अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स उद्धरण | Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स उद्धरण

अटल बिहारी वाजपेयी के विचार : अटल बिहारी वाजपेयी भारतवंश के अब तक के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री माने जाते हैं | अगर अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी की बात करी जाए तो वाजपेयी जी भारत के 10वें प्रधान मंत्री थे, पहली बार वे सिर्फ 13 दिन के लिए प्रधान मंत्री बने थे 1996 और उसके बाद वे 1998 से 2004 में भारत के प्रधान मंत्री बने थे | अटल बिहारी वाजपाई अपने इंस्पिरेशनल कोट्स व अटल बिहारी वाजपेयी कविता कोश के लिए प्रसिद्द थे तो आइये जानते हैं कुछ अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स यानी की Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

यह भी देखें : मुंशी प्रेमचंद कोट्स

अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स

पहले एक दृढ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक मजबूत होगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझदारी का हिस्सा होने का ढोंग नहीं करना चैये , जबकि वो आतंकवाद को बढाने ,उकसाने , और प्रायोजित करने में लगा हुआ हो .

भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता

अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स उद्धरण | Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी उद्धरण

गरीबी बहुआयामी है । यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थय , राजनीतिक भागीदारी , और हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

जो लोग हमसे पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान से वार्ता करेंगे वो शायद ये नहीं जानते कि पिछले 55 सालों में पाकिस्तान से बातचीत करने के सभी प्रयत्न भारत की तरफ से ही आये हैं

जैव – विविधता कन्वेंशन ने विश्व के गरीबों को कोई ठोस लाभ नहीं पहुँचाया है

अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स उद्धरण | Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता

संयुक्त राष्ट्र की अद्वितीय वैधता इस सार्वभौमिक धारणा में निहित है कि वह किसी विशेष देश या देशों के समूह के हितों की तुलना में एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करता है |

आज परस्पर वैश्विक निर्भरता का मतलब है कि विकासशील देशों में आर्थिक आपदायें, विकसित देशों पर एक प्रतिक्षेप पैदा कर सकता है।

शीत युद्ध के बाद अब एक गलत धारणा यह बन गयी है की संयुक्त राष्ट्र कहीं भी कोई भी समस्या का समाधान कर सकता है।

हमारे परमाणु हथियार शुद्ध रूप से किसी भी विरोधी के परमाणु हमले को ख़त्म करने के लिए हैं।

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