होली पर कविता

होली पर बाल कविता

Holi par kavita : जैसा की हम सभी जानते है की होली हिन्दुओ के लिए बहुत ही ख़ास और मनोरंजन का त्यौहार है तो ऐसे ही हमारे कुछ विश्व-विख्यात कवि हुए जिन्होंने होली के ऊपर कविताये लिखी तो आज हम बताएँगे की होली कैसे मनाई जाती है क्या खासियत है होली 2017 की और आपको ऐसे ही कुछ ख़ास होली पर शायरी जो होली के ऊपर बनी हुई है उनकी जानकारी देंगे वैसे तो आजकल के स्कूलों में भी होली पर निबंध विशेष रूप से पढ़ाया जाता है |

यह भी देखे : Bhishma Ashtami

होली पर बाल कविता | Holi par baal kavita

Holi Poem : अगर आप होली कविता पोएम इन हिंदी के माध्यम से जानना चाहे तो जाने किस प्रकार से होली की शुभकामनाये अपने दोस्तों को होली कविता के माध्यम से देंगे :

गुलाल की छींटें
जो बिखराए थे कभी राहों में
मेरा फागुन
आज भी महका जाती हैं
छूती हैं हौले से मुझे
मन चन्दन हो जाता है

सामने थाल में हो जब
बर्फी, गुझिया रसीले
तो मीठी है होली
पर हो जब उसमें
भूख, बेबसी, गरीबी
तो कहो कैसी है होली?

रंग तुम्हारे
चुपचाप मेरे जीवन में
चले आते हैं
बेनूर चूनर पर
बरस
मुझ में समा जाते हैं
मै सतरंगी हो जाती हूँ

यह भी देखे : Jaya Ekadashi Vrat Katha in Hindi

होली का त्यौहार | Holi ka Tyohaar

होली का त्यौहार के साथ आप होली के रंग कवि‍ताओं के संग पढ़िए जिनसे की आप प् सकते है बेहतरीन कविताये और पा सकते है होली पर हिन्दी कविता भी :

रंग पर चढ़ के
शब्द तुम्हारे
गलियारे में उधम मचाते हैं
रात डेवड़ी पर
औंधेमुँह सो जाते हैं
फींके सपने मेरे
इन्द्रधनुषी हो जाते हैं

बचा सबकी नज़र
मुझ पर फेंका
प्रेम रंग
उस का अभ्रक
चुभता है आज भी आँखों में
हर होली आँखें बरस जाती हैं

होली की मस्ती में
खेला खूब रंग
उधड़ी त्वचा बाल गिरा
आँखें हो गईं लाल
टेसू के रंग नहीं
रसायनिक हैं अबीर गुलाल

होली पर कविता

होली के दोहे | Holi ke Dohe

महँगाई की मार
गरीबों के रसोई पर पड़ती है
इनके घर
गुझिया कहाँ तलती है
रंग है नहीं
तो कीचड़ से चलते हैं काम
सोचती हूँ
क्या त्यौहार में भी नहीं आते हैं
इनके घर भगवान

बुराई जली
प्रह्‌लाद बचा
तो होली का रंग सजा
आज चहुँओर है
होलिका का राज
कोने में जल रहा प्रह्‌लाद
फिर कैसी होली है आज

यह भी देखे : Ratha Saptami

होली पर हास्य कविता | Holi par hasya kavita

लाल गुलाबी नीली पीली
खुशियाँ रंगों जैसे छायीं
ढोल मजीरे की तानों पर
बजे उमंगों की शहनाई !
गुझिया पापड़ पकवानों के
घर घर में लगते मेले
खाते गाते धूम मचाते
मन में खुशियों के फूल खिले

अबकी होली में हो जाये,कुछ एसा अदभुत चमत्कार
हो जाये भ्रष्टाचार स्वाहा, महगाई,झगड़े, लूटमार
सब लाज शर्म को छोड़ छाड़,हम करें प्रेम से छेड़ छाड़
गौरी के गोरे गालों पर ,अपने हाथों से मल गुलाल
जा लगे रंग,महके अनंग,हर अंग अंग हो सरोबार
इस मस्ती में,हर बस्ती में,बस जाये केवल प्यार प्यार
दुर्भाव हटे,कटुता सिमटे,हो भातृभाव का बस प्रचार
अबकी होली में हो जाये,कुछ एसा अदभुत चमत्कार

 

 

loading...

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*