हवन कैसे करे

हवन कैसे करे

Hawan kaise kare : हवन अथवा यज्ञ भारतीय परंपरा अथवा हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का एक कर्मकांड है हवन करने के लिए क्या-2 चीज़ की आवश्यकता पड़ती है या किस चीज़ के माध्यम से हम हवन कर सकते है और हवन किस वक़्त करना चाहिए ये सभी जानकारी आज हम आपको अपनी इस पोस्ट में देते है क्योंकि हवन करने के लिए आपको कई मंत्रो का जाप, शुभ मुहूर्त, हवन सामग्री, की आवश्यकता पड़ती है हवन यानि यज्ञ वैसे तो ये हमारे घर में शांति बनाये रखने के लिए या कोई मनोकामना पूरी हो जाने पर किया जाता है तो जाने की तरह से आप इसकी पूजा पाठ करेंगे |

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हवन करने की विधि इन हिंदी

Hawan karne ki Vidhi in Hindi : हवन करने के लोइये किन-2 चीज़ों की आवश्यकता पड़ती है इन सभी जानकारी के लिए आप जान सकते है हमारी ऐसी ही कुछ विधिया जिनके माध्यम से आप हवन की सामग्री जान सकते है और किस तरह से हवन होता है सरल हवन विधि पूरी जानकारी आप हमारे माध्यम से जानते है :

वैसे अपने अक्सर देखा होगा हवन कुण्ड में हमेशा तीन सिद्धिया होती है इसका भी मतलब है क्योंकि इन तीनो सिद्धियो में तीन देवता निवास करते है :
हवन कुंड की पहली सीढि में विष्णु भगवान का वास होता हैं.
दूसरी सीढि में ब्रह्मा जी का वास होता हैं.
तीसरी तथा अंतिम सीढि में शिवजी का वास होता हैं

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हवन करने की विधि इन हिंदी

हवन सामग्री बनाने की विधि

एक लकड़ी की चौकी, एक नारियल, चावल, आम के पत्ते, हल्दी मिश्रित अक्षत, चंदन, कुमकुम या सिंदूर, मौली, गंगाजल, पुष्प, तुलसीदल, दूर्वा, बिल्वपत्र, अगरबत्ती, दीपक (सरसों के तेल से जलायें ), रूई, माचिस, कपूर, सफ़ेद कपड़ा, , कुछ फल, प्रसाद, दोना (सामग्री डालने के लिए )

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हवन मंत्र

Hawan Mantra : इन मंत्रो के माध्यम से मंत्रो का जाप करे ये वो मंत्र है जिनके माध्यम से आप हवन कर सकते है हवन करते वक़्त इन सभी मंत्रो का जाप करना अनिवार्य होता है :

ॐ आग्नेय नम: स्वाहा (ॐ अग्निदेव ताम्योनम: स्वाहा),

ॐ गणेशाय नम: स्वाहा,

ॐ गौरियाय नम: स्वाहा,

ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा,

ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा,

ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा,

ॐ हनुमते नम: स्वाहा,

ॐ भैरवाय नमस्वाहा,

ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा,

ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा,

ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा,

ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा,

ॐ शिवाय नम: स्वाहा,

ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुति स्वाहा,

ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: क्षादी: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शक्रे शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: स्वाहा,

ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा,

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्/ उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा,

ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।

 

 

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