देशभक्ति कविताएं | Patriotic Poems in Hindi

Patriotic Poems in Hindi

देशभक्ति कविताएं : दोस्तों जैसे की हमने अपने पीछे आर्टिकल में आपको रामधारी सिंह दिनकर की देश भक्ति कविता बताई थी आज उसी कड़ी में हम कुछ और देशभक्ति पर आधारित कविता आपको बताएँगे जिनमे से कुछ देश भक्ति कविता बच्चों के लिए होंगी | तो चलिए देखते हैं देशभक्ति कवितायेँ यानी की Patriotic Poems in Hindi 

देशभक्ति कविताएं | देशभक्ति पर आधारित कविता

भारत का गौरव

यह देख दशा तुम भारत की, जो मानवता का मुकुट रहा
जिसमें अशांति का नाम न था, यह देखो गर्त में गिरने चला
फिर भी अगर तुम अचेत रहो, फिर इससे ग्लानि और क्या हो………….
तुम फिर भी यों हीं बैठे रहो, और माता की दुर्दशा हो ?………………………….
यह तुम सोचो क्या यह ग्लानि नहीं, मानवता की यह हानि नहीं
मानव तुम पर थूकेंगे हीं, तुमको उलाहना देंगे हीं
मानव तुम भी सचेष्ट रहो, ताकि मर्यादा धूल न हो…………………..
पहले बुराइयाँ दूर करो, फिर नव समाज निर्माण करो………………………….
भारत में अनेक बुराई है, अच्छे लोगों ने राजनीति से दूरी बनाई है
सत्ता स्वार्थियों के पास है गिरवी पड़ी, इसलिए गरीबों पर आफत बड़ी
अच्छे आदर्शों को हमने भुला दिया, इसलिए अपना सबकुछ गंवा दिया………….
कन्या अब भी अबला है, न जाने नारी को क्यों मिली यह सजा है………………………….
पहले तुम कुप्रथाओं का नाश करो, ताकि दुखियन का भी उद्धार तो हो
तुम सदा-सदा सचेष्ट रहो, ताकि भारत में कोई दुखी न हो
इस पर न तुम्हारा ध्यान गया, भारत का गौरव मिट हीं गया
मैं फिर कहता हूँ मनन करो, भारत का गौरव प्राप्त करो…….
तुम मनन करो…….. तुम मनन करो………………………….

                          – डॉ नारायण मिश्र

देशभक्ति कविताएं

देशभक्ति पर आधारित कविता

सुभाष चंद्र बोस – कविता 

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं।

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें जीवन, न रवानी है!
जो परवश होकर बहता है,
वह खून नहीं, पानी है!

उस दिन लोगों ने सही-सही
खून की कीमत पहचानी थी।
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में
मॉंगी उनसे कुरबानी थी।

बोले, “स्वतंत्रता की खातिर
बलिदान तुम्हें करना होगा।
तुम बहुत जी चुके जग में,
लेकिन आगे मरना होगा।

आज़ादी के चरणें में जो,
जयमाल चढ़ाई जाएगी।
वह सुनो, तुम्हारे शीशों के
फूलों से गूँथी जाएगी।

आजादी का संग्राम कहीं
पैसे पर खेला जाता है?
यह शीश कटाने का सौदा
नंगे सर झेला जाता है”

यूँ कहते-कहते वक्ता की
आंखों में खून उतर आया!
मुख रक्त-वर्ण हो दमक उठा
दमकी उनकी रक्तिम काया!

आजानु-बाहु ऊँची करके,
वे बोले, “रक्त मुझे देना।
इसके बदले भारत की
आज़ादी तुम मुझसे लेना।”

हो गई सभा में उथल-पुथल,
सीने में दिल न समाते थे।
स्वर इनकलाब के नारों के
कोसों तक छाए जाते थे।

“हम देंगे-देंगे खून”
शब्द बस यही सुनाई देते थे।
रण में जाने को युवक खड़े
तैयार दिखाई देते थे।

बोले सुभाष, “इस तरह नहीं,
बातों से मतलब सरता है।
लो, यह कागज़, है कौन यहॉं
आकर हस्ताक्षर करता है?

इसको भरनेवाले जन को
सर्वस्व-समर्पण काना है।
अपना तन-मन-धन-जन-जीवन
माता को अर्पण करना है।

पर यह साधारण पत्र नहीं,
आज़ादी का परवाना है।
इस पर तुमको अपने तन का
कुछ उज्जवल रक्त गिराना है!

वह आगे आए जिसके तन में
खून भारतीय बहता हो।
वह आगे आए जो अपने को
हिंदुस्तानी कहता हो!

वह आगे आए, जो इस पर
खूनी हस्ताक्षर करता हो!
मैं कफ़न बढ़ाता हूँ, आए
जो इसको हँसकर लेता हो!”

सारी जनता हुंकार उठी-
हम आते हैं, हम आते हैं!
माता के चरणों में यह लो,
हम अपना रक्त चढाते हैं!

साहस से बढ़े युबक उस दिन,
देखा, बढ़ते ही आते थे!
चाकू-छुरी कटारियों से,
वे अपना रक्त गिराते थे!

फिर उस रक्त की स्याही में,
वे अपनी कलम डुबाते थे!
आज़ादी के परवाने पर
हस्ताक्षर करते जाते थे!

उस दिन तारों ने देखा था
हिंदुस्तानी विश्वास नया।
जब लिक्खा महा रणवीरों ने
ख़ूँ से अपना इतिहास नया।

                                 – श्री गोपाल दास व्यास जी

राष्ट्रगीत में भला कौन वह

राष्ट्रगीत में भला कौन वह
भारत-भाग्य विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका
गुन हरचरना गाता है।
मख़मल टमटम बल्लम तुरही
पगड़ी छत्र चंवर के साथ
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
जय-जय कौन कराता है।
पूरब-पच्छिम से आते हैं
नंगे-बूचे नरकंकाल
सिंहासन पर बैठा, उनके
तमगे कौन लगाता है।
कौन-कौन है वह जन-गण-मन-
अधिनायक वह महाबली
डरा हुआ मन बेमन जिसका
बाजा रोज बजाता है।

                                  – रघुवीर सहाय

देशभक्ति पर आधारित कविता

देश भक्ति कविता बच्चों के लिए

मेरा भारत देश महान

जिसकी सुहानी सुबह है होती होती सुनहरी शाम है
वीर बहादुर जन्मे जिसमें मेरा भारत महान है

भारत की माटी के पुतले लोहे के माने जाते हैं
गांधी, नेहरू, सुभाष, तिलक इस नाम से जाने जाते हैं
मेरे देश की माटी ऐसी, जहां जन्म लेते भगवान
मेरा भारत देश महान, मेरा भारत देश महान

सोने के हैं दि‍न यहां, चांदी की हैं रात
नदियों में अमृत की धार,सुंदर-सुंदर घाट
फिर बने सोने की चिड़ि‍या हम सबका है ये अरमान
मेरा भारत देश महान, मेरा भारत देश महान

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