शेर ओ शायरी Ghalib

शेर ओ शायरी Ghalib

Sher O Shayari : मिर्ज़ा ग़ालिब का नाम शेरो की शायरियो के जगत में बहुत ही शिद्दत से लिया जाता है क्योंकि उनकी दिल छूने वाली शायरियो से हम काफी कुछ सीखते है और उनके दो लाइन के शेर भी उनकी हस्ती को बयां करते है तो आज हम आपको ग़ालिब जी की कुछ ऐसी ही प्रसिद्ध शायरियाँ बताते है मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा कही गयी कुछ ऐसी शायरियाँ जो लिए प्रेरणादायी भी सिद्ध होती है  जिन्हें सुन कर आप भी उनके फैन हो जायेंगे तो पेश है आपके लिए मिर्ज़ा ग़ालिब की प्रसिद्ध शेरो-शायरियाँ |

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मिर्ज़ा ग़ालिब के शेर

Mirza Ghalib Ke Sher : मिर्ज़ा जी के बेहतरीन शेर जिनके माध्यम से आप काफी कुछ सीख सकते है और उनके बारे में और भी कई बाते :

गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत .
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
चल निकलते जो में पिए होते
क़हर हो या भला हो , जो कुछ हो
काश के तुम मेरे लिए होते
मेरी किस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी या रब कई दिए होते
आ ही जाता वो राह पर ‘ग़ालिब ’
कोई दिन और भी जिए होते

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मिर्ज़ा ग़ालिब Ghazals of Ghalib

ग़ज़ल ऑफ़ ग़ालिब यदि आप ग़ालिब जी की ग़ज़ल जानना चाहे तो इनको पढ़े और जाने उनकी ग़ज़ल का मतलब ये बहुत ही बेहतरीन है आप चाहे तो उन्हें फेसबुक पर भी शेयर कर सकते है :

फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया

सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है

मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना
मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते “ग़ालिब”
अर्श से इधर होता काश के माकन अपना

मिर्ज़ा ग़ालिब के शेर

दीवाने ए ग़ालिब

Deewan E Ghalib : ये बहुत ही मदमस्त करने वाली शायरियाँ जिनके माध्यम से ग़ालिब जी की हस्ती के बारे में हम आज्ञ सकते है :

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

ज़रा कर जोर सीने पर की
तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो
वो निकले तो दिल निकले ,
जो दिल निकले तो दम निकले

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गालिब की शेरो शायरी | Ghalib ki Shero Shayari

इस नज़ाकत का बुरा हो , वो भले हैं तो क्या
हाथ आएँ तो उन्हें हाथ लगाए न बने
कह सके कौन के यह जलवागरी किस की है
पर्दा छोड़ा है वो उस ने के उठाये न बने

कितने शिरीन हैं तेरे लब के रक़ीब
गालियां खा के बेमज़ा न हुआ
कुछ तो पढ़िए की लोग कहते हैं
आज ‘ग़ालिब ‘ गजलसारा न हुआ

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

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