Dushyant Kumar Shayari

Dushyant Kumar Shayari

दुष्यंत कुमार शायरी : दुष्यंत कुमार का पूर्ण नाम दुष्यंत कुमार त्यागी है और यह अपने ज़माने के बहुत बड़े शायर, ग़ज़लकार और कवि रह चुके है इनका जन्म 1933 में बिजनोर में हुआ था इन्होंने हिंदी और उर्दू में कई शायरी की है उन्होंने कई कविताये भी लिखी है इनकी मृत्यु 1975 में हुई थी | तो आज हम आपको उनकी कुछ दिल छूने वाली शायरी बताएँगे | वैसे इन्होंने लव के ऊपर भी कई शायरियाँ लिखी है | और वह अपने ज़माने के अमजद इस्लाम और अकबर  इलाहाबादी जैसे शायरों को भी टक्कर दे चुके है उनकी शायरिया वे दो लाइन के शेर काफी प्रेरणादायक होती है |

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Desi Shayari Dushyant Kumar

देसी शायरी दुष्यंत कुमार : मशहूर सिंगर दुष्यंत कुमार जी द्वारा कहीगयी कुछ ऐसी शायरियाँ जो की आपका दिल छू लेंगी जाने हमारे इस पोस्ट द्वारा :

इरादे बाँधता हूँ, सोचता हूँ, तोड़ देता हूँ,
कहीं ऐसा न हो जाये, कहीं वैसा न हो जाये।

अभी महफ़िल में चेहरे नादान नज़र आते हैं,
लौ चिरागों की जरा और घटा दी जाये।

शेर-ओ-सुखन क्या कोई बच्चों का खेल है?
जल जातीं हैं जवानियाँ लफ़्ज़ों की आग में।

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Motivational Shayari of Dushyant Kumar

मोटिवेशनल शायरी ऑफ़ दुष्यंत कुमार : दुष्यंत कुमार जी की शायरी जितना अधिक हमारे दिल को छुटि है उतनी ही वह शायरिया हमको मोटीवेट करती है:

मैं शब्दों से खेलती हूँ हैरान होते हैं लोग,
करती हूँ हाले दिल बयान तो परेशान होते हैं लोग।

लगता है इतना वक़्त मेरे डूबने में क्यूँ…?
अंदाज़ा मुझ को ख़्वाब की गहराई से हुआ।

हम कितने दिन जिए ये जरुरी नहीं,
हम उन दिनों में कितना जिए ये जरुरी है।

Desi Shayari Dushyant Kumar

 

Dushyant Kumar Ghazal in Hindi

दुष्यंत कुमार ग़ज़ल इन हिंदी : अगर आप दुष्यंत कुमार जी की हिंदी में ग़ज़ल जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है इसमें आपको दो लाइन में शायरियाँ भी मिलती है :

देखा है आज मुझे भी गुस्से की नज़र से,
मालूम नहीं आज वो किस-किस से लड़े है।

सुकून मिलता है दो लफ्ज़ कागज पे उतार कर,
कह भी देता हूँ और आवाज भी नहीं होती

डरता हूँ इक़रार से कहीं वो इनकार न कर दे,
यूँ ही तबाह अपनी जिंदगी हम यार न कर दे.

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Dushyant Kumar Tu Kisi Rail si Guzarti Hai

कोई ताबीज़ ऐसा दो कि मैं चालाक हो जाऊं,
बहुत नुकसान देती है मुझे ये सादगी मेरी।

मर्जी से जीने की बस ख्वाहिश की थी मैंने,
और वो कहते हैं कि खुदगर्ज बन गये हो तुम।

दौड़ती भागती दुनिया का यही तोहफा है,
खूब लुटाते रहे अपनापन फिर भी लोग खफ़ा हैं।

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