के बारे में बताते है इस दिन लोग अपने पापो से मुक्ति पाने के लिए गंगा नदी में स्नान करते है या व्रत भी रखते है और गंगा मैया का पूजन भी करते है जिससे हमें अनेक फलो कि प्राप्ति होती है वैसे इससे पहले हम आमलकी एकादशी, विजया एकादशी, जया एकादशी और षटतिला एकादशी पढ़े चुके है जो कि काफी धार्मिक व्रत होते है इसीलिए अब हम आपको गंगा दशहरा के व्रत के बारे में बताते है जिससे की आप व्रत और कैसे रखेंगे इसकी जानकारी पा सकते है |

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Ganga Dussehra Date 2017

गंगा दशहरा डेट 2017 : हिन्दू कलेंडर के अनुसार दशहरा प्रतिवर्ष ज्येष्ठा माह की शुक्ल पक्ष कि दशमी तिथि को पड़ता है इसीलिए अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल 2017 में 4 जून को इसका योग बन रहा है |

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Ganga Dussehra Importance

गंगा दशहरा इम्पोर्टेंस : गंगा दशहरा के दिन आप स्नान करने से आपको अन्य प्रकार के फलो कि प्राप्ति होती है जिसके लिए आप उनके महत्व जान सकते है :

  • गंगा दशहरा के दिन स्नान करने से सभी पापो से मुक्ति मिलती है |
  • इस दिन व्यक्ति को दान पुण्य करने चाहिए और दान में दी गयी कोई भी चीज़ कि संख्या दस होनी चाहिए |
  • इस दिन गंगा नदी में गंगा स्तोत्र का पथ करना चाहिए जिससे आपके सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है जो स्तोत्र आपको स्कन्द पुराण में दशहरा नाम से दिया गया है |
  • दान करने से शुभ फलो में और अधिक वृद्धि होती है |

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Ganga Dussehra

Ganga Dussehra In Hindi

गंगा दशहरा इन हिंदी : अयोध्या के राजा सगर थे उनके साथ हज़ार पुत्र थे उन्होंने एक बार अश्वमेघ यज्ञ करने की सोची और यज्ञ के लिए अपने घोड़े को छोड़ दिया और राजा इंद्र यह यज्ञ असफल करना चाहते थे और उन्होंने अश्वमेघ का घोडा छिपा दिया जहा घोडा छिपाया था वह महर्षि कपिल का आश्रम था | और राजा सगर के पुत्र ने जब घोडा ढूंढने के लिए आश्रम पहुंचे तो महर्षि कपिल का तपस्या भंग हो गयी और उन्हें अपनी शक्ति से राजा के साथ हज़ार पुत्रो का सर्वनाश कर दिया |

उसके बाद राजा सगर ने सभी पुत्रो की मृत्तात्माओ की मुक्ति के लिए गंगा नदी को धरती पर लेन के लिए घोर तपस्या की क्युकी धरती का सारा पानी अगस्त्य ऋषि पी गए थे लेकिन वह इसमें असफल रहे और उन्हें भी अपने प्राण त्याग दिए | फिर महराज दिलीप के पुत्र महाराज भगीरथ ने गंगा को धरती पर पाने के लिए घोर तपस्या की और इसमें वह सफल हुए और ब्रह्मा जी प्रकट होकर बोले की की तुम्हे गंगा को धरती पर लेन के लिए भगवान शिव की शरण लेनी होगी | फिर उन्होंने भगवान् शिव की तपस्या एक तंग पर खड़े होकर की और भगवान शिव अपनी जटाओ से गंगा को रोकने के लिए तैयार हो गए इस तरह से महाराज भगीरथ अपने पूर्वजो को मुक्ति दिलाने में सफल होते है |

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